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स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू, स्वाइन फ्लू, मलेरिया से बचाव के लिये जनजागरूकता की अपील
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छिन्दवाड़ा | 13-सितम्बर-2017
     मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गोगिया ने बताया कि स्वाईनफ्लू (एच1एन1) वायरस संक्रमणकारी बीमारी है। सामान्यत: इसका संक्रमण संक्रमित व्यक्ति की छींक या खाँसी के संपर्क में आने के कारण होता है तथा स्वाईनफ्लू का संक्रमण जुलाई से फरवरी माह मे ज्यादा सक्रिय होता है। इसका संक्रमण नाक, मुंह एवं गले से आरंभ होकर फेंफड़ो तक पहुंचकर जानलेवा हो सकता है। इसलिये गले स्तर पर अर्थात् साँस लेने में तकलीफ होने पर मरीज बिना विलंब के तत्काल निकटतम चिकित्सालय मे जाकर चिकित्सीय सलाह लेकर उपचार करा सकते है। उन्होंने बताया कि स्वाईन फ्लू से बचाव ही उसका उपचार है, इसलिये ऐहतियात बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने सलाह दी है कि सर्दी, जुकाम, खाँसी, गले मे खरास, सिर दर्द, बुखार के साथ साँस लेने मे तकलीफ होने पर मरीज तत्काल चिकित्सकीय परामर्श ले और परामर्श का पालन करे। इसमें 24 घंटे के भीतर उपचार आरंभ करना आवश्यक है। मरीज उपचार लेकर स्वस्थ व सुरक्षित रहे। याद रखे कि इसमें विलंब घातक हो सकता है। उन्होंने बताया कि सभी शासकीय चिकित्सालयों मे स्वाईन फ्लू की दवाईयां नि:शुल्क उपलब्ध है। उन्होंने सलाह दी है कि खाँसते एवं छींकते समय मुंह पर रूमाल रखे, संक्रमण होने पर एवं संक्रमण से बचाव हेतु भीड़-भाड़ से दूर रहे। किसी वस्तु, व्यक्ति एवं स्वयं के चेहरे को छूने से पहले एवं बाद मे साबुन से हाथ धोयें। संक्रमित व्यक्ति से लगभग एक मीटर की दूरी बनाये रखे।
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गोगिया ने बताया कि डेंगू एंडीज नामक मच्छर के काटने से फैलता है और यह दिन के समय काटता है। इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ो एवं मांसपेशियों में दर्द, जी मचलाना तथा थकावट डेंगू के लक्षण हो सकते है। मसूड़ो से खून आना, त्वचा में लाल चकत्ते गंभीर अवस्था के लक्षण है। एडीज मच्छर को घर के आस-पास पैदा न होने दे। डेंगू से बचाव के लिये छत एवं घर के आस-पास अनुपयोगी सामग्री में पानी जमा न होने दें। सप्ताह में एक बार अपने टीन, डब्बा, बाल्टी आदि का पानी खाली कर दें। दोबारा उपयोग करने से पहले उन्हे अच्छी तरह सुखायें। सप्ताह में एक बार अपने कूलर का पानी खाली कर दें फिर सुखाकर पानी भरें। पानी के बर्तन टंकियों आदि को ढक कर रखे। हैन्डपम्प के आसपास पानी एकत्र न होने दें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। घर के आस पास के गड्डो को मिट्टी से भर दें। पानी से भरे रहने वाले स्थानों पर मिट्टी का तेल, जला व ईंजन का तेल डाले, शाम के समय नीम की पत्ती का धुँआ करें। फूल ऑस्तीन के कपड़े पहने। अनुपयोगी चीजों में पानी ना भरने दें। उन्होंने मलेरिया के लक्षण सर्दी व कंपन के साथ बुखार, तेज बुखार, उल्टियां और सिरदर्द आना, पसीना आकर बुखार उतरना, बुखार उतरने के साथ थकावट व कमजोरी होना। बुखार आने पर तुरंत रक्त की जांच कराये। मलेरिया की पु‍ष्टि होने पर चिकित्सक से उपचार लें। उन्होंने सभी गणमान्य नागरिकों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की है कि स्वाईन फ्लू एवं डेंगू के लक्षण पाये जाने पर तत्काल निकटतम शासकीय चिकित्सालयों में परामर्श एवं उपचार ले।
 
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