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स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया एवं मौसमी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करें
चिकित्सकों और मीडिया कर्मियों की बैठक सम्पन्न
शिवपुरी | 04-सितम्बर-2017
 
   स्वाइन फ्लू एन-1, एच-1, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया एवं मौसमी बीमारियों के प्रति लोगों में जनजागरूकता लाने हेतु आज कलेक्टर श्री तरूण राठी की अध्यक्षता में जिलाधीश कार्यालय के सभाकक्ष में बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एम.एस.सगर, चिकित्सकगण सहित पत्रकारगण आदि उपस्थित थे। बैठक में मौसमी बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने हेतु सुझाव दिए गए।
    कलेक्टर श्री तरूण राठी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हमें इन मौसमी बीमारियों के प्रति जनजागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को जागरूक करना है। उन्होनें निजी चिकित्सकों से भी आग्रह किया कि स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों के लक्षण मरीज में पाए जाने पर त्वरित सूचना दें। जिससे संबंधित मरीज का समूचित उपचार कराया जा सके। उन्होंने मीडिया कर्मियों से भी आग्रह करते हुए कहा कि वे अपने समाचारों के माध्यम से लोगों को सावधानियां बरतने की सलाह दें और मरीज की बीमारी की पुष्टि किए बिना ऐसा कोई समाचार न दें, जिससे समाज में गलत संदेश जाए और लोगों को आगह करें कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।
   मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.सगर ने बताया कि जिले में लार्वा विनिष्टीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। 18 से 22 टीमें निरंतर कार्य कर रही है। उन्होनें बताया कि स्वाइन फ्लू के उपचार की दवा ‘‘टेमीफ्लू’’ टेवलेट चिकित्सालय सहित निजी मेडीकल स्टोरों पर भी उपलब्ध है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले से लगे सीमावर्ती राज्यों में स्वाइन फ्लू का प्रकोप होने के कारण इन राज्यों से आने वाले लोगों पर विशेष सर्तकता बरती जा रही है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
   स्वाइन फ्लू में बुखार एवं खांसी, खराब गला, बहती या बंद नाक, सांस लेने में तकलीफ, अन्य लक्षण बदन दर्द, सिरदर्द, थकान, ठिठुरन, अतिसार, उल्टी, बलगम में खून आना, त्वचा या होठों का नीला पड़ना, व्यवहार में बदलाव भी हो सकता है। ध्यान रखने वाली योग्य बातों में मौसमी फ्लू (पूर्व नाम स्वाइन फ्लू) हवा से संदूषित कणों द्वारा मानव से मानव में फैलता है और यह सुअरों द्वारा नहीं फैलता है। कुछ असाध्य चिकित्सा अवस्थाओं वाले लोगों, 65 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले बुजुर्गों, 5 वर्ष की आयु से छोटे बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को गंभीर बीमारी का अधिक खतरा होता है। सरकार द्वारा निर्धारित किए गए अस्पतालों में आवश्यक दवाईयॉ उपलब्ध है। यदि डॉक्टर ने सलाह दी हो तो घर पर रहें। बढ़ने पर निकट के सुविधा केन्द्र में जाए। छोटे बच्चों, यदि उन्हें बुखार हो, चिड़चिड़ापन हो, तरल पदार्थ न ले तथा भोजन न करें तो उन्हें अस्पताल ले जाएं।
स्वाइन फ्लू होने पर ये करें
   छींकते और खॉसते वक्त अपने मूंह और नाक को रूमाल या कपड़े से अवश्य ढकें। प्रातः अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं। नाक, आंख या मुंह को न छुएं। भीड़भाड़ वाली जगह से बचें, फ्लू से संक्रमित लोगों से एक हाथ से अधिक की दूरी पर रहें। बुखार, खांसी और गले में खराश हो तो सार्वजनिक जगहों से दूर रहें। खूब पानी पिएं और पौष्टिक आहार लें। पूरी नींद लें।
स्वाइन फ्लू में ये न करें
   हाथ न मिलाएं, गले न लगें या दैहिक संपर्क में आने वाले अन्य अभिवादन न करें, सार्वजनिक जगह पर न थूके, फिजिशियन के परामर्श के बिना दवाई न लें।
(173 days ago)
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