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कोरोना काल में समूह से ऋण लेकर चुकाई पति के आटो रिक्शा की किस्त ‘‘सफलता की कहानी’’
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अनुपपुर | 06-मार्च-2021
    बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद शादी के बंधन में बंध कर पारिवारिक जिम्मेदारियों को घर की चार दीवारी के अंदर निभाने वाली राधा मिश्रा आज आत्मविश्वास के साथ न सिर्फ स्वयं किराना दुकान का संचालन कर रही हैं, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियो को पूरा करने के लिए अपने पति के साथ भी हर पल खड़ी नजर आती हैं।
अनूपपुर जिले के कोतमा विकासखंड के ग्राम बगैहाटोला की रहने वाली राधा मिश्रा महिला स्व सहायता समूह से जुड़ने के पूर्व एक सामान्य गृहिणी की तरह अपना जीवन यापन कर रही थीं। बच्चों की देखरेख, उनकी पढ़ाई-लिखाई, घर परिवार के लिए खाना बनाना, बस यही थी राधा की जिंदगी। देखते-देखते अठारह साल कैसे निकल गये, कुछ पता ही नहीं चला। उनके पति संतोष मिश्रा आटो चलाने का कार्य करते थे, जिससे परिवार का पालन पोषण होता था।
किराना दुकान का सफल संचालन
जय भोले बाबा आजीविका स्व सहायता समूह से वर्ष 2018 में जुड़ने के बाद राधा का घर से बाहर निकलना प्रारंभ हुआ और समूह की गतिविधियों में शामिल होकर उन्हें ऐसा लगा कि वह खुद भी कुछ कर सकती हैं। हिम्मत करके उन्होंने समूह से 5000 रू का ऋण लेकर अपने घर के ही एक कमरे में किराना दुकान की शुरूआत की और प्रतिदिन 200 से 250 रूपये तक की कमाई कर लिये गये कर्ज की पूरी राशि ब्याज सहित 10 किस्तों में अपने समूह को जमा कर दी। इससे उनके अंदर आत्मविश्वास जागा और उन्होंने किराना दुकान के लिए आजीविका मिशन के माध्यम से मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना से 50000 रुपये की मांग की। किराना दुकान के प्रति राधा की लगन और मेहनत को देखते हुये म.प्र.ग्रामीण बैंक कोतमा द्वारा राधा को मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना के अंतर्गत 50000 रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया, जिसमें 15000 रुपये का अनुदान भी शामिल है। इससे राधा के आत्मविश्वास को और संबल मिला और वह अपनी दुकान में पूरी लगन से जुट गयीं। इसका परिणाम भी दिखने लगा और दुकान में प्रतिदिन 700 से 1000 रूपये तक की बिक्री होने लगी।
समूह से ऋण लेकर अदा की पति के आटो रिक्शा की किस्त
   कोरोना के कारण लाकडाउन के चलते आटो संचालन कार्य पूरी तरह से बंद हो चुका था। पति संतोष मिश्रा के पास कर्ज में लिये गये आटो रिक्शा की किस्त चुकाने के लिए पैसा नहीं था। ऐसे में राधा ने अपने समूह से 25000 रुपये लेकर आटो रिक्शा की किस्त जमा कराई एवं पति एवं परिवार को संकट से उबारा।
   धीरे-धीरे स्थितियां सामान्य हुयीं और आटो रिक्शा संचालन का कारोबार पुनः अच्छा चलने लगा, जिससे प्रतिदिन 500 से 700 रूपये की आमदनी होने लगी। आटो से औसतन महीने भर में 14000 से 15000 रूपये की आमदनी हो जाती है। वर्तमान में आटो का पूरा कर्ज चुकाया जा चुका है और बैंक से ली गई कर्ज की राषि मात्र 12000 रुपये ही शेष है, जो प्रतिमाह किस्त के रूप में जमा की जा रही है।       
   मिशन से जुड़ने के बाद समूह से ऋण लेकर किराना दुकान का संचालन करने के साथ-साथ राधा मिशन अंतर्गत सीआरपी के रूप में सोशल आडिट का कार्य एवं वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण भी ब्लाक स्तर पर दे रही हैं। इससे प्राप्त होने वाले मानदेय से उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है। पति के आटो संचालन, स्वयं की किराना दुकान आदि से परिवार की कुल आय 15 से 18 हजार रू प्रतिमाह हो रही है, जिससे परिवार का पालन पोषण एवं बच्चों की परवरिश अच्छी तरह हो रही है। 
(44 days ago)
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