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सुशासन का एक नया अध्याय
एमपी ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर 5 करोड़ आवेदकों का निराकरण
सिवनी | 15-अप्रैल-2018
 
   
    प्रदेश में लोक सेवाएं प्राप्त करना अब नागरिकों का अधिकार है, कोई याचना का विषय नहीं है, यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रदेश में वर्ष 2010 में लोक सेवा गारंटी करते समय कहीं थी। तत्कालीन सेवा प्रदाय प्रक्रिया और स्थापित नीतियों के सन्दर्भ में एक क्रांतिकारी कदम था। इस प्रयास के साथ मध्य प्रदेश ने लोक सेवाओं के प्रदाय के क्षेत्र में देश में एक नया अध्याय जोड़ा और इस पहल से देश में शासन से रोजमर्रा के पड़ने वाले कामों को लेकर नए सिरे से चर्चा प्रारंभ हो गई। पहली बार सरकार ने लोक सेवा गारंटी कानून के अन्तर्गत लोक सेवा को निश्चित समय-सीमा में दिया जाना सुनिश्चित किया और इसे सम्बधित विभाग और अधिकारियों की जिम्मेदारी के साथ भी जोड़ा। आधारभूत संरचना और सूचना तकनीक के बेहतर सामंजस्य से प्रदेश में लोक सेवा गारंटी कानून के अन्तर्गत लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों के 5 करोड़ आवेदकों का निराकर लोक सेवा प्रबंधक विभाग द्वारा उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है।
    वर्ष 2010 में लोक सेवा गारंटी कानून लागू होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इसके क्रियान्वयन की थी। शासकीय विभागो सीमित क्षमता के चलते सेवा आवेदकों का निराकरण एक बड़ी चुनौती थी। मध्य प्रदेश शासन द्वारा इसे दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 2012 में लोक सेवा केन्द्रों की स्थापना का निर्णय लिया गया। प्रदेश में तहसील स्तर तक पीपीपी मॉडल पर 413 सुविधायुक्त लोक सेवा केन्द्रों की स्थापना की गई। इन केन्द्रों पर नागरिकों से सेवा आवेदन प्राप्त करके उनका समय-सीमा में निराकरण करने के लिये आवश्यक सुविधायें भी उपलब्ध कराई गई। केन्द्रों के स्थापना से जहां एक ओर नागरिकों का लोक सेवाओं की प्रदाय प्रक्रिया में विश्वास सुदृढ़ हुआ वहीं दूसरी ओर विभागों की क्षमताओं में वृद्धि हुई।
    नागरिकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 2016 में राज्य शासन द्वारा लिये गये नीतिगत निर्णय अनुसार अब प्रमुख नागरिक सेवाओं का 12000 एम.पी. ऑनलाइन कियोस्क और 34000 कॉमन सर्विस सेंटर (सी.एस.सी.) द्वारा भी प्रदाय किया जा रहा है।
(10 days ago)
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