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शिक्षक छात्रों के मन में जिज्ञासा और कौतुहल पैदा कर उनकी प्रतिभा को परिमार्जित करें - कलेक्टर श्री जैन
विशाल शिक्षक सम्मान समारोह संपन्न
छिन्दवाड़ा | 10-सितम्बर-2017
 
   
    कलेक्टर श्री जे.के.जैन ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक छात्रों के मन में जिज्ञासा और कौतुहल पैदा कर उनकी प्रतिभा को परिमार्जित करें। यदि शिक्षक लगन और मेहनत से काम करके बच्चों के मन में कुछ जानने और सीखने की ललक पैदा कर पाये तो यह बहुत महत्वपूर्ण कार्य होगा। कलेक्टर श्री जैन आज डेनियलसन महाविद्यालय छिन्दवाड़ा में शिक्षक सम्मान समारोह समिति द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित विशाल शिक्षक सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डी.आई.जी. श्री जी.के.पाठक ने की तथा पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अभूतपूर्व सम्मान समारोह में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों के साथ ही लगभग 2 हजार राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, नवाचारी शिक्षकों, दिव्यांग शिक्षकों, एन.सी.सी., एन.एस.एस. और स्कॉउट गाईड के शिक्षकों, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा केन्द्र के जिला परियोजना समन्वयक, सहायक संचालक आदिवासी विकास, बी.आर.सी., बी.ई.ओ., संकुल प्राचार्य और प्राचार्य, सेवानिवृत्त शिक्षक, शिक्षा विभाग के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी/सदस्य शिक्षकों आदि का शाल, श्रीफल, पुष्पमाला और प्रमाण पत्र प्रदाय कर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर नगर निगम महापौर श्रीमती कांता सदारंग, क्षेत्रीय विधायक श्री चौधरी चन्द्रभान सिंह, नगर निगम अध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र मिगलानी, नगर पंचायत पिपलानारायणवार के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र परमार, सर्वश्री राघवेन्द्र, जयचंद जैन, रमेश पोफली, भजनलाल चोपडे और अन्य जनप्रतिनिधि, एस.डी.एम. श्री राजेश शाही, नगर निगम आयुक्त श्री इच्छित गढ़पाले, अन्य अधिकारी, पत्रकार तथा बड़ी संख्या में शिक्षकगण उपस्थित थे।
      कलेक्टर श्री जैन ने क्षेत्रीय विधायक श्री सिंह के प्रयासों और मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुये कहा कि छिन्दवाड़ा में आयोजित खेल महोत्सव के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र का यह कार्यक्रम अनूठा और अद्भुत है जो पत्थर की लकीर की तरह छिन्दवाड़ा की गतिविधियों के कैलेण्डर में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के बाद बच्चों के लिये शिक्षक ही व‍ह व्यक्ति है जो बच्चों से जो कहता है बच्चे उसे सच मानकर उसका अनुसरण करते है। उन्होंने कहा कि शिक्षक यह मानते है कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का अच्छी तरह से निर्वहन करते है, किंतु कोई बच्चा सफल होता है और कोई सफल नही हो पाता है, इस पर विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों की पृष्ठभूमि को समझे। बच्चों के शरीर पर जिस तरह शारीरिक चोट के निशान रह जाते है, उसी प्रकार मानसिक आघात भी बच्चों के मन में एक चिन्ह की तरह रह जाते है। इस दिशा में बच्चों की प्रतिभा को किस तरह तराशना है, इस पर शिक्षक गंभीरता से विचार करें। उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थियों में आपस में विश्वास का भाव बने, आपसी बातचीत से उनमें ऐसे संबंध स्थापित हो कि वे दोनों एक दूसरे को उत्थान और विकास की दिशा में ऊपर ले जाने वाले हो। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक बच्चों को प्रोत्साहित कर अच्छा कार्य करते है, उन्हे उसका अच्छा प्रतिफल और सम्मान भी मिलता है। शिक्षक पूर्ण समर्पण भाव से अपने दायित्व और कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे तो निश्चित तौर पर शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा कार्य होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्वच्छता के प्रति लोगों को प्रेरित कर बच्चों के माता-पिता को भी प्रेरित करें। जो बच्चे शाला नही जाते उन्हे साथ में रखकर पढ़ाई के लिये प्रेरित करें और संकल्प से सिद्धि कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी 2022 के भारत को विश्व गुरू के रूप में स्थापित करने का संकल्प ले जिससे हमारा देश सभी के सहयोग से नई ऊंचाईयों पर पहुंच सके। उन्होंने प्रारंभ में अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्जवलित कर और मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा शिक्षकों का शाल, श्रीफल, पुष्पमाला और प्रमाण पत्र प्रदाय कर अभिनंदन किया।
      कार्यक्रम अध्यक्ष एवं डी.आई.जी. श्री पाठक ने कहा कि शिक्षा का पिछले 20 सालों में वाणिज्यिककरण हुआ है और गुणवत्ता में गिरावट आई है। इसके लिये शिक्षक अकेला दोषी नही है, बल्कि आज के परिवेश को शिक्षक और विद्यार्थी दोनो अच्छी तरह समझ रहे है कि इसके मूल में कई विसंगतियां और आर्थिक विषमता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को माता-पिता और शिक्षक नही, बल्कि उन्हे कम्प्यूटर और मोबाईल कंट्रोल करते है। हम जिस बच्चे को चंद्रगुप्त, अर्जुन आदि बनाना चाहते है उसके लिये ये बाधाये बहुत बड़ी समस्या है। विद्यार्थियों की इस चुनौती के लिये हमे तैयार रहना जरूरी है। आज हमारे सामने बच्चों मे आदर्श मूल्यों का निर्माण करने की चुनौती भी है, क्योंकि यदि उनमें फिजीकल वेल्यू नही होगी तो उन्हे रोबोट मान लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक इस अत्यधिक जटिल कार्य को अपनी मनौवैज्ञानिक सोच, कुशलता और निपुणता से पूरा करेंगे तो वे बच्चों को श्रेष्ठ नागरिक बनाने में सफल होंगे। विशेष अतिथि एवं पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी ने कहा कि गुरू की महत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा उसकी महिमा को व्याख्यायित करना सरल कार्य नही है। गुरू विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में बहुत अहम भूमिका निभाता है, किंतु जब से शिक्षा का व्यवसायीकरण हुआ है, तब से गुरू का कार्य केवल ज्ञान देना रह गया है और उसका सांसारिक ज्ञान देने का कार्य पीछे हो गया है। आज समाज के हर वर्ग में नैतिकता में कमी आई है जिसके लिये शिक्षक ही नही बल्कि अभिभावक भी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि शिक्षक यह चिंतन करें कि वर्तमान परिवेश में राष्ट्र निर्माण में वे कैसे वातावरण को बदलकर अच्छे परिवेश का निर्माण कर सकते है।
      क्षेत्रीय विधायक श्री सिंह ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ.राधाकृष्णन एक अच्छे शिक्षक और दार्शनिक थे तथा उन्होंने अपने जन्म दिवस पर शिक्षकों के सम्मान की परम्परा की शुरूआत कर शिक्षकों के प्रति बहुत बड़ा कार्य किया है। उन्होंने कहा कि विद्या दान महादान है तथा इस दान से बड़ा कोई दान नही है। शिक्षक अपना जीवन शिक्षा को समर्पित कर इस दान के द्वारा समाज के लिये क्या अच्छा कर सकते है, इस पर चिंतन करें। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर समाज को एक अच्छा समाज बनाये और देश से सांप्रदायिकता, जातिवाद, भ्रष्टाचार आदि दूर करने का कार्य करें। उन्होंने शिक्षकों पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन भी किया। कार्यक्रम में सर्वश्री राघवेन्द्र, जयचंद जैन और नरेन्द्र परमार ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना, गुरू वंदना और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। कार्यक्रम का संचालन सर्वश्री विनोद तिवारी, धीरेन्द्र दुबे और अरूण शर्मा ने किया। कार्यक्रम के पूर्व सभी ने सहभोज में भी सहभागिता की।  
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