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गर्मी के मौसम में लू से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह
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छिन्दवाड़ा | 19-अप्रैल-2017
 
     कलेक्टर श्री जे.के.जैन व्दारा भारतीय मौसम विभाग की चेतावनी और वर्तमान गर्मी के मौसम को देखते हुये जन समुदाय को लू (तापघात) से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह देने और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण व्दारा जारी दिशा निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के साथ ही स्वास्थ्य केन्द्रों पर उचित व्यवस्था, मवेशियों की देख-रेख के उचित उपाय, एन.जी.ओ. और सामाजिक संगठनों के माध्यम से प्याऊ और राहत स्थल आदि की उचित व्यवस्था करने के उपाय करने के निर्देश दिये गये है ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। कलेक्टर श्री जैन ने ये निर्देश मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के साथ ही सभी राजस्व अनुविभागीय अधिकारियों, तहसीलदारों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण, निदेशक आकाशवाणी केन्द्र और अन्य संबंधित अधिकारियों को दिये है।
      कलेक्टर श्री जैन ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल से जून माह में लू का प्रकोप जारी रहने की संभावना व्यक्त की गई है। लू का प्रभाव जानलेवा भी हो सकता है इसलिये इससे बचाव के लिये आवश्यक सावधानी बरतना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सामान्य किसी स्थान पर लगातार अत्यधिक ताप अर्थात 40 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक तापमान और आर्द्रता की स्थिति को लू की स्थिति कहते है। इसमें 41.1 से 43 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने पर गर्म दिन, 43.1 से 44.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने पर लू और 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान रहने पर अत्यधिक लू की स्थिति मानी जाती है। व्यक्ति लू की पहचान कर और बचाव के उपाय अपनाकर लू से बच सकते है। गर्मी में अधिक देर तक बाहर धूप में रहने पर बहुत सारे लोग लू का शिकार हो जाते है और लोगों की लू के कारण मौत भी हो जाती है। लू के शिकार व्यक्ति को तेज सिर दर्द होता है। उसका मुंह और जबान सूखने लगती है। माथे, हाथ-पैर से पसीना आता है, घबराहट होती है और प्यास लगती है। उल्टी होती है, भूख बिलकुल नही लगती है। हालत अधिक खराब होने पर व्यक्ति बेहोश हो जाता है। इस समय त्वचा एकदम शुष्क और तापमान 105 डिग्री फेरनहाईट के आस-पास या उससे अधिक हो जाता है।
    कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि गर्मी में थोड़ी सी सावधानी और आहार-विहार पर ध्यान देने से लू तथा संक्रामक रोगो से बचा जा सकता है। इसके लिये व्यक्ति समाचार पत्र और रेडियो पर प्रसारित स्थानीय मौसम संबंधित जानकारियों का ध्यान रखे। पानी, छांछ, ओ.आर.एस. का घोल या घर में बने पेय जैसे लस्सी, नींबू पानी, आम का पना इत्यादि का अधिक से अधिक मात्रा में सेवन करें। गरिष्ठ, वसायुक्त भोजन, ज्यादा प्रोटीन, अल्कोहल, चाय, काफी जैसे पेय जो आपके शरीर को निर्जलित कर सकते है, का इस्तेमाल कम से कम करें। सूती, ढीले एवं आरामदायक कपड़े पहने। सिन्थेटिक अथवा गहरे रंग के वस्त्र पहनने से बचे। धूप में निकलते समय छाता अथवा टोपी या सिर पर कपड़ा रखे, जूते अथवा चप्पल का हमेशा उपयोग करें। पालतू पशुओं के लिये छायादार जगह तथा पीने के पानी की उचित व्यवस्था रखे। घर को ठंडा रखने के लिये पर्दे इत्यादि का उपयोग करें। निर्माण तथा औद्योगिक क्षेत्रों के सभी कार्यस्थलों पर पीने के पानी की समुचित व्यवस्था रखे। दिन में 12 से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचे एवं यदि हो सके तो धूप के दौरान अत्यधिक श्रम वाले कार्य न करें अथवा उचित अंतराल पर आराम करें। छोटे बच्चों, वृध्दजनों एवं गर्भवती महिला श्रमिकों की चिकित्सकीय आवश्यकताओं का ध्यान रखे। अत्यधिक गर्मी होने की स्थिति में ठंडे पानी से शरीर को पोछे या कई बार स्नान करें। धूप तथा गर्म हवाओं के संपर्क के तुरंत बाद स्नान न करें। एयर कंडीशनर या कूलर की हवा के बाद बाहर आने के पहले शरीर के तापमान को बाहरी तापमान के समान हो जाने देना चाहिये। लू लगने पर रोगी व्यक्ति के हाथ-पांव के तलवों-पंजों पर पानी की पट्टियां रखे या प्याज पीसकर मले। साथ ही कच्चे आम की कैरी को भूनकर बनाये गये पानी या शरबत या नीबू की शिकंजी पिलाना चाहिये। आम तौर पर गर्मी के मौसम में लू से बचने के लिये हमेशा घर से निकलने के पहले पर्याप्त पानी जरूर पी लेना चाहिये और दिन में एक-दो-बार नमक मिला पानी भी पीना चाहिये।
      कलेक्टर श्री जैन ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये है कि नगर निगम और नगरीय निकाय स्तर पर लू से बचाव के लिये कार्य योजना बनाये। सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थाओं में जन समान्य के लिये लू से बचाव संबंधी आवश्यक निर्देश/सुझाव के बैनर लगाये। सार्वजनिक  स्थलों में पर्याप्त छायादार स्थल शेड तथा लू से ग्रसित लोगों के आराम करने की व्यवस्था करें। सार्वजनिक स्थलों में लू के प्राथमिक उपचार के लिये फर्स्ट ऐड बॉक्स रखे और उस पर निर्देश भी लिखे। सार्वजनिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थाओं के क्लास-रूम में शीतल जल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें और प्राथमिक उपचार बॉक्स रखने की व्यवस्था करें। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में लू से बचाव के इलाज के लिये विशिष्ट कार्य योजना बनाये और सार्वजनिक स्थलों पर एम्बुलेंस/108 को विशेषकर दोपहर में तैयारी की स्थिति में रखे। पंचायत भवनों में लू से बचाव के उपायों से संबंधित प्रचार-प्रसार करें और प्राथमिक उपचार बॉक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करें। साथ ही खेतों, बाजारों, उद्योगों, भवन निर्माण में कार्यरत श्रमिकों के कार्य स्थल पर शीतल जल एवं आपात स्थिति के लिये कही निकट में पर्याप्त शेड की व्यवस्था भी करें।
 
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