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पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण विषय पर कार्यशाला संपन्न
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उमरिया | 13-फरवरी-2018
 
  
   भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय जबलपुर के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा स्थानीय देशी पौध किस्मों के संरक्षण एवं कृषकों के अधिकार विषय की जानकारी के प्रति आम कृषकों, नागरिकों, कृषि/उद्यानिकी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मध्य जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से पौध किस्म एवं कृषि अधिकार संरक्षण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन बांधवगढ़ विधायक श्री शिवनारायण सिंह एवं मण्डी अध्यक्ष श्री कमल सिंह मरावी के मुख्य आतिथ्य में ग्राम-धवईझर (आकाशकोट) विकासखंड करकेली में संपन्न हुआ। इस अवसर पर केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. के.पी. तिवारी ने उपस्थित लोगों को इस कार्यशाला का उद्देश्य बताते हुये कहा कि केन्द्र द्वारा जिले की अभी तक विभिन्न फसलों की 55 प्रजातियों को भारत सरकार के पास पंजीकृत के लिये भेजा जा चुका है।
   कार्यक्रम में विधायक श्री शिवनारायण सिंह ने  कहा कि किसान भाई अधिक से अधिक अपने देशी स्थानीय किस्मों का पंजीयन अवश्य करायें जिससे कि जिले का नाम देश विदेश तक जा सके व कृषकों को अपनी पहचान मिल सके। इस अवसर पर जवाहरलाल कृषि विश्वविद्यालय से आये पौध प्रजनन विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. आर. एस. शुक्ला ने अपने वक्तव्य में कहा कि नये शोध कार्य हेतु विशेष गुण वाली प्रजाति को सरकार द्वारा जीन बैंक में संरक्षित किया जाता है, जिससे कि आगे आने वाले समय में परिस्थितियों के अनुसार देशी किस्मों के जींस से नई किस्म विकसित की जा सके। वैज्ञानिक डॉ. संजय सिंह ने देशी किस्मों का महत्व बताते हुये विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण की बात कही।
   केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. के. व्ही. सहारे ने उमरिया जिलें के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण आगामी समय में भी स्थानीय किस्मों को संरक्षित करने पर जोर दिया, कार्यक्रम के दौरान उपस्थित  कृषकों ने सेम, तिल, उड़द, धान की कुल 10 स्थानीय किस्मों का पंजीयन कराया।
   इस कार्यक्रम में लगभग 400 महिला/पुरूष किसान सम्मलित हुये कार्यक्रम में केन्द्र के अन्य वैज्ञानिक डॉ. आर.आर. सिंह, श्री विवेक वाल्के, श्री अरूण रजक एवं किसान मित्र श्री अनुराग शुक्ला, संतोष वरकड़े का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का मंच संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. के.व्ही. सहारे द्वारा किया गया।
 
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