समाचार
|| लेखापाल डाईट की एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्यवाही || आम आदमी को उसका हक मिलना चाहिए-श्री कोष्टा || गर्भवती माता एवं बच्चों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित || फसलों के उन्नत बीज बिक्री की दरें एवं अनुदान निर्धारित || विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के संबंध में निर्देश जारी || इंसान का जन्म लिया है तो प्राब्लम तो होनी ही है "कहानी सच्ची है" || लू से सावधानी से बचा जा सकता है - कलेक्टर डॉ. जे विजय कुमार || कलेक्टर ने 4 लाख रूपये की सहायता राशि स्वीकृत की || विद्युत विभाग के अधिकारियों को दिये गये निर्देश || आबकारी अधिकारी को दिये गये निर्देश
अन्य ख़बरें
आस्था के फूलों की जैविक खाद “कहानी सच्ची है”
-
ग्वालियर | 17-मई-2018
  
   शहर के मंदिरों में भगवान को अर्पित होने वाले सुगन्धित फूलों से बहुउपयोगी जैविक खाद का निर्माण नगर निगम ग्वालियर द्वारा किया जा रहा है। पर्यावरण सुधार के लिए नगर निगम द्वारा किए जा रहे इस नवाचार से जहां पर्यावरण सुधार के प्रयास तेजी से हो रहे हैं वहीं लोगों की आस्था का सम्मान हो रहा है, अभी भगवान को अर्पित जो पुष्प कचरे में, सडक किनारे फेंक दिए जाते थे, जिनसे गंदगी होती थी अब उनसे जैविक खाद का निर्माण हो रहा है तथा यही जैविक खाद विभिन्न साक-सब्जियों, फसलों एवं पुष्पों के अच्छे उत्पादन का जरिया बन रही है।
   ग्वालियर वैसे तो कई विशेषताओं के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, लेकिन ईश्वर के प्रति आस्था एवं नवाचारों के क्रम में आगे रहने की चाहत ने शहर में अनेक ऐसे नवाचार प्रारंभ हुए हैं जिनकी सराहना देश भर में हो रही है। इसी कडी में स्वच्छ ग्वालियर के लिए प्रारंभ किए गए विभिन्न नए नए कार्यों में भगवान को अर्पित होने वाले पुष्पों से जैविक खाद बनाने का कार्य भी शामिल हो गया है।
शहर के विभिन्न बडे बडे मंदिरों से निकलने वाले फूल ज्यादातर डस्टबिन, सडक, नाले आदि में फेंक दिए जाते थे, जिससे लोगों की धार्मिक आस्थाओं को ठेस पंहुचती थी। पूजा के फूलों का अपमान होता था, जिनको गायें खाकर बीमार होती थी, क्योंकि फूल मालाओं में प्लास्टिक, चमक वाली पन्नी का उपयोग किया जाता है। अब मंदिरों से निकलने वाले अनुपयोगी फूलों का प्रतिदिन उठाने से न केवल मंदिरों में स्वच्छता रहती है बल्कि स्वच्छ वातावरण का निर्माण होता है।
   शहर के 10 प्रमुख मंदिरों से पूजा के बाद निकलने वाले लगभग 700 किलो फूलों का प्रति सप्ताह संग्रहण किया जाता है तथा फूलों से वैज्ञानिक तरीके से लगभग 200 किलो जैविक खाद प्रति सप्ताह तैयार किया जा रहा है। जिससे एक माह में 8 हजार तथा 1 वर्ष में 96000 रुपए की आय संभावित है। यह तो एक शुरुआत है, यह उपयोग शहर के सभी मंदिरों में किया जाएगा तो आय तो कई गुना बढेगी ही, साथ ही लोगों की आस्था भी इस जैविक खाद में बनी रहेगी।   
   फूलों से बनी जैविक खाद का उपयोग किचन गार्डन, गमले के पेड पौधों में एवं बागवानी के लिए किया जा सकता है। इस प्रकार के नवाचार से जहां शहर को गंदगी से निजात मिल रही है वहीं आय के नए स्रोत तैयार हो रहे हैं।
(9 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
अप्रैलमई 2018जून
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
30123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
28293031123
45678910

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer