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युवा भारत को विकसित राष्ट्र बनायें - राष्ट्रपति
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक का द्वितीय दीक्षांत समारोह
अनुपपुर | 11-नवम्बर-2017
 
    राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा है कि युवा शक्ति भारत को विकासशील से विकसित देश बनायें। उन्होने कहा कि आज के युवा जिस मुकाम पर पहुँचे हैं वहां तक उन्हें पहुँचाने में परिवार, समाज और राष्ट्र का योगदान है। इस योगदान का युवाओ पर ऋण है। युवा इस ऋण को नहीं भूलें। ऋण को उतारने के लिये युवा मानवता के हित में कार्य करे और विकसित समाज के निर्माता बनें। उन्होने कहा कि इतिहास के प्रवाह में वही विचारधारा पनपती है जो मानवता के हित में होती है। राष्ट्रपति ने युवाओं को मानवता की विचाराधारा के साथ देश के विकास में सहयोग करने की अपील की है।
    राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद आज अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री ओमप्रकाश कोहली, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, कुलाधिपति डॉ. एस.एम.झारवाल, कुलपति जनजातीय विश्वविद्यालय श्री टी.वी.कुट्टीमनी, राष्ट्र की प्रथम महिला श्रीमती सविता कोविंद, श्रीमती साधना सिंह, प्रभारी मंत्री जिला अनूपपुर श्री संजय पाठक, सांसद श्री ज्ञान सिंह उपस्थित थे।
    राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की आधारशिला उसके शिक्षक और छात्र होते हैं। भारत उस महान परंपरा का साक्षी है, जहां चाणक्य जैसे शिक्षक ने चंद्रगुप्त जैसे एक शिष्य के माध्यम से भारत के इतिहास का एक महान अध्याय लिखा। आज फिर से हमारी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने हेतु गुरू और शिष्य के बीच उसी सामंजस्य को आगे बढ़ाना है। राष्ट्रपति ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के उत्तीर्ण छात्रों के सम्मान का कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि एक शिक्षित, अनुशासित और संकल्पित युवाओं का समाज और राष्ट्र निर्माण में समर्पित होने का अवसर होता है। दीक्षांत समारोह शिक्षा का समापन नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भरे जीवन का आरंभ है। राष्ट्रपति ने छात्र-छात्राओं से कहा कि आप सभी अपनी प्रतिभा से सफलता की ऐसी छाप छोड़ें जिससे पूरे राष्ट्र के सामने इस विश्वविद्यालय को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। उन्होने कहा कि कोई भी लक्ष्य अपने-आप में न छोटा होता है न बड़ा, वह केवल एक लक्ष्य होता है, आप जो भी लक्ष्य तय करें उसे पाने के लिये पूरी एकाग्रता के साथ आगे बढ़ें। उन्होने कहा कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिये कितने समर्पण और एकाग्रता की आवश्यकता होती है वह महान वैज्ञानिक आईंस्टीन के जीवन से सीखा जा सकता है। राष्ट्रपति ने महान वैज्ञानिक आईंस्टीन की कार्य के प्रति समर्पण एवं एकाग्रता के संस्मरण भी छात्र-छात्राओं को सुनाये।
    राष्ट्रपति ने कहा कि अमरकंटक तीर्थ एवं नर्मदा नदी दोनों की निकटता इस विश्वविद्यालय कें सुंदर वातारण को पवित्र बनाते हैं। यहां के वातावरण में एक दिव्य अनुभूति है। यहां ज्ञान और शांति है, इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं अध्यात्मिकता दोनो का सामंजस्य यहां के जनजातीय विकास की कहानी प्रस्तुत करते हैं। उन्होने कहा कि ऐसा माना जाता है कि इस स्थल पर सिखों के प्रथम गुरू श्री गुरूनानक देव जी व संत कबीर के बीच आध्यामिक चर्चा हुई, जो बाद में बानी के रूप में गुरूग्रंथ साहिब का हिस्सा भी बनी। ऐसी ज्ञान स्थली पर आज का यह दीक्षांत समारोह एक विशेष महत्व रखता है। यह स्थल सम्पूर्ण मानव जगत के लिये ज्ञान, सच्चाई व मानवता का संदेश देता है। राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग डेढ़ करोड़ से अधिक जनजातीय जनसंख्या वाले मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना होना निश्चय ही उपयोगी है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक जनजातीय युवाओं को ज्ञान-विज्ञान, टेक्नोलॉजी और कला, साहित्य के माध्यम से शिक्षा जगत में उत्कृष्ट अवसर देकर उन्हे आधुनिक भारत के निर्माण में सहभागी बनाना है।  
    राष्ट्रपति ने कहा कि अमरकंटक में नर्मदा मंदिर के दर्शन के पश्चात इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में उपस्थित होकर मेरी खुशी दुगनी हो गई है। राष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह के इस सुअवसर पर यहां उपस्थित सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को बधाई दी।
जनजातीय समाज के उत्थान में विश्व विद्यालय की महती भूमिका होगी: राज्यपाल
    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुये राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली ने कहा कि मुझे देश के विभिन्न विश्व विद्यालयों में जाने का अवसर मिला है। लेकिन इस विश्व विद्यालय के छात्रों के परिधान एवं विशेषताएं अपनी अलग पहचान दिखा रही हैं। इस विश्व विद्यालय मे अधिकांश जन जातीय समाज के छात्र छात्राएं है जो जन जातीय कला, संस्कृति एवं विभिन्न प्राकृतिक औषधियों का शोध कर रहे है।
    राज्यपाल ने कहा कि देश के राष्ट्रपति से जिन विद्यार्थियों ने स्वर्ण पदक एवं उपाधियां प्राप्त की है। वे सब बधाई के पात्र है, सभी आगे बढ़ेगे और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने मंे अपना योगदान देंगे। विद्यार्थी जीवन में बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए शिक्षा रूपी ज्ञान के बल पर सफलता पूर्वक पथ पर आगे बढ़ते रहेगे। श्री कोहली ने कहा कि साफ, सुंदर एवं सुरम्य हरा-भरा विश्व विद्यालय परिसर किसी को भी प्रभावित करता है। विश्व विद्यालय ने कम समय मे शैक्षणिक एवं विकास के प्रशंसनीय कार्य किए है।
    इस विश्व विद्यालय की भौगोलिक, प्राकृतिक छटां अपनी ओर आकर्षित करने में अग्रणी है। इस अंचल के विभिन्न ग्रामों के आदिवासियो के जीवन स्तर को बढाने मे जो सक्रियता दिखाई गई है उसका लाभ भी परिलक्षित हो रहा है। छात्रों एवं शोधार्थियो के मन में ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासियो के प्रति सेवा का जुनून पैदा हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र मे जन जातीय समाज पीछे रहा है लेकिन इस विश्व विद्यालय की स्थापना से अपेक्षित परिणाम सामने आ रहे है।
   यह विश्व विद्यालय अखिल भारतीय संस्था के रूप मे उभरा है, जिसका श्रेय प्रशासकीय अधिकारियों, शोधार्थियों एवं छात्रों को जाता है, जिनके प्रयासों से इसका भव्य स्वरूप प्राप्त हुआ है।     
मध्यप्रदेश में मिलेगी प्रतिभाओ को सभी आवश्यक सुविधाएं: मुख्यमंत्री श्री सिंह
    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में आयोजित दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार को भारतीय परिधान में देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई है। भारत प्राचीन काल से ही विश्वगुरू रहा है। वेद की ऋचाएं भारत में ही लिखी गयी हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में बचपन से ही परमार्थ एवं सबके कल्याण का पाठ पढाया जाता है। हमारे देश में प्रतिभाओं की कभी कमी नहीं रही है। हमारे देश के मस्तिष्क का उपयोग कर विदेश चिकित्सा एवं विकास के क्षेत्र में अग्रणी बन गये हैं। अब मध्यप्रदेश सरकार सतत् प्रयास कर रही है। प्रदेश की प्रतिभाओं को पलायन करने की आवश्यकता ही न पड़े। आपने कहा कि प्रदेश में सदैव प्रतिभा का सम्मान हुआ है। आगे और प्रयास कर उन्हें सुविधा एवं साधन उपलब्ध कराकर प्रोत्साहित किया जायेगा। आपने दीक्षांत समारोह में स्वर्णपदक एवं उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि अब आप अपने जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। आपका आगामी जीवन यशस्वी हो इसके लिए लक्ष्य बनाकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश का जो भी विद्यार्थी अपनी कम्पनी स्थापित करना चाहेगा उन्हें प्रदेश सरकार प्रोत्साहित करेगी, सरकार उनके शेयर भी खरीदेगी।
    मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के विकास में प्रदेश सरकार अपना दायित्व समझकर कार्य करेगी। राष्ट्रपति जी के प्रदेश एवं नर्मदा उद्गम अमरकंटक क्षेत्र में प्रथम आगमन पर उन्होंने आभार व्यक्त किया।
    मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का अनुसरण करने की सलाह युवाओं को दी। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारत के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सभी ईश्वर के अंश हैं, अनंत शक्तियों के भण्डार हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आव्हान किया कि नये भारत के निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।
    कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री एसएम झालवार ने उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को शपथ दिलायी कि वे मन, वचन एवं कर्म से सदाचारी रहेंगे तथा जीव, समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्य करेंगे।
    दीक्षांत समारोह के शुभारंभ मे दीक्षांत शोभा यात्रा निकाली गयी, जिसमें राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी, राज्यपाल श्री ओपी कोहली, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान,  कुलाधिपति श्री एसएम झारवाल विश्वविद्यालय परिवार, स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी, प्राध्यापक, कुलपति श्री टीबी कट्टीमन, शामिल थे। शोभायात्रा के दौरान एसएएफ जबलपुर के बैण्ड दल द्वारा आकर्षक संगीतमय प्रस्तुति दी गयी। कार्यक्रम का आगाज एवं समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्वारा ग्यारह विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं उपाधि प्रदान की गयी
    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में आयोजित दीक्षांत समारोह में  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रतीक स्वरूप ग्यारह मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं उपाधि प्रदान की।
    दीक्षांत समारोह में आज 1337 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा 130 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक वितरित किये गये। उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2007 में हुई थी। विश्वविद्यालय का यह दूसरा दीक्षांत समारोह था। विश्वविद्यालय में वर्तमान में लगभग तीन हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा 12 संकाय अंतर्गत 30 विभाग संचालित किये जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में सोलर सिस्टम, वाटर रिसाइकल सिस्टम, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, स्वच्छता एवं ग्रीन परिसर की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। आगे भी कृषि, मेडिकल कॉलेज, आयुष शोध हेतु कार्य प्राथमिकता के साथ शुरू किये जा रहे हैं। अकादमिक क्षेत्र में विश्वविद्यालय को अपने दो शोध पेटेंट कराने में सफलता मिली है, तीसरे शोध को पेटेंट कराने की कार्यवाही जारी है।
 
(9 days ago)
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