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औषधीय फसल अश्वगंधा की खेती बुरहानपुर जिले के ग्राम बसाड़ सहित अन्य क्षेत्रों में "खुशियों की दास्ताँ "
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बुरहानपुर | 05-अप्रैल-2021
 
   मध्य प्रदेश राज्य में खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ अन्य औषधीय फसलों का भी उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान परिदृश्य के बदलते स्वरूप के अनुसार जहां एक ओर चिकित्सा पद्धति अपने नये-नये नवाचारों के साथ आगे बढ़ रही है। वही आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति उपचार भी अपनी अलग पहचान बनाये हुए है। भारत में पारंपरिक रूप से अश्वगंधा का उपयोग आयुर्वेदिक उपचार के लिए किया जाता है। इसके साथ ही इसे नगदी फसल के रूप में भी उगाया जाता है। इसके पौधें सीधे, एवं झाड़ीनुमा होते है।
महाराष्ट्र सीमावर्ती जिला जो मुख्तः केला उत्पादन के लिए जाना जाता है अर्थात बुरहानपुर जिले को केला उत्पाद जिला भी कहा जाता है। जिले में जैविक खेती के साथ-साथ अब औषधीय फसलें एक नवाचार के रूप में प्रारंभ होती नजर आ रही है। किसानों द्वारा धरती की उर्वरकता का सही उपयोग करके नवाचार अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की राह खोजी जा रही है। हम बात कर रहे है बुरहानपुर जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर छोटे से गांव बसाड़ की, जहां औषधीय फसल के रूप में अश्वगंधा की खेती की जा रही है। जिले में यह अश्वगंधा की पहली खेती मानी जा रही है।
    बसाड़ निवासी कृषक श्री नाना दगडू पाटिल ने बताया कि जिले में पारंपरिक फसलों के अलावा अब औषधीय फसलों की खेती भी किसानों द्वारा अपनायी जा रही है। सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन परियोजना (आत्मा) के द्वारा जिले में नवाचार के तहत कृषकजनों को अश्वगंधा की खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिले में ग्राम बसाड़ सहित खकनार, चांदनी, नेपानगर, फोफनार, निम्बोला इत्यादि क्षेत्रों में औषधीय फसलों की खेती नवाचार के रूप में की जा रही है।
आत्मा द्वारा कृषकजनों को औषधीय फसलों के लिए तकनीकि ज्ञान एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। बसाड़ निवासी श्री पाटिल ने बताया कि आत्मा विभाग के मार्गदर्शन में मेरे द्वारा 2 एकड़ जमीन पर अश्वगंधा की खेती की जा रही है। जिससे मुझें अनुमान है कि 4 से 4.5 क्विंटल जड़ मिल सकती है। वहीं अश्वगंधा की पत्ती और बीज भी उपयोगी होता है। मैंने आत्मा विभाग की ओर से गुजरात में औषधीय फसलों के विषय में प्रशिक्षण लिया। वहां से आने के बाद मैंने अश्वगंधा बोने का विचार बनाया। उन्होंने बताया कि बुरहानपुर जिले में यह फसल पहली बार बोई गयी हैं। यदि बोई गयी फसल से 4 से 4.5 क्विंटल उत्पादन होता है तो आज के बाजार मूल्य के अनुसार प्रति क्विंटल 30 से 35 हजार रूपये के रूप में मुनाफा मिलेगा। जो कि मेरे लिए लाभ की खेती सिद्ध होगी।
 
(37 days ago)
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