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लोकरंग में नहा इठलाई तेली की सराय
ऐतिहासिक तेली की सराय परिसर में जिला प्रशासन एवं जिला पर्यटन विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हरदा भुआणा उत्सव में रविवार रात नृत्यांगनाओं ने दिलकश लोकनृत्य पेश किए। तेली की सराय लोक रंग में नहा इठलाई।
हरदा | 13-फरवरी-2012
 
     राजस्थानी लोक वाद्य यंत्र कमायचा पर खड़ताल और ढोलक की जुगलबंदी, पुंगी से निकलते लहरों के स्वर। इन पर कलाकार  सीमा गीता एवं साथियों का सांप की तरह बल खाते हुए नृत्य। कालबेलिया के इस सम्मोहन में डूबे दर्शक देर तक अपनी सुधबुध खोए रहे। ऐसा लगा कि सराय के मुक्ताकाष मंच पर राजस्थान का माहौल जीवंत हो गया। कालबेलिया नृत्य जैसे ही शुरू हुआ कि परिसर में बैठे लोग रोमांचित हो उठे। गीत पर जब राजस्थानी संगीत की छाप लगी तो खड़ताल और ढोलक की जुगल बंदी ने आकर्षक कालबेलिया नृत्य को और अधिक मनोरंजक बना दिया । काले रंग की चोली घाघरा जिस पर चमकीले छोटे-छोटे ष्षीषे लगे हुए थे के साथ हाथों व बालों की लंबी चोटियों पर उनकी नर्तन लय बिजली की तरह रही। नर्तकियों का कालबेलिया नृत्य प्रस्तुत करते हुए उल्टी चकरी खाना जमीन पर रखे कागज को मुंह से उठाया तथा नृत्य के दौरान ही दोनों पलकों से अंगूठियां उठाना सबको चकित कर गया।  गजब का लोच और गति देख उपस्थित दर्शक सम्मोहित हुए । नृत्य महिलाओं द्वारा किया जा रहा था पुरुष नृत्य के दौरान बीन व ताल वाद्य बजा रहे थे और लोग तालियां बजाने पर मजबूर थे। उड़ीसा का डालखाई जो षंकर बेहरा और साथियों द्वारा प्रस्तुत किया गया को दर्शकों की सराहना मिली। इसमें प्रत्येक पंक्ति की समाप्ति पर ढोल गूँजा अन्तिम पंक्ति सभी नर्तकों ने मिलकर गाई। हर्षोन्माद के इस नृत्य में जिसमें हर आयु के पुरुष नाचे मस्ती में चिल्लाये और गोलाई में घूमते हुए नृत्य किया । उनके कंधे और कूल्हे ढोल की लय पर थिरकते मस्ती को और बढा रहे थे। चमत्कारिकता एवं करतब के लिए प्रसिद्ध भवई नृत्य को आपानाथ तथा साथियों ने जब सिर पर एक के बाद एक, सात-आठ मटके रख कर थाली के किनारों पर नाचा, गिलासों पर नृत्य किया, नाचते हुए जमीन से मुँह से रुमाल उठाया तलवार की धार पर अपने पैर के तलुओं को टिकाकर झूलते हुए नृत्य किया तो उपस्थित दर्षकों ने दातों तले उंगली दबाई। कौतूहल व सिरहन उत्पन्न करने वाले कारनामे करने वाले आपानाथ बताते है कि राजस्थान के गाँवों में पानी की कमी होने के कारण महिलाओं को कई किलोमीटर तक सिर पर घड़ा उठाए पानी भरने जाना पड़ता है । यह नृत्य पानी भरने जाते समय के आल्हाद और घड़ों को सिर पर रख संतुलन बनाने की अभिव्यक्ति है। इस नृत्य में महिलाएँ सिर पर पीतल की रख कर संतुलन बनाते हुए पैरों से थिरकते हुए हाथों से विभिन्न नृत्य मुद्राओं को प्रदर्शित करती है। कान्हा को बुलाने के लिए राधा की पुकार पर आधारित मयूर तथा होली नृत्य चित्ताकर्षक रहा।  कलाकारों ने दर्षकों के संग फूलों की होली  खेली। पुरी के चन्द्रमणी प्रधान एवं साथियों द्वारा गोटी पुआ नृत्य, संस्कार विद्या पीठ हरदा के छात्रों द्वारा  भुआणा उत्सव के थीम सांग पर प्रस्तुत नृत्य ने सबका मन मोहा  ।
        तेली की सराय में आने वालों को भारत की सांस्कृतिक विरासत व परम्पराओं को देखने, समझने व अनुभव करने का अवसर मिला । सांस्कृतिक दल की विविधता पूर्ण प्रस्तुति में रेगिस्तानी प्रदेश राजस्थान से लेकर सुदूर पूर्व के उत्तराखंड तक के लोक नृत्य व परम्परा साकार हो उठी। मनोहारी लोकनृत्य के साथ ही रोमांचित कर देने वाले करतब देख लोग आश्चर्य चकित थे। मनोरंजक प्रस्तुतियों के साथ ही प्रदेश के लोगों को भारत की विविधता में एकता की संस्कृति का साक्षात्कार हुआ। नृत्य एवं संगीत के कार्यक्रमों का दर्शकों ने खूब आनंद लूटा। इस अवसर पर कलाकारों की कला एवं अदाओं का उपस्थित दर्षकों ने खूब लुप्त उठाया तथा तालियां बजाकर उनकी हौसला अफजाई की।         
           भुआणा उत्सव के चलते तेली की सराय को रंगीन रोशनी से सजाया गया था। यहां दर्षकों के लिए प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रस्तुतियों का स्क्रीन पर  प्रदर्षन भी किया गया था। सराय के प्रत्येक कमरों के साथ प्रवेश द्वार पर रंगीन बल्बों के फोकस से जो लाइटिंग की गई थी। वह रात में बहुत आकर्षक लग रही थी। अतिथियों में सांसद श्रीमती ज्योति धुर्वे, विधायक श्री कमल पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ यामिनी मानकर, नपा अध्यक्ष श्रीमती संगीता बंसल, नगर पंचायत  टिमरनी अध्यक्ष श्री सुभाष जायसवाल, कलेक्टर डॉ सुदाम खाडे, पुलिस अधीक्षक श्री आर.एस. उईके मौजूद थे।
 
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