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आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी रजनी सराठे “खुशियों की दास्तां”
72 से अधिक महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में कर रही हैं मदद
नरसिंहपुर | 08-मार्च-2021
     जिले के करेली विकासखंड के ग्राम जोबा के नर्मदा स्वसहायता समूह की सचिव श्रीमती रजनी सराठे ने आजीविका मिशन के स्वसहायता समूह से जुड़कर 10 रूपये साप्ताहिक बचत से अपना सफर शुरू किया था। समूह से जुड़कर कृषि एवं पशु पालन की गतिविधियों के माध्यम से अब उनकी मासिक आमदनी लगभग 18 हजार रूपये तक हो गई। वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हो चुकी हैं, बल्कि जोबा और अन्य ग्रामों में गरीब परिवारों की 72 से अधिक महिलाओं को 7 स्वसहायता समूह से जोड़ चुकी हैं। वे विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद भी कर रही हैं।
         10 वीं तक शिक्षित रजनी सराठे के परिवार की आर्थिक स्थिति मध्यम होने के कारण शीघ्र उनका विवाह निजी बैंक में गनमैन की नौकरी करने वाले जोबा निवासी रविशंकर सराठे से हो गया। पति की आमदनी कम होने से उन्हें पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उनके यहां बहुत कम कृषि भूमि थी। खेती के लिए ब्याज पर पैसा लेकर लगाना पड़ता था। इसके बाद रजनी आजीविका मिशन के स्वसहायता समूह से जुड़ी। उन्होंने 10 रूपये साप्ताहिक बचत से शुरूआत की और छोटे- बड़े ऋण लेकर परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद की। उन्होंने समूह से पहले 2500 रूपये का ऋण और बाद में ग्राम संगठन से 90 हजार 500 रूपये का ऋण लिया। पैसे को कृषि कार्य के साथ सब्जी उत्पादन और पशु पालन में लगाया। इससे उन्हें अब हर माह लगभग 18 हजार रूपये तक की आमदनी हो जाती है।
         रजनी सराठे बताती हैं कि मैंने निश्चय किया है कि गरीब परिवारों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की जाये। अब तक मैं जोबा और आसपास के ग्रामों में 72 से अधिक महिलाओं को स्वसहायता समूह से जोड़ चुकी हूं। वे विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले परिवार की आमदनी कम होने के कारण हमें बहुत चिंता लगी रहती थी। बच्चों की पढ़ाई के बारे में हम चितिंत रहते थे। अब बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। मेरा एक बेटा और एक बेटी है। मैं गांव के अन्य बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हूं। रजनी ने कृषि, पशु पालन, समूहों एवं ग्राम संगठन आदि के संबंध में भोपाल, नरसिंहपुर, करेली व बघुवार में प्रशिक्षण लेकर महिलाओं को जागरूक किया है। वे वर्तमान में ग्राम संगठन की बुककीपर का कार्य भी कर रही हैं। इसके लिए उन्हें मानदेय मिलता है।
         रजनी सराठे सामाजिक बदलाव के लिए भी प्रतिबद्ध है। ग्राम बघुवार में शराब बंदी के अभियान में वे सहभागी रही हैं।
         रजनी सराठे कहती हैं कि मध्यप्रदेश सरकार ने आजीविका मिशन की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का जो बीड़ा उठाया है, वह सराहनीय है।

(35 days ago)
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