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सहज, सरल एवं सकारात्मक सोच के साथ जीएसटी को अपनायें - संभागायुक्त
10 वर्ष की तैयारी के बाद लागू हुआ है जीएसटी - आयुक्त सीजीएसटी, जीएसटी को लेकर कार्यशाला आयोजित
उज्जैन | 13-अक्तूबर-2017
 
   
  
   संभागायुक्त श्री एमबी ओझा ने कहा है कि व्यापारी जीएसटी को सहज, सरल एवं सकारात्मक सोच के साथ अपनायेंगे तो इसके अनुपालन में कोई कठिनाई नहीं आयेगी। उन्होंने कहा कि कई बार किसी चीज की जानकारी नहीं होने पर भ्रम पैदा हो जाता है। इस भ्रम को बढ़ाने में वर्तमान में सोशल मीडिया भी अपना योगदान दे रहा है। संभागायुक्त ने कहा कि जीएसटी पर कार्यशालाएं आयोजित कर व्यापारियों के भ्रम को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, इसके निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम निकलेंगे। संभागायुक्त श्री एमबी ओझा ने यह बात आज शुक्रवार को बृहस्पति भवन में जीएसटी को लेकर आयोजित कार्यशाला में कही।
   कार्यशाला में सीजीएसटी के आयुक्त श्री नीरव कुमार मलिक ने कहा कि जीएसटी का लागू होना देश में आजादी के बाद की सबसे बड़ी घटना है। जीएसटी के ऊपर पिछले 10 सालों से तैयारी चल रही थी और इसी के बाद इसे लागू किया गया है। वर्तमान में विश्व में 150 देश ऐसे हैं, जहां पर जीएसटी लागू है। जीएसटी एक आर्थिक रूप से प्रभावी मॉडल है। अप्रत्यक्ष करों के संग्रहण में निश्चित रूप से यह मील का पत्थर साबित होगा। जीएसटी के लागू होने से अब देश में वस्तुओं का विनिमय एवं ट्रांसपोर्टेशन आसान हो गया है। सम्पूर्ण देश एक मार्केट बन गया है। वर्तमान में देश के 70 लाख ‘टैक्सपेअर’ को जीएसटी के नीचे लाना एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई उदारतापूर्वक निर्णय लिये हैं। मध्य प्रदेश में ढाई लाख करदाताओं में से मात्र डेढ़ लाख लोगों ने जीएसटी का रिटर्न दाखिल किया है। उन्होंने अपील की है कि जीएसटी एक सरल ‘कर’ है, इसको समझकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
   बैठक में कलेक्टर श्री संकेत भोंडवे ने कार्यशाला में मौजूद व्यापारियों से आव्हान किया कि वे अपनी शंकाओं का समाधान करते हुए जीएसटी को अपनायें। उन्होंने कहा कि करदाताओं एवं अधिकारियों के मध्य निरन्तर सम्पर्क एवं चर्चा होते रहने से इस कानून को लागू करने में आसानी होगी।
   कार्यशाला में उपायुक्त जीएसटी श्री वीरेन्द्र कुमार जैन ने पॉवरपाइन्ट प्रजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी तथा 6 अक्टूबर के बाद केन्द्र शासन द्वारा किये गये सुधारों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि लगभग 27 प्रकार की वस्तुओं पर शासन द्वारा टैक्स कम किया गया है। डेढ़ करोड़ से कम असेसमेंट वाले व्यापारियों को जीएसटी रिटर्न अब तीन माह में भरना होगा। उन्होंने कहा कि शासन के विभागों द्वारा ढाई लाख के ऊपर की खरीदी की जाती है तो विभाग को उस राशि पर दो प्रतिशत टीडीएस काटना होगा।
   उज्जैन संभाग के जीएसटी के उपायुक्त श्री वीरेन्द्र जैन ने कहा है कि टैक्स प्रणाली में जीएसटी बेहद सरल है। इसकी प्रक्रियाओं को समझने के बाद इसको आसानी से लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी वस्तु एवं सेवा पर लगाये जाने वाला कंज्यूमर बेस्ड टैक्स है। वस्तु एवं सेवा की जिस स्थान पर खपत होगी, वहां पर टैक्स लगेगा। एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाली सर्विस या गुड्स पर एसजीएसटी (राज्य जीएसटी) एवं आईजीएसटी (इंटीग्रेटेड जीएसटी) दोनों लगेगा।
जीएसटी की संकल्पना एवं उसके लाभ
   जीएसटी गन्तव्य आधारित उपभोग कर है, जिसका मतलब है कि किसी वस्तु पर लिये गये कर का लाभ उस राज्य को मिलेगा, जिस राज्य में उस वस्तु की खपत होगी। पहले की प्रणाली के तहत उत्पादक या उत्पत्तिकारक राज्य को कर प्राप्त होता था। जहां माल अन्तर्राज्यीय व्यापार में बेचे जाते थे, वहां केन्द्रीय बिक्री कर विक्रेता राज्य द्वारा प्राप्त किया जाता था। वर्तमान प्रणाली के तहत आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न चरणों में लगाये गये राज्य व केन्द्रीय करों को पूरी तरह अन्तिम गन्तव्य के लिये स्थानान्तरित कर दिया जायेगा। गन्तव्य राज्य द्वारा पूर्ण एसजीएसटी का उपभोग किया जायेगा। राज्य के निवासियों द्वारा दिया गया एसजीएसटी दूसरे राज्य की एसजीएसटी देयता के विरूद्ध समायोजन के लिये उपलब्ध नहीं होगा।
   अर्थव्यवस्था पर होने वाले लाभों को देखें तो जीएसटी लागू होने से कम विकसित राज्यों को आर्थिक रूप से लाभ होगा, क्योंकि कम विकसित राज्य ही मूलत: उपभोक्ता राज्य हैं और जीएसटी एक गन्तव्य आधारित उपभोग कर है। कर की बाहुल्यता कम होने से प्रशासनिक व्यय में बचत संभव होगी। इसके परिणामस्वरूप मानव संसाधन व अन्य संसाधनों का उपयोग अन्य लाभकारी योजनाओं के लिये किया जा सकेगा।
   कार्यशाला में व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, उत्पादकों आदि ने अपनी शंकाओं का समाधान किया तथा आग्रह किया कि जीएसटी में अच्छे टैक्सपेयर को बचाने के लिये प्रावधान किये जायें। साथ ही कहा कि नये उद्यमियों एवं जॉबवर्क करने वालों के बारे में भी छूट प्रदान की जाना चाहिये। आयुक्त जीएसटी ने कहा कि वर्तमान में जीएसटी को ऑटोकरेक्टिंग मोड में रखा हुआ है, छह माह बाद कर अपवंचन करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध सख्ती की जा सकेगी। कार्यक्रम में अपर आयुक्त डॉ.अशोक कुमार भार्गव, उपायुक्त जीएसटी श्री एमपी मीणा, संयुक्त आयुक्त विकास श्री प्रतीक सोनवलकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
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