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श्रमिकों की बेटियों की पालक बनी सरकार की विवाह सहायता योजना
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गुना | 13-अक्तूबर-2017
 
 
    हमारे समाज में मजदूर मां-बाप के लिए आज भी अपनी जवान बेटी का विवाह करना एक बड़े सपने के समान ही है। बड़ी संख्या में बेटियां मां-बाप की लाचारी के चलते कुंआरी रह जाती हैं।
    लाचार मां और मजबूर पिता की पथराई आंखें इसी दिन की राह ताकते हुए बंद भी हो जाती हैं। महंगाई के इस दौर में गरीब परिवारों की बेटियों के हाथ पीले कर पाना वास्तव में कोई खेल नहीं है। लेकिन मध्यप्रदेश में ऐसे श्रमिक मां-बाप के पालक बन कर राज्य सरकार ने विवाह सहायता योजना के जरिए उनकी बेटियों के विवाह का बीड़ा उठाया है। प्रदेश में मजदूर वर्ग इसलिए खुश है, क्योंकि उनकी बेटियों के हाथ पीले करने के लिए उन्हें अब सोचना नहीं पड़ता।
    सरकार की उक्त योजना प्रदेश की उन हजारों बेटियों की पालक बन कर सामने आ गई, जिन्होंने गरीबी के चलते कभी सोचा नहीं था कि उनके हाथ भी पीले हो पाएंगे। दरअसल, राज्य सरकार द्वारा मजदूर वर्ग की कन्याओं के विवाह के लिए चलाई गई विवाह सहायता योजना के तहत अकेले गुना जिले में अब तक श्रमिक बेटियों का आंकड़ा 450 छू रहा है।
    कोई कुछ भी कहे। लेकिन इस योजना की सच्चाई यही है कि मजदूर वर्ग के उन मां-बाप ने कभी सोचा भी नहीं था और उनका सपना पूरा हो गया। मातापुरा केंट गुना निवासी विष्णु प्रजापति उन्हीं पिताओं में से एक हैं, जिनकी बेटी के उक्त योजना ने हाथ पीले करा दिए। हालांकि उन्हें बेटी के विवाह के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी।
    पर वह साहूकार के पास उधार लेने जाना नहीं चाहते थे। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनकी मदद जरूर करेगी और ऐसा ही हुआ। उन्होंने ज्योंही मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए और उन्हें बेटी के विवाह के लिए पच्चीस हजार रूपये की सहायता मिल गई। इस राशि से विष्णु ने अपने घर पर ही पारंपरिक रीति-रिवाज से बेटी का विवाह कराया। विष्णु कहते हैं, "मेरे लिए यह बहुत बड़ी मदद थी, जिसके कारण मैं बेटी के हाथ पीले करके पिता के उत्तरदायित्व निभा पाया। विवाह घर पर ही हुआ। जिससे विवाह समारोह में सारे रिश्तेदार-नातेदार शामिल हुए।"
    गुना के श्रम पदाधिकारी श्री एन.के. वर्मा बताते हैं कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के कल्याण के लिए राज्य सरकार ने म.प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल योजना संचालित की है। इस क्षेत्र में काम करने वाले करीब 450 असंगठित मजदूरों की बेटियों के विवाह के लिए कुल 93 लाख 30 हजार रूपये की धन राशि दी गई है। इस योजना की खास बात यह है कि इसके तहत राशि सीधे श्रमिक के बैंक खाते में जमा करा दी जाती है और वह अपनी इच्छानुसार अपने घर पर ही बेटी का विवाह कर सकता है। वह अपनी इच्छा के अनुसार विवाह पर खर्च कर सकता है। इसमें बी.पी.एल. कार्ड जरूरी नहीं है।
 
(65 days ago)
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