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सिविल सेवा द्वारा हम समाज के दीन-हीन व जरूरतमंद व्यक्तियों की सेवा में अपने जीवन को समर्पित करें-कलेक्टर श्री जैन
सिविल सर्विस डे पर संगोष्ठी संपन्न
छिन्दवाड़ा | 20-अप्रैल-2017
 
   सिविल सर्विस डे पर कलेक्टर श्री जे.के.जैन की अध्यक्षता में आज वन विभाग के खजरी चौक स्थित संवाद भवन में संगोष्ठी संपन्न हुई। संगोष्ठी में पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती सुरभि गुप्ता, मुख्य वन संरक्षक श्री ए.के.जोशी, एस.ए.एफ.कमाण्डेंट, वनमंडलाधिकारी श्री रविन्द्रमणी त्रिपाठी, श्रीमती किरण बिसेन और श्री एस.एस.उद्दे. नगर निगम आयुक्त श्री इच्छित गढ़पाले और सभी जिला विभाग प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।
    कलेक्टर श्री जैन ने ग्राम उदय से भारत उदय अभियान, ग्रामीण विकास और स्वच्छ भारत मिशन के संबंध में चर्चा करते हुये कहा कि सिविल सर्विस डे पर हम सभी का यह संकल्प होना चाहिये कि ग्रामीणों की सेवा के लिये हम संकल्पित है और आम जन के लिये अच्छा कर अपनी भूमिका को सार्थक कर सकते है, इस पर भी विचार करें। उन्होंने कहा कि कभी-कभी प्रेरणा के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी होती है, किंतु सिविल सेवा से जुडे अधिकारियों की मार्गदर्शी भूमिका और शासन-प्रशासन के सहयोग से ग्रामीणों के कल्याण के लिये बहुत कुछ किया जा सकता है। हम गांव में जाकर ग्रामीणों से चर्चा करें, उनकी समस्याओं को दूर करें और व्यवहारिक रूप से उन्हे समझाईश दे तो वे सरलता से मान जाते है एवं रचनात्मक कार्यो में सहयोग प्रदान करते है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्राम उदय से भारत उदय अभियान पूरे जिले में संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत प्रथम चरण का शुभारंभ डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर जयंती पर उनकी स्मृति को नमन करने के साथ 14 अप्रैल को पूर्ण हो चुका है तथा व्दितीय चरण 15 अप्रैल से प्रारंभ हो गया है जो 30 अप्रैल तक चलेगा जिसमें तीन दिवसीय ग्राम संसद का आयोजन किया जा रहा है। तृतीय चरण एक से 21 मई एवं चतुर्थ चरण 22 से 31 मई तक आयोजित किया जायेगा। इस अभियान का उद्देश्य गांव-गांव तक पहुंचकर ग्रामीणों की आवश्यकता के अनुसार उनका समग्र विकास करना है। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीणों में जल संरक्षण, मिट्टी परीक्षण, स्वच्छता आदि के प्रति जागरूक किया जा सकता है।
   कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि जिले में लगभग 37 हजार भूमि पड़ती है जिस पर जल संरचनाये बनाकर जल के स्तर को बढ़ाया जा सकता है। गत वर्ष जनभागीदारी से आशातीत जल संरचनायें बनाकर सामाजिक बदलाव की दिशा में कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक विकास व बदलाव के लिये समर्पण भाव की आवश्यकता है तथा हम छोटे-छोटे तरीके और नवाचार से कल्याणकारी कार्य कर समाज के दीन-हीन व जरूरतमंद व्यक्तियों की सेवा में अपने जीवन को समर्पित करें। यदि थोड़ा सा भी प्रयास कर दीन दुखी व्यक्तियों के आंसू पोछे जाये तो यह मानवता की बहुत बडी सेवा होगी। उन्होंने जैविक खेती पर बल देते हुये कहा कि सुबह-सुबह जगह-जगह कचरे का जो धुआं निकलता है, यदि उस कचरे या पत्तियों के ढेरों को नाडेप या वर्मी कम्पोस्ट में बदला जाये तो यह ज्यादा फायदेमंद होगा और इससे पर्यावरण की रक्षा भी होगी। उन्होंने कहा कि घातक पेस्टिसाईड के स्थान पर जैविक पेस्टिसाईड का प्रयोग भी किया जा सकता है। उन्होंने पालीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और उसके विकल्प के रूप में कागज और पुराने कपड़ो के थैले बनाने का प्रशिक्षण देने पर विचार करने एवं नशामुक्ति और शराबबंदी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये भी कहा। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के परिजन को क्या-क्या सहायता दी जा सकती है, वह उनके घर जाकर उपलब्ध कराये तो परिवार के लोगों को इससे प्रसन्नता होगी।    
   संगोष्ठी में पुलिस अधीक्षक श्री तिवारी ने कहा कि सिविल सेवाओं में कानून व्यवस्था और उसकी कई चुनौतियां है जिसे समन्वय और सहयोग से हल किया जा सकता है। यदि निष्पक्षता और सिविल सेवाओं में कमी होती है तो समस्यायें भी हल नही हो पाती जिसके लिये हम स्वयं ही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि अब लोगों में सिस्टम को परिवर्तित करने की मानसिकता है और लोग समाज में बदलाव और प्रगति देखना चाहते है। उन्होंने कहा कि लोगों का जीवन सुगम हो किसी के जान-माल का नुकसान न हो, इस दृष्टि से कानून बनाया जाता है तथा हमारी उपलब्धता और पारदर्शिता से आम जनता में एक दिशा का स्रोत विकसित होता है। वनमंडलाधिकारी श्रीमती बिसेन ने जल संरक्षण पर चर्चा करते हुये कहा कि पृथ्वी पर 2 से 2.50 प्रतिशत तक ही पानी है जिसका हम उपयोग कर सकते है। हमें कम पानी में उन्नत फसल के उत्पादन पर विचार करना चाहिये। उन्होंने कहा कि जब हम जल संरक्षण करेंगे, तभी मानव सभ्यता की रक्षा हो सकेगी। संभागीय उपायुक्त वाणिज्यिक कर डॉ.दिनेश बिसेन ने जी.एस.टी. पर चर्चा करते हुये कहा कि जी.एस.टी. का कानून अभी कठिन लग रहा है, किंतु यह पहले की तुलना में अच्छा व सुविधाजनक है।
 
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