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हिम्मत नही हारी तो बन गई नाजीर "खुशियो की दास्तां"
महिलाओ की प्रेरणास्त्रोत बनी रजमिलान कालेज की प्रोफेसर रीना शर्मा
सिंगरौली | 10-मार्च-2021
     मै अबला नादान नही। दबी हुई पहचान नही हू। मै स्वाभिमान से जीती हू रखती अंदर खुद्दारी हू मै आधुनिक नारी हू। ये पक्तिया प्रोफेसर डॉ. रीना शर्मा के सघर्षमय जीवन पर सटीक बैठती है। क्योकि उन्होने सघर्षो के लबे दौरे का जन्म लेने के बाद से सामना किया। वह खुद बताती है कि नारी होने का हर्जाना वह बचपन से भुगत रही है। उन्होने बताया कि डेढ़ वर्ष की उम्र मे माता का साया उनके जीवन से छिन गया।क्योकि उनके पिता एवं दादी की चाहत लड़के की थी इसी चक्कर मे उनसे पहले चार बहने हो चुकी थी।इनके बाद इनका जन्म हुआ फिर सबसे बाद एक भाई का  जन्म हुआ।
   प्रोफेसर डॉ. शर्मा ने बताया कि उनके  पिता सतना स्थिति सीमेंट फैक्ट्री मे काम करते थे।इसलिए उनका ज्यादातर समय ड्यूटी मे ही बीतता था। लेकिन घर पर उनके दादी रवैया उनके प्रति इतना खराब था कि बीमार होने पर भी वे पिता जी को ईलाज नही कराने देती थी। उन्होने इसका कारण बताया कि उनके पैदा होने के पहले दादी को बताया गया था कि इस बार पोता पैदा होगा लकिन पॉचवी बार  लड़की रूप मे मै पैदा हो गई।इसलिए दादी उन्हे बचपन से ही पसंद नही करती थी। इसी बीच बच्चो के परवरिस के खातिर पिता जी ने दूसरी शादी कर ली। रीना बताती है कि उनकी मॉ दिल्ली एवं पिता जी हरियाणा से थे।
         प्रो. रीना ने बताया कि बचपन मे ही उनकी पड़ने मे रूचि थी लेकिन दूसरी मॉ ने उनकी पढ़ई बंद करादी। उन्होने बताया कि जब वह सरकारी स्कूल मे कक्षा 3 मे थी तो एक बार उनके पढ़ाई को लेकर तारीफ हुई और यह बात उनकी दूसरी मॉ को नागवार गुजरी। उन्होने खुद की प्रेगनेसी का कारण बताकर  मुझे स्कूल नही जाने के लिए पिता जी राजी कर लिया। रीना के विवाह के 10 वर्ष बाद उनके पति की मौत हो गई।प्रोफसर रीना ने बताया कि वर्ष 2002 मे से सुरू हुई उनकी षिक्षा यात्रा  नेषनल ओपन से दसवी फिर इग्नू से यूजी,पी,जी और पीएचडी रानी दुर्गावती विष्वविद्यालय जबलपुर से एमफिल की पढ़ाई पूर्ण की।
        अखबार की खबर ने बदली रीना की जिंदगीः- केटरिंग सर्विस के दौरान रीना की नजर रोटी पैक करने वाले अखबार के एक टुकड़े पर पड़ी जिसमे खबर छपी थी कि पढ़ाई छूटने वाली महिलाये सीधे 10 वी की परीक्षा ओपन बोर्ड से दे सकती है। जिसे पढ़कर रीना ने 10 वी की परीक्षा देने का मन बनाया और यह परीक्षा पास भी करली। इसी बीच उन्हे इग्नू के बीए कोर्स मे एडमीशन मिल गया। इसके लिए उन्हे एक परीक्षा पास करनी पड़ी। इसके बाद तो उन्हे पढ़ाई का जूनून सवार हो गया।और फिर एम.ए हिन्दी मे पूर्ण किया। इसके बाद उन्होने एमपी पीएससी की तैयारी सुरू की और प्री स्टेप क्वालिफाई कर लिया लेकिन ओवर ऐज होने के कारण अवसर नही मिल सका। फिर भी उन्होने पढ़ाई से अपना नाता नही तोड़ा जबलपुर से एमफिल की पढ़ाई पूर्ण की। तथा सतना कालेज मे एडहाक पर पढाने का अवसर प्राप्त नही हुआ। वह धीरे धीरे आगे बड़ती रही और आज प्रोफेसर रीना शर्मा सिंगरौली जिले मे शासकीय कालेज रजमिलान मे बतौर असिस्टेट  प्रोफसर सेवाये दे रही है।
 
(107 days ago)
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