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नरवाई जलाने से खत्म होते हैं भूमि की उर्वरा क्षमता एवं मिट्टी के पोषक तत्व साथ ही इससे पर्यावरण को भी खतरा बना रहता हैं
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बुरहानपुर | 20-मार्च-2017
 
   
    प्रतिवर्ष रबी कटाई के बाद किसान खेतों में नरवाई जला देते हैं। इससे होने वाले नुकसान मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व एवं मिट्टी की उर्वरा क्षमता को खत्म कर देते हैं। साथ ही इससे जमीन बंजर हो रही है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक श्री एम.एस.देवके ने कृषकों के लिये उपयोगी सलाह दी हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष फसल कटाई के बाद नरवाई नहीं जलाये। नरवाई जलाने से आस-पास के वातावरण का ताप बढने लगता है। इससे विभिन्न प्रकार की गैसें निकलती है जो कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी है। इसका परिणाम वर्तमान में हम जलवायु परिवर्तन के रूप में देख रहे है। साथ ही पशुओं को प्राप्त होने वाला भूसा भी नही बचता हैं। नरवाई जलाने से मिट्टी में स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होने वाले कार्बनिक पदार्थ में कमी आ जाती है। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि फसल कटाई के उपरांत जो फसल अवशेष रह जाते हैं, उनका उचित तरीके से प्रबंधन किया जाना चाहिए।
    उन्होंने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन हेतु 14 अप्रैल 2017 को अंबेडकर जयंती पर आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में कृषकों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जायेगा एवं इसके प्रबंधन के संबंध में जानकारी दी जाएगी। जिले के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाएगा, जहां व्यापक रूप से नरवाई जलाई जाती है। ऐसे क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। फसल अवशेष प्रबंधन हेतु उपयोगी मशीनें जैसे हेप्पीसीडर, जीरोटिल सीडड्रिल, रिबर्सिबल प्लाऊ, स्ट्रारीपर आदि यंत्रों द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन किया जा सकता है। फसल कटाई कार्य प्रारंभ करने के पूर्व नरवाई जलाने वाले क्षेत्रों को चिन्हित क्षेत्र के किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के अवगत कराया जाएगा। साथ ही फसल अवशेषों के प्रबंधन से होने वाली संभावित आय के बारे में व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार कर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में कंबाइन हार्वेस्टर से फसल कटाई की जाती है, वहां हार्वेस्टर के साथ स्ट्रारीपर एवं रीपरकम बाइंडर के उपयोग की सलाह दी है। जिससे फसल को काफी नीचे से काटा जा सकता है। ऐसे में नरवाई जलाने की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने बताया कि खेती की गहरी जुताई रिवर्सिबल प्लाऊ तथा हेप्पीसीडर, जीरों टीलेज सीडड्रिल से बोवनी एवं रोटावेटर चलाकर फसल अवशेष मिट्टी में मिलाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन यंत्रों के उपयोग से फसल अवशेषों को मिट्टी में ही मिलाया जा सकेगा, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति में बढोत्तरी होगी और उत्पादन में भी वृद्धि होगी।
(6 days ago)
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