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दिव्यांग लक्ष्मण दीक्षित को मिला रोजगार (सफलता की कहानी)
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मुरैना | 01-अप्रैल-2021
   शुक्ला कॉलोनी मुरैना निवासी दिव्यांग श्री लक्ष्मण पुत्र श्री गिरवर दास दीक्षित के दिन अब फिर गये है, क्योंकि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा ई-रिक्शा की चाबी जो भेंट की, अब वह दिव्यांग होकर के भी रोजगार कर सकेगा।       
    श्री लक्ष्मण दीक्षित पुत्र श्री गिरवर दास मुरैना के ग्राम दीखतपुरा के निवासी थे, किन्तु दिमाग में 8 साल पूर्व ब्रेनटूवर होने के कारण हाथ पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। इस कारण पिता ने भी घर में रखना उचित नहीं समझा और उन्हें तीन भाईयों में से दो भाईयों को जमीन जायदात का वारिस बना दिया। लक्ष्मण दीक्षित को घर से बेदखल कर दिया। लक्ष्मण दीक्षित को जब परिवार का सहयोग नहीं मिला तो उसने शहर का रास्ता पकड़ लिया। मुरैना शहर में आकर उसने दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में कुछ समय रहकर अपना दिन व्यतीत किया। अपने रिश्तेदारों की मदद से अपनी पत्नि, दो छोटे-छोटे बच्चों को लाकर शुक्ला कॉलोनी मुरैना में रहने लगा। दिमाग की हालत थोड़ी ठीक होने को आई तो उसने शहरी आजीविका मिशन के सौजन्य से बैंक द्वारा ई-रिक्शा स्वीकृत कराया गया। ई-रिक्शा स्वीकृत होने के बाद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रोशन कुमार सिंह ने जब ई-रिक्शा की चाबी और गुलदस्ता लक्ष्मण दीक्षित को भेंट किया, तब मन ही मन कहने लगा कि पिता व भाई ने तो साथ नहीं दिया, किन्तु शासन जरूर दिव्यांगों का सहयोग कर रहा है। जिसके तहत आज मुझे ई-रिक्शा मिला है। अब मैं अपने दो मासूम बच्चों का लालन-पालन, पोषण कर सकूंगा।   
(41 days ago)
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