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बच्चादानी की समस्या से परेशान महिलाओं के लिए वरदान बना ऑपरेशन शिविर
गुना | 19-मई-2017
 
 
 
   तापोबाई की उम्र महज 48 साल है। गुना जिले के बरखेड़ी की रहने वाली तापोबाई मजदूरी करके अपना पेट पालती है। उसका पति राधेश्याम भी दिहाड़ी मजदूर है। उनके जिम्मे दो बेटों एवं एक बेटी को पालने का भार है। उन्नीस साल पहले गरीब तापोबाई को बच्चादानी खराब होने की बीमारी ने चपेट में ले लिया। डॉक्टर को दिखाया, तो पता चला कि ऑपरेशन कराना पड़ेगा और खर्च पच्चीस-तीस हजार के आसपास आएगा। तापोबाई तो सुनकर ही चक्कर खा गई।
   साठ साल की दयाबाई की कहानी भी तापोबाई जैसी ही है। रामपुर गांव की दयाबाई का पति भरोसा दिहाड़ी मजदूर है। दयाबाई बच्चादानी की समस्या से अठारह वर्ष से परेशान है। उसने अपनी परेशानी पति को बताई। पति ने रामपुर के डॉक्टर से उसका इलाज कराया। परन्तु इलाज से फायदा नहीं हुआ। उसने ऑपरेशन कराने की सलाह दी। ऑपरेशन कराने की सार्म्थ्य नहीं थी। मीराबाई तो महज 35 साल की है। बारह साल पहले उसकी बच्चादानी खराब हो गई थी। इतनी छोटी-सी उम्र में ही बच्चादानी तकलीफ दे गयी। इसी तरह पीपिया गांव की ममता अभी 38 साल की है और उसका पति ट्रेक्टर चलाता है। वह इस बीमारी को दस साल से पाले हुए थी।
    इन महिलाओं की तरह इमलिया की रहने वाली पचास साल की मेगधे बाई भी छः साल से इस बीमारी को पाले हुए थी। किसी के कहने पर उसने अपनी तकलीफ के बारे में पता किया, तो पता चला कि इस समस्या का हल ऑपरेशन है, जिस पर करीब चालीस हजार से ऊपर खर्च आएगा। मेगधेबाई का पति जगराम भी एक दिहाड़ी मजदूर है। वह सुनकर सन्न रह गया। ये सभी महिलाएं गरीब वर्ग की हैं और इतना खर्च कर ऑपरेशन करवाना तो दूर ये किसी शल्य विशेषज्ञ को एक बार दिखाने की फीस-चुकाने और जांचें कराने तक की हैसियत में नहीं हैं।
    लेकिन सबको इलाज सुलभ कराने की राज्य शासन की मंशा को ध्यान में रखते हुए बच्चादानी ऑपरेशन शिविर के माध्यम से मुफ्त ऑपरेशन कराने का बीड़ा कलेक्टर श्री राजेश जैन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामवीर सिंह रघुवंशी ने दो माह पहले उठाया था। फिर पिछले दिनों भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, भारतीय शल्य चिकित्सक संघ एवं लोक स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से यहां जिला अस्पताल में निःशुल्क बच्चादानी ऑपरेशन शिविर लगाया गया। जिसमें उपर्युक्त महिलाओं सहित कुल 127 गरीब महिलाओं के मुफ्त ऑपरेशन किए गए। इसमें इन्दौर के डॉक्टर एन.के. जैन एवं डॉ. (श्रीमती) सी.पी. जैन उनके मददगार हैं। ऑपरेशन करने के बाद भी लोक स्वास्थ्य विभाग की टीम इन रोगियों की पूरी तीमारदारी करती है। इन महिलाओं को जिला अस्पताल में भर्ती रखा हुआ है। इन महिला रोगियों के आने-जाने रहने, खाने-पीने, दवा, साबुन और तेल का खर्च भी लोक स्वास्थ्य विभाग ही उठा रहा है। राज्य शासन ने इन महिलाओं के मुफ्त ऑपरेशन, जांचों एवं दवाइयों का इंतजाम कर नया जीवन दिया है। अब ये महिलाएं अपनी दिनचर्या को सामान्य रूप से कर सकेंगी।
    इन महिलाओं की देखभाल हेतु नियुक्त डॉ. (श्रीमती) सोनू रघुवंशी के मुताबिक मुख्य रूप से घर पर प्रसव कराने, माहवारी के समय वजन उठाने तथा क्षमता से अधिक वजन उठाने की वजह से बच्चादानी की समस्या होती है। देर से इलाज शुरू कराने वाली ऐसी महिलाओं की बच्चादानी भी समय के साथ खराब होती रहती है। समय गुजरने के साथ-साथ महिलाओं की तकलीफें भी बढ़ती जाती हैं। ऑपरेशन उन रोगियों का किया जाता है, जिनकी बच्चादानी खराब हो जाती है और जिनकी दिनचर्या सामान्य नहीं रह पाती। डॉ. (श्रीमती) रघुवंशी कहती हैं कि ऑपरेशन कराने वाली महिलाओं में ग्रामीण क्षेत्र की 80 फीसद और शहरी क्षेत्र की 20 फीसद महिलाएं हैं। इनमें 90 फीसद महिलाओं की बच्चादानी बाहर निकल आई थी और दस फीसद महिलाओं की बच्चादानी में गांठ पड़ गई थी। इनमें से अपनी यह समस्या पति को बताने वाली महिलाएं 70 फीसद हैं और सास को समस्या बताने वाली महिलाएं 20 फीसद हैं। जबकि 10 फीसद महिलाओं ने किसी को अपनी समस्या बताई ही नहीं थी। ममता के पति राजाराम, मीरा के पति भारत, मेगधेबाई के पति जगराम का कहना है, "आर्थिक तंगी के कारण हम ऑपरेशन नहीं करवा पा रहे थे। लेकिन सरकार ने हमारी पत्नियों को नई जिंदगी दी है।" वे कहते हैं, "डॉक्टरों एवं मेडीकल स्टाफ का दल रोगियों की सेवा में जुटा हुआ है।" जीवन की उम्मीद छोड़ चुके पत्नियों के सफल इलाज की खुशी उनके चेहरों से साफ झलक रही थी।
    कलेक्टर श्री राजेश जैन कहते हैं, "गरीब महिलाओं के निःशुल्क बच्चादानी ऑपरेशन के लिए शीघ्र एक और शिविर लगवाया जाएगा।" मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रघुवंशी बताते हैं, "निःशुल्क बच्चादानी ऑपरेशन शिविर के लिए महिलाओं का पंजीयन किया जा रहा है। उन्हें सारी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी।"
 
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