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कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु न्यायालयों की व्यवस्थाओं में बदलाव किया
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खण्डवा | 08-अप्रैल-2021
    कोविड-19 संक्रमण के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खण्डवा जिले की न्यायालयों में व्यवस्था में कुछ परिवर्तन किए गए है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री एल.डी. बौरासी द्वारा जारी आदेश अनुसार जिला न्यायालय खण्डवा के साथ साथ तहसील हरसूद, पुनासा व मांधाता की सिविल न्यायालयों में भौतिक सुनवाई के साथ साथ वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था लागू की जा रही है। प्रत्येक न्यायालय द्वारा अब प्रत्येक कार्य दिवस में उतने ही प्रकरण सुनवाई के लिए लिए जायेंगे, जिनमें कि दोपहर 2 बजे तक सुनवाई सुनिश्चित की जा सके और न्यायालयों में अनावश्यक भीड़भाड़ की स्थिति न रहे। अभिभाषकों से अपेक्षा की गई है कि वे इस तरह उपस्थित हो कि प्रातः 11 बजे से न्यायालयीन कार्य प्रारंभ हो सके।
50 वर्ष से अधिक उम्र के अभिभाषक वीसी के माध्यम से तर्क दे सकेंगे
50 वर्ष या इससे अधिक आयु के अभिभाषकों को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान तर्क किए जाने की स्वतंत्रता रहेगी, किन्तु वे इसके लिए एक दिन पूर्व संबंधित न्यायालय में फोन से समय निश्चित कर लें। न्यायालयों में सुनवाई के लिए तय प्रकरणों की कॉज लिस्ट प्रत्येक दिन डिस्प्ले स्क्रीन पर निरतंर प्रदर्शित की जायेगी। पक्षकारों व अभिभाषकों को एसएमएस के माध्यम से उनके मामलों की सुनवाई संबंधी सूचना भी देने की व्यवस्था की जायेगी।
अत्यावश्यक होने पर ही अभियुक्त को न्यायालय बुलाया जायेगा
जिन मामलों में अभियुक्त को न्यायालय में उपस्थित रहना आवश्यक है, उनमें अभियुक्त को न्यायालय के प्रवेश द्वार पर सुनवाई की अवधि तक के लिए प्रवेश दिया जाये। जिन मामलों में अभियुक्त की उपस्थिति आवश्यक नही है ऐसे प्रकरणों में अभियुक्त की हाजरी माफी संबंधी आवेदन देने की आवश्यकता नही होगी। जब तक न्यायालयीन आदेश अनुसार अभियुक्त की उपस्थिति अनिवार्य न हो तब तक कारागार में निरूद्ध अभियुक्त की उपस्थिति वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से ही मान्य की जायेगी।
स्टाम्प वेण्डर व दस्तावेज लेखकों का न्यायालय में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा
न्यायालय परिसर में स्टाम्प वेण्डर व दस्तावेज लेखकों के प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। न्यायालयों में सुनवाई के दौरान पक्षकारों के साथ उनके रिश्तेदार या मित्रों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध रहेगा। ऐसे न्यायाधीश, अभिभाषक व लिपिक वर्गीय कर्मचारी तथा पक्षकार जिन्हें कि क्वारेंटिन या होम आइसोलेशन में रहने की सलाह डॉक्टर्स द्वारा दी गई है, वे न्यायालय नही आ सकेंगे।
बुखार या फ्लू से ग्रसित व्यक्ति न्यायालय में प्रवेश नही कर सकेंगे
बुखार या फ्लू से ग्रसित कोई भी व्यक्ति न्यायालयों में प्रवेश नही कर सकेगा। न्यायालय में उपस्थित होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को फेस मास्क लगाना अनिवार्य होगा। न्यायाधीश, अभिभाषकगण व न्यायालयीन कर्मचारी गेट क्रमांक 3 से प्रवेश पा सकेंगे। जबकि  अभिभाषकगणों के कर्मचारी, पक्षकार व साक्षी गेट क्रमांक 1 से प्रवेश पा सकेंगे। न्यायालय के प्रवेश द्वार पर सेनेटाइजर, थर्मल स्केनर की व्यवस्था भी की जायेगी। उपभोक्ता फोरम भवन की ओर से आने वाले अनाधिकृत व्यक्तियों पर सख्त कार्यवाही की जायेगी। ऐसे अभिभाषकगण जिन्हें नोटरी व शपथ आयुक्त का कार्य न्यायालय परिसर में करना पड़ता है, वे अपना यह कार्य प्रातः 10:30 से 11:30 तथा दोपहर 2 से 2:30 तथा अपरान्ह 4 से 5 बजे के बीच ही करेंगे, ताकि अनावश्यक भीड़ भाड़ न हो। न्यायालय परिसर में रेस्टोंरेंट व फोटो कॉपी की दुकानें पूर्णतः बंद रहेगी।
65 वर्ष से अधिक आयु के वकील व गवाह एप के माध्यम से अपना पक्ष रख सकेंगे
  जारी आदेश में 65 वर्ष से अधिक आयु के अभिभाषक, पक्षकारगण व साक्षीगण को यह छूट दी गई है कि वे संक्रमण से बचाव के लिए न्यायालय न आएं बल्कि गूगल मीट जैसे एप के माध्यम से संबंधित न्यायालय से जुड़कर अपने निवास या कार्यालय से ही अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकते है। न्यायालय परिसर में किसी भी प्रकार के भोज कार्यक्रम की अनुमति नही मिलेगी। सिविल एवं दाण्डिक मामलों में 5 वर्ष से अधिक पुराने प्रकरण प्राथमिकता से सुने जायेंगे। सभी प्रकार के जमानत संबंधी आवेदन पत्र, अभियोग पत्र, केस, डायरी, दोपहर 1:30 बजे तक न्यायालय में प्रस्तुत करना होंगे।
 
(5 days ago)
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