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डेयरी स्थापना के लिये अब 50 लाख रूपये तक मिलेगा ब्याज रहित ऋण
आवारा पशु नियंत्रण हेतु 5 ग्राम पंचायतों के बीच होगी एक गौ-शाला, ईधन के रूप में नहीं हो सकेगा भूसे का उपयोग
अनुपपुर | 12-अक्तूबर-2017
 
   आचार्य विद्यासागर योजना में अब डेयरी स्थापना के लिये 50 लाख रूपये तक ऋण दिया जाएगा। यह निर्णय गत दिवस उज्जैन में गौवंश संरक्षण उपाय समिति की बैठक में लिया गया है। अभी इस योजना में देशी गौवंश से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये अधिकतम 25 प्रतिशत के शासकीय अनुदान के साथ 10 लाख रूपये तक ब्याज रहित ऋण दिया जाता है। बैठक में समिति के सदस्य पशुपालन एवं मत्स्योद्योग मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य, गृह एवं परिवहन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, उपाध्यक्ष गौसंवर्धन बोर्ड महामण्डलेश्वर अखिलेश्वरानंद, अपर मुख्य सचिव वन एवं आर्थिक सांख्यिकी श्री दीपक खाण्डेकर, संचालक एवं प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड डॉ. आर.के. रोकड़े, प्रबंध संचालक स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन श्रीमती अरूणा गुप्ता और प्रबंध संचालक राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम डॉ. एच.बी.एस. भदौरिया ने भाग लिया।
   बैठक में गौ संरक्षण से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये जिनमें ईधन के रूप में भूसे के उपयोग पर प्रतिबंध, आवारा पशु संरक्षण के लिये 5 ग्राम पंचायतों के मध्य एक गौशाला खोलने, चारा उत्पादन बढ़ाने लिये किसानों को चारा किट प्रदाय करने, सूखा चारा के लिये फॉडर ब्लॉक बनाने, कृषि उद्यानिकी तथा पशुपालन विभाग के प्रक्षेत्रों में चारा बैंकों का निर्माण करने, हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा रीपर की अनिवार्यता, मनरेगा के माध्यम से चारागाह निर्माण आदि शामिल हैं। बैठक में गौवंश संरक्षण से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने, गोबर गैस, गौमूत्र से कीटनाशक और जैविक खाद बनाकर गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने, पशुधन बीमा का गौपालकों को लाभ मिलना सुनिश्चित करने, नियमित रूप से विकासखंड जिला एवं राज्य स्तर पर सर्वाधिक दूध देने वाली देशी गाय गोपाल पुरस्कार देने आदि विषयों पर चर्चा की गई।
   बैठक में बताया गया कि गाय के दूध वितरण के लिये अलग के व्यवस्था की जा रही है। यह व्यवस्था इंदौर एवं भोपाल में आरंभ हो चुकी है। बैठक में बड़े शहरों की खुली जगह पर गौ ग्रास दान केन्द्र और गौ होस्टल बनाने पर भी चर्चा की गई। अब दान केन्द्र पर आम नागरिक गाय को चारा आदि खिला सकेंगे। गौ होस्टल में लोग गाय खरीद कर पालने के लिये दे सकेंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि किसानों को गोबर की जैविक खाद उपयोग करने के लिये प्रेरित किया जाएगा। गोबर की खाद जहाँ खेत को तीन साल तक उपजाऊ बनाये रखती है, वहीं रसायनिक खाद का उपयोग भूमि की उर्वरा शक्ति को लगातार कम करता जाता है। जैविक खाद के उपयोग से उत्पन्न फसल पौष्टिकता से भरपूर होती है ओर इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। बैठक में गौवंश संरक्षण के लिये लागू गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम और जीव जन्तुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम पर भी चर्चा की गई।
(65 days ago)
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