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ख्वाब को पूरा करने भरी उड़ान, कठिनाइयों के आगे नहीं हुई नतमस्तक "सफलता की कहानी"
पढ़ने की ललक से अनीता प्रभा शर्मा डी.एस.पी. बनने में हुई कामयाब
अनुपपुर | 12-अक्तूबर-2017
 
    
   यह कहानी है एक ऐसी लड़की की है, जिसकी 17 साल की उम्र में 27 साल के युवक से शादी हो गई। मां बाप बेटी को विदा करके अपना दायित्व पूरा कर लिया, ससुराल की हालत भी दयनीय थी, फिर भी उसने हार नहीं मानी। पढ़ाई शुरू की और एक के बाद सीढियां चढ़ते हुए अनीता प्रभा शर्मा म.प्र.शासन में डीएसपी बन गई। अनीता की जंग अभी रुकी नहीं है, वो डिप्टी कलेक्टर के लिए एमपीपीएससी की तैयारी कर रही है।
   जिले के कोतमा में 1992 में शर्मा परिवार में इनका जन्म हुआ। 10 वीं कक्षा में उन्हें 92 प्रतिशत अंक मिले। इनके माता-पिता ने भाई के साथ रहने उन्हें ग्वालियर भेज दिया गया, जहां 12 वीं तक पढाई की। लेकिन 2009 में 17 साल की उम्र में वे अभिभावकों के दबाव के आगे टूट गईं और उनकी शादी 10 साल बडे व्यक्ति से कर दी गई। किंतु आर्थिक रूप से कमजोर ससुराल वालों ने उन्हें ग्रेजुएशन पूरा करने की इजाजत दे दी।
    ग्रेजुएशन पूरा करने में चार साल लगे, क्योंकि अंतिम साल की परीक्षा में वे इसलिए शामिल नहीं हो सकीं, क्योंकि पति का एक्सीडेंट हो गया था और उनके दोनों हाथ टूट गए थे। वे लगातार तीन वर्षों में ग्रेजुएशन पूरा नहीं कर सकी थीं, इसलिए प्रोबेशनरी बैंक ऑफिसर की पोस्ट के लिए वे असफल रहीं। दूसरी तरफ परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग करने के लिए उन्होंने क्विक ब्यूटीशियन कोर्स कर लिया और पार्लर में काम करने लगीं।
   धीरे-धीरे उन्हें अहसास हुआ कि उम्र के अंतर के कारण उनमें सामजंस्य इतना अच्छा नहीं है। किंतु परिवार और पेरेंट्स की प्रतिष्ठा ने उन्हें इस जीवन में बनाए रखा। बिना नौकरी, बिना खुशहाल जीवन और बिना परिवार वालों के सहयोग के उन्होंने स्वतंत्र और आत्मनिर्भर जीवन के लिए 2013 में विवादों से घिरे व्यापमं की फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा दी। चार घंटे में 14 किलोमीटर की पैदल चलने की परीक्षा पूरी की और दिसंबर 2013 में बालाघाट जिले में पोस्टिंग मिल गई। उनके लक्ष्य ऊंचे थे, इसलिए वे एक बार फिर व्यापमं की सब-इंस्पेक्टर पोस्ट की परीक्षा में शामिल हो गईं। हालांकि वे फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी करती रहीं, लेकिन इस परीक्षा के फिजिकल टेस्ट में वे फेल हो गईं। दूसरी बार प्रयास किया और कठिन फिजिकल टेस्ट पास कर सब-इंस्पेक्टर के लिए चुन ली गईं, जबकि दो महीने पहले ही उन्हें ओवरी में ट्यूमर के कारण सर्जरी करवानी पडी थी। फिर उन्होंने बतौर सूबेदार जिला रिजर्व पुलिस लाइन में ज्वॉइन किया। ट्रेनिंग के लिए सागर भेजा गया, इसके बाद उन्होंने डिवोर्स की प्रक्रिया को भी आगे बढाया।
   इस ट्रेनिंग के दौरान ही मध्यप्रदेश स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन परीक्षा के रिजल्ट आए, जिसमें वे पहले शामिल हुई थीं, इसमें वे डीएसपी सिलेक्ट हो गईं। पहले ही प्रयास में महिलाओं में वे 17 वें स्थान पर आईं और सभी कैटेगरी में वे 47 वें नंबर पर रहीं। वे भोपाल लौट आईं और डीएसपी के पद पर ज्वाइन कर ली हैं। हालांकि, वे डीएसपी पोस्ट से भी संतुष्ट नहीं थीं और ऊंची पोस्ट डिप्टी कलेक्टर के लिए एमपीपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।  
(11 days ago)
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