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किसान छोटे-बड़े दाने के यूरिया से भ्रमित न हों
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नीमच | 15-नवम्बर-2017
 
   
   नीमच, मन्दसौर एवं रतलाम जिले के किसानों द्वारा इन दिनों छोटे दाने का यूरिया मांगा जा रहा हैं, जबकि भारत सरकार द्वारा खेती किसानों के लिए लाभप्रद वैज्ञानिको द्वारा प्रमाणित बड़े दाने का नीम कोटेड यूरिया विदेश से मंगा कर उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी किसानबन्धु जानते है, कि दोनों प्रकार के यूरिया के कट्टे पर 46 प्रतिशत नाईट्रोजन लिखा रहता है। फिर भी निजी क्षेत्र के व्यापारियों द्वारा निहित स्वार्थ के चलते यह भ्रम फैलाया जाता है,कि छोटे दाने का यूरिया अच्छा है।
   किसानभाई किसी भी भ्रम में न पड़े, यूरिया किस वस्तु से बनता है। यूरिया में चार प्रकार की गैसों मिलाने पर यूरिया बनता है। यूरिया का रासायनिक फार्मूला (एन.एच.2 सी.ओ.एन.एच.2) NH2CONH2 होता है। प्रथम एन-से तात्पर्य नाईट्रोजन, एच-हाईड्रोजन, सी-कार्बन एवं ओ-ऑक्सीजन गैस। इस तरह इन चारों गैसों से मिलकर यूरिया बनता है। इन चार प्रकार की गैसों में नाइट्रोजन हवा से तथा शेष तीन प्राकृतिक गैस से लेकर, निश्चित अनुपाता में मिलाकर यूरिया बनाया जाता है। किसानभाई देगें कि जिस प्रकार गैस को मुट्ठी में बांधकर नही रखा जा सकता है,ठीक उसी प्रकार यूरिया में मौजूद गैसों को घुलने के बाद उन्हे बांधकर रोका नही जा सकता। जो यूरिया शीघ्र घुल जाए उतनी ही जल्दी हवा अथवा पानी में घुलकर नष्ट हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने यूरिया से एन-गैस धीरी-धीरे घुलकर पानी में मिले तथा पौधे को ज्यादा समय तक मिले। इस लिए मोटे दाने का यूरिया बनाने की खोज की। वैज्ञानिकों द्वारा देश भर में किए गए परीक्षणें से यह परिणाम निकाला हैं, कि मोटे दोने के यूरिया से छोटे दाने के यरिया के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा नाईट्रोजन पौधें को प्राप्त होती है। मोटे दोने का यूरिया सिंचित फसलों जैसे गेंहू, रायडा के लिए अधिक लाभप्रद है। किसानबन्धु व्यापारियो के कहने पर छोटे दाने का यूरिया ऊँची कीमत पर नही खरीदें। यह जानकारी इफको के वरिष्ठ क्षेत्र प्रबंधक डॉ. बी.एस.जादौन ने दी।
(161 days ago)
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