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राजस्व प्रकरणों का न्यायोचित निराकरण करें-मुख्य सचिव
राजस्व रिकार्ड प्रस्तुत नहीं करने वाले कर्मचारियों को सेवा से करें बर्खास्त, मुख्य सचिव ने शहडोल संभाग में की राजस्व विभाग की समीक्षा
शहडोल | 12-अक्तूबर-2017
 
 
    मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन श्री बसंत प्रताप सिंह ने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे किसानों के राजस्व प्रकरणों का न्यायोचित निराकरण कर उन्हें लाभ पहुंचायें। उन्होने कहा कि मैंने 4 अगस्त को शहडोल संभाग में राजस्व प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की थी तब राजस्व प्रकरणों की स्थिति बेहद खराब थी, इसमें आंशिक सुधार हुआ है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिये अभी और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है, मुख्य सचिव ने कहा कि मैं पुनः नवम्बर माह में शहडोल पहुंचकर राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा करूंगा। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जबाबदेह अधिकारियों, कर्मचारियों के विरूद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करूंगा। मुख्य सचिव ने कहा कि शहडोल संभाग के लगभग 4 राजस्व अधिकारी सेवा से बर्खास्त करने योग्य हैं, किंतु उन्हें एक मौका और दिया जा रहा है। अगली समीक्षा बैठक में अगर सुधार नहीं होता है, अपेक्षाओं के अनुरूप राजस्व प्रकरणों का निराकरण नहीं किया जाता है तो चारों अधिकारियों एवं अन्य राजस्व अधिकारियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जायेगी। मुख्य सचिव ने शहडोल संभाग के सभी कलेक्टरों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे लंबित राजस्व प्रकरणों का सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ निराकरण करें, निरंतर कार्य करें और राजस्व प्रकरणों का निराकरण कर किसानों को लाभ पहुंचायें। मुख्य सचिव श्री बसंत प्रताप सिंह आज संभागीय मुख्यालय शहडोल में राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे। मुख्य सचिव ने कहा कि शहडोल संभाग में विभिन्न राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण के दौरान यह पाया गया है कि राजस्व प्रकरणों की संख्या घटाने के लिये कई राजस्व न्यायालयों द्वारा अदम पैरवी के प्रकरणों को खारिज कर दिया गया है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिये हैं कि किसी भी स्थिति में अदम पैरवी के प्रकरणों को खारिज नहीं करें। उन्होने निर्देश दिये कि सभी राजस्व प्रकरण आरसीएमएस में दर्ज होना चाहिए, पटवारी रिपोर्ट के कारण राजस्व प्रकरणों का निराकरण लंबित नहीं होना चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि जो पटवारी रिपोर्ट नहीं देते हैं ऐसे पटवारियों को नोटिस देकर सेवा से बर्खास्त करने की कार्यवाही करें। उन्होने कहा है कि पटवारी, तहसीलदारों का अधीनस्थ कर्मचारी है ऐसी स्थिति में पटवारी रिपोर्ट तहसीलदार के न्यायालय को नहीं प्राप्त होना बेहद ही खेद जनक स्थिति है। मुख्य सचिव ने कहा है कि जो पटवारी रिपोर्ट देने में उदासीनता बरत रहे हैं, अथवा जानबूझ कर पटवारी रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं ऐसे पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनके विरूद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही करें। बैठक में राजस्व अभिलेखागारों की स्थिति में सुधार करने के निर्देश देते हुये मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि राजस्व अधिकारियों को अधीनस्थ न्यायालयों से रिकार्ड नहीं प्राप्त होने के कारण भी राजस्व प्रकरणों के निराकरण में कठिनाई उत्पन्न हो रही हैं। मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिये कि रिकार्ड रखने के लिये जो अधिकारी अथवा कर्मचारी जिम्मेदार था उसकी जवाबदेही तय करें तथा उसके विरूद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कर ऐसे राजस्व कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने की कार्यवाही करें। बैठक में राजस्व वसूली की समीक्षा करते हुये मुख्य सचिव श्री बसंत प्रताप सिंह ने निर्देश दिये कि शहडोल जिले में 16 प्रतिशत, उमरिया जिले में 19 प्रतिशत एवं अनूपपुर जिले में राजस्व वसूली लगभग पूर्ण हो चुकी है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि शहडोल संभाग के अन्य जिलों में राजस्व वसूली के लिये प्रयास किये जायें, मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि डायवर्सन के प्रकरणों में जब तक राशि जमा न हो जाये तब तक आदेश जारी नहीं होना चाहिए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि जिन डायवर्सन के प्रकरणों में आदेश जारी होने के बावजूद राशि जमा नहीं कराई गई है ऐसे डायवर्सन के प्रकरणों में तत्काल राशि जमा कराई जाये। बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि राजस्व न्यायालयों के सभी पीठासीन अधिकारी राजस्व न्यायालयों का गंभीरता पूर्वक निरीक्षण करें तथा यह सुनिश्चित करें तथा राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा करें। समीक्षा के दौरान राजस्व न्यायालय ब्यौहारी के नायब तहसीलदार के न्यायालय में लगभग 11 साल का प्रकरण निराकरण के लिये लंबित पाये जाने पर मुख्य सचिव द्वारा नायब तहसीलदार से वस्तु स्थिति की जानकारी ली गई, प्रकरण के संबंध में नायब तहसीलदार द्वारा समुचित जानकारी नहीं देने पर मुख्य सचिव द्वारा कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई तथा निर्देशित किया गया कि ऐसे उदासीन राजस्व अधिकारियों से उन्हे दिये गये वेतन की रिकव्हरी की जाये। बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व श्री अरूण पाण्डेय ने निर्देश दिये कि कोटवारों की संख्या का ग्रामवार पुर्ननिर्धारण का रिक्त पदों की पूर्ति की जाये। प्राकृतिक आपदा के लंबित प्रकरणों एवं राहत राशि के प्रकरणों का समय सीमा में वितरण सुनिश्चित किया जाये, उन्होने कहा कि मोबाईल गिरदावरी का प्रतिशत शहडोल संभाग में अभी भी कम है इसे और बढ़ाया जाये। प्रमुख सचिव राजस्व ने कहा कि भ्रष्ट और अर्कमण्य पटवारियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाये तथा ऐसे पटवारियों को चिन्हित कर उन्हे निलंबित करने अथवा उनकी सेवा समाप्त करने की कार्यवाही की जाये। बैठक में कमिश्नर शहडोल संभाग श्री बी.एम.शर्मा ने बताया कि शहडोल संभाग में विगत दो महीनों में राजस्व प्रकरणों के निराकरण के प्रति राजस्व अधिकारियों की अच्छी मानसिकता बनी है। शहडोल संभाग में विगत दो माह में 10 हजार 271 राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया है वहीं 10 हजार 675 अविवादित नामांतरण एवं 1827 सीमांकन के प्रकरणों का निराकरण किया गया है। कमिश्नर ने बताया कि शहडोल संभाग में राजस्व वसूली में भी अपेक्षित प्रगति हुई है, विगत दो माह में 55 राजस्व न्यायालयों का निरीक्षण किया गया, राजस्व अधिकारियों की सक्रियता के कारण शहडोल संभाग में राजस्व प्रकरणों का पंजीयन भी बढ़ा है, राजस्व न्यायालयों में राजस्व अधिकारी बैठ रहे हैं तथा राजस्व के प्रकरणों का निराकरण भी कर रहे हैं। कमिश्नर ने बताया कि शहडोल संभाग में 24 हजार 715 हितग्राहियों को आवासीय पट्टों का वितरण किया गया है वहीं 1 लाख 12 हजार से अधिक हितग्राहियों को भू अधिकार पत्रों का वितरण किया गया है। बैठक में मुख्य सचिव द्वारा नक्शा तरमीम, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा के प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। बैठक में सचिव राजस्व श्री हरिरंजन राव, अपर सचिव राजस्व श्री एम.सेलेवेन्द्रम, सीएलआर श्री एम.के.अग्रवाल, प्रमुख राजस्व आयुक्त श्री रजनीश कुमार, कलेक्टर शहडोल श्री नरेश पाल, कलेक्टर अनूपपुर श्री अजय शर्मा, कलेक्टर उमरिया श्री माल सिंह, शहडोल संभाग के सभी अपर कलेक्टर एवं अनुविभागीय राजस्व अधिकारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार उपस्थित थे।
 
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