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नए भू-राजस्व संहिता पर विचार विमर्श हेतु संगोष्ठी कर अभिभाषकों के दल ने दिए सुझाव
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अनुपपुर | 04-अक्तूबर-2017
 
   
   प्रदेश शासन के निर्देशानुसार नए भू-राजस्व संहिता पर विचार हेतु कलेक्टर श्री अजय शर्मा एवं अपर कलेक्टर डॉ. आर.पी. तिवारी के निर्देशन में आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के अभिभाषकों का 7 दल बनाकर नए भू-प्रबंधन अधिनियम पर विचार विमर्श किया गया तथा उनसे अनुशंसाएं प्राप्त की गईं। संगोष्ठी का संचालन जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री जगदीश पाण्डेय ने किया।
   संगोष्ठी का विषय समूह 7 खण्डों में आयोजित किया गया। प्रथम खण्ड में भूमि प्रबंधन संगठन एवं प्रक्रियाएं शामिल था। जिसमें राजस्व मंडल, राजस्व अधिकारी, उनके वर्ग तथा शक्तियां, राजस्व अधिकारियों तथा राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया, अपील, पुनरीक्षण एवं पुनरावलोकन, राजस्व अधिकारियों के अन्य प्राधिकारिता सबूत का भार तथा विधि व्यवसायियों का वर्जन, दिन प्रतिदिन सुनवाई का प्रावधान, द्वितीय अपील का वर्जन का प्रावधान, पटवारी तथा राजस्व निरीक्षक, ग्राम अधिकारी, सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के सुसंगत प्रावधानों को संहिता 1959 में ही शामिल करना था। द्वितीय विषय समूह में ग्रामीण भूमि सर्वेक्षण बंदोबस्त, भू-अभिलेख व उनका अद्यतनीकरण में नगरेता क्षेत्रों राजस्व सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त, भू-अभिलेख, सीमाएं तथा सीमा चिन्ह, खातों की चकबंदी तथा नक्शों तथा भू-अभिलेखों का निराकरण तथा उनकी प्रतिलिपियां शामिल थीं। विषय समूह क्र. 3 में ग्रामीण भूमि के भू-धारी अधिकार, दायित्व और हित संरक्षण शामिल था। जिसमें भू-धारी सरकारी पट्टेदार, मौरूसी कृषक, अनुचित रूप से बेकब्जा, भू-स्वामी का पुर्नस्थापन, भू-धृतियों के प्रति निर्देश, जलोढ़ तथा जल प्लावक, बटाईदार अधिनियम शामिल रहे। विषय क्र. 4 में भूमि का कृषि, भिन्न और सार्वजनिक उपयोग में आबादी तथा दखलरहित भूमि में और उसकी उपज में अधिकार, मार्ग और मार्गाधिकार, व्यपवर्तन, शहरी और ग्रामीण कालोनाईजेशन शामिल रहे। विषय समूह क्र. 5 में भू-राजस्व तथा अन्य शासकीय देयताओं का निर्धारण और वसूली, भूमि तथा राजस्व, भू-राजस्व की उगाही शामिल रहे। विषय समूह क्र. 6 में नगरीय भूमि प्रबंधन नगरीय क्षेत्रों में भूमि का निर्धारण तथा पुनर्निधारण, नगरीय क्षेत्रों के भू-अभिलेख (नवीन विषय), नगरीय क्षेत्रों की सीमाएं तथा सीमा चिन्ह, सर्वेक्षण चिन्ह (नवीन विषय), नगरीय भूमि के भू-धारी, उनके अधिकार, दायित्व और हित संरक्षण (नवीन विषय), नजूल भूमि प्रबंधन (नवीन विषय), उपान्त क्षेत्रों भूमि का प्रबंधन (नवीन विषय) शामिल रहे। विषय समूह क्र. 7 के अंतर्गत विविध में प्रारंभिक(नाम, विस्तार तथा प्रारंभ, परिभाषाएं), प्रकीर्ण, अनुसूची 1, 2 और 3 शामिल रहे। इस अवसर पर एसएलआर श्री शिवशंकर मिश्रा, अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 
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