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पैरालीगल वालेन्टियर्स के ओरियेन्टेशन कोर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
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छिन्दवाड़ा | 16-मई-2018
 
   जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री एल.डी.बौरासी ने आज जिला न्यायालय परिसर छिन्दवाड़ा स्थित ए.डी.आर. भवन में पैरालीगल वालेन्टियर्स के ओरियेन्टेशन कोर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलित कर और महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुभारंभ किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 70 पैरालीगल वालेन्टियर्स उपस्थित थे।
   जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बौरासी ने पैरालीगल वालेंटियर्स को उनके कार्यो और उद्देश्यों के बारे में विस्तारपूर्वक बताते हुये मध्यप्रदेश अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना, मध्यस्थता योजना, पारिवारिक विवाद समाधान केन्द्र, विधिक सहायता के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि पैरालीगल वालेंटियर्स द्वारा पीड़ित व्यक्तियों को न्याय दिलाने में उनकी सहायता करेंगे। प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्रीमती आशा गोधा ने फैमिली लॉ, हिन्दू विवाह अधिनियम, मुस्लिम विवाह अधिनियम, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण, कस्टडी एवं गार्जियनशिप, न्यायिक पृथक्करण एवं तलाक के बारे में विस्तारपूर्वक बताया तथा कहा कि वैवाहिक विवादों को मध्यस्थता द्वारा दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामलों को निपटाया जा सकता है।
   जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायाधीश श्री विजय सिंह कावछा ने प्राधिकरण की योजनायें निःशुल्क विधिक सहायता एवं सलाह योजना, मध्यस्थता योजना, विभिन्न लोक अदालत, विधिक साक्षरता शिविर, लीगल एड क्लीनिक, म.प्राधिकरण की योजनायें निःशुल्क विधिक सहायता एवं सलाह योजना, मध्यस्थता योजना, विभिन्न लोक अदालत, विधिक साक्षरता शिविर, लीगल एड क्लीनिक, म.प्र. अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना, भारत का संविधान आदि के संबंध में जानकारी दी। सी.जे.-1 श्री रूपसिंह कनेल ने महिलाओं संबंधी कानून-घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 1971, पी.सी.पी.एन.डी.टी. एक्ट 1994, आई.पी.सी. एवं सी.आर.पी.सी. के प्रावधानों आदि के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा की शिकार महिला इसके लिये न्यायालय में आवेदन दे सकती है और तब न्यायालय उसे सभी प्रकार की आर्थिक सहायता दिलाये जाने के लिये आदेशित कर सकता है और उसके विरूद्ध हो रही शारीरिक हिंसा को रोके जाने का आदेश दे सकता है। व्यक्ति महिला के अस्वस्थ होने की दशा में उसे चिकित्सकीय व्यय भी दिलाया जा सकता है। इसी प्रकार दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दहेज लेना एवं देना दोनों को दंडनीय अपराध माना गया है। यदि कोई व्यक्ति दहेज लेता या देता है तो उसे तीन वर्ष तक के करावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया जा सकता है।
   कार्यशाला में सी.जे.एम. श्री आर.के. डहेरिया ने बालकों से संबंधित कानून किशोर न्याय अधिनियम, बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम 1986, कारखाना अधिनियम 1948, पाक्सो अधिनियम 2012 के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि इस अधिनियम में यदि किसी व्यक्ति द्वारा बच्चों के साथ लैंगिक अपराध किया जाता है तो उस अपराध के साथ-साथ किसी व्यक्ति के द्वारा उसके लिये किया गया दुष्प्रेरण या प्रयत्न भी दण्डनीय होगा। बालक की परिभाषा में 18 वर्ष से कम आयु के किशोर और बालिकाओं को शामिल किया गया है। सी.जे.-1 श्रीमती चैनवती ताराम ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति के उद्देश्य, कार्य एवं प्रक्रिया के बारे में विस्तापूर्वक बताया। जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी डॉ. मोनिका बिसेन ने जिला महिला सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत संचालित योजनाओं तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के विधिक सहायता अधिकारी श्री सोमनाथ राय ने जिले में संचालित सभी योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा।
(7 days ago)
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