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मिशन पालना के अंतर्गत की जायेगी परित्याग किये शिशु की देखभाल
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बालाघाट | 12-जनवरी-2018
 
 
    प्रदेश में आये दिन जन्मदाता माता-पिता द्वारा बच्चों को परित्याग कर उन्हें एकांत स्थान (झाडियो, खेतो, कचरे के डब्बों आदि) पर छोडने पर शिशु को शारीरिक क्षति पहुँचने की संभावना रहती हैं। इस प्रकार जन्में परित्यक्त शिशुओं की उपयुक्त देखरेख के लिए मिशन पालना का शुभारंभ बाल दिवस पर भोपाल जिले से किया गया हैं।
    मिशन पालना के अंतर्गत प्रत्येक जिला एवं विकासखण्ड में बाल देखरेख संस्थान, स्वधार गृह, अल्पावास गृह, अस्तपताल, नर्सिंग होम, रेल्वे स्टेशन, मंदिरों एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों जहाँ नवजातों के विषम अवस्था में पाए जाने की सर्वाधिक संभावना होती हैं, ऐसे स्थलों पर आदर्श पालना की स्थापना की जाना है एवं उसकी सुरक्षा संबंधित थाना क्षेत्र के बीट प्रभारी द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
     जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी श्रीमती दीपमाला सोलंकी ने बताया कि जिले में मिशन पालना के अंतर्गत आदर्श पालना की स्थापना के करने के इच्छुक व्यक्ति या संस्थायें जिला महिला सशक्तिकरण कार्यालय में सम्पर्क कर सकते है। मिशन पालना के अंतर्गत आदर्श पालना जमीन से कम से कम 04 फीट उँचाई पर होना चाहिए, वह ग्रिल से कवर्ड हो एवं उसमें आरामदायक गदा बिछाया गया होना चाहिए। वह मच्छरजाली से पूर्ण रूप से ढका होना चाहिए और उपर से किसी पतली जाली से ढका होना चाहिए। पालना के पास एक मैन्युअल एवं इलेक्टिक घंटी लगी होना चाहिए।
    समेकित बालसंरक्षण योजना के प्रावधनुसार प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों, अस्तपतालों/नर्सिंग होम, बाल देखरेख संस्थान, स्वधारगृह, अल्पावासगृह में शिशु पालना स्थल की स्थापना किये जाने का प्रावधान हैं। अतः जिला व विकासखण्ड स्तर से अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र, अस्पताल/नर्सिंग होम में पालना स्थापित किये जाने के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई को परित्यक्त शिशुओं को सुरक्षित रूप से प्राप्त करने, सुरक्षित स्थान जहाँ शिशु का परित्याग करने वाले पालक/अभिभावक की गोपनीयता भी सुनिश्चित हो सके, पालना की स्थापना कर महिला सशक्तिकरण कार्यालय में श्री खिलेश डाहाटे को अवगत करा सकते है।
 
(9 days ago)
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