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ग्राम सोजना के ग्रामीण युवक ने शुरू की मशरूम की जैविक खेती, अन्य युवाओं को भी बना रहा है आत्मनिर्भर (खुशियों की दास्तां)
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रायसेन | 29-मार्च-2021
   रायसेन जिले के दीवानगंज से महज 9 किलोमीटर दूरी पर कर्क रेखा के पास बसे छोटे से ग्राम सोजन के युवक मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इसके साथ ही अन्य लोगों को मशरूम की खेती का भी प्रशिक्षण दे रहे हैं जिससे वे अन्य युवकों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत बन गए है। ग्राम सोजन के युवक रामबाबू मीणा द्वारा बहुत कम संसाधन और जगह के अभाव को भी अवसर में बदलते हुए मशरूम की खेती कर अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा रहा है। रामबाबू मशरूम की जैविक खेती घर के 10 वाए 10  की जगह में करते हुए प्रति माह 18 से 20 हजार रूपए तक कमा रहे है। उन्होंने मशरूम का फुटकर विक्रय करने के साथ साथ मशरूम पाउडर का प्रोडक्ट भी तैयार कर लिया है, जिसकी धीरे धीरे ही सही पर बाजार में मांग  बढऩा शुरू हो गई है। रामबाबू ने बताया कि उनके एमबी मशरूम फार्मिंग प्रोडक्ट को पेटेंट भी जल्द मिलने वाला है, जिससे वो अपने प्रॉडक्ट की देश के बड़े शहरों में भी सप्लाई करना शुरू करेंगे।
 रामबाबू मीणा ने बताया कि युवाओं को आत्मनिर्भर किए जाने की दिशा में काम करते हुए मशरूम की जैविक खेती करने का वो प्रशिक्षण भी दे रहे है और उनसे प्रशिक्षित होकर बेयरखेड़ी, पाथरिया, सिलवानी के युवकों ने भी मशरूम की जैविक खेती करना शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती काफी फायदेमंद है और कई युवा मशरूम की खेती करने के प्रति प्रेरित भी हो रहे है। मशरूम की खेती से ग्रामीण युवकों को गांव में ही रोजगार मिलने के साथ ही वो अच्छी खासा मुनाफा भी घर में ही कमा सकते है।  रामबाबू मीणा ने बताया कि पहले वह एक एनजीओ में नौकरी करते थे और अब गांव में ही मशरूम की खेती करते हुए अन्य युवाओ को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांव में ही मशरूम की खेती करने के लिए प्रेरित करते हुए प्रशिक्षण देते है।

 
(38 days ago)
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