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कोरोना काल में भी जिले के नन्हे बालक प्रवीण के चेहरे को मिली मुस्कान "दास्तां खुशियों की"
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छिन्दवाड़ा | 09-अप्रैल-2021
 
    घर में जब नन्हा मेहमान आता है तो उसकी प्यारी मुस्कुराहट पूरे घर और परिजनों को खुशियों से भर देती है, लेकिन कई बार किसी जन्मजात विकृति के कारण बच्चे के चेहरे की मुस्कान कहीं खो जाती है। ऐसे बच्चों की मुस्कान को वापस लौटाने में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और उसकी टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जन्मजात विकृतियों से ग्रसित बच्चों की नि:शुल्क सर्जरी और उपचार द्वारा आरबीएसके जरूरतमंद परिवारों और उनके बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना का लाभ जिले के बिछुआ विकासखंड की आरबीएसके के डॉ.दुर्गेश मराठा और उनकी टीम के सहयोग से जिले के 5 वर्षीय बालक को कोरोना काल में मिला है और आज उसकी मुस्कान वापस लौट आई है जिससे उसके परिजनों के चेहरे भी खिल उठे हैं और वे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिये शासन और बिछुआ विकासखण्ड की टीम को धन्यवाद दे रहे हैं।

      कोरोना वैश्विक महामारी में विकासखण्ड बिछुआ की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम विगत वर्ष मार्च 2020 से निरतंर रेपिड रिस्पांस टीम, मेडिकल मोबाईल यूनिट, कोरोना काम्बेट टीम के रुप में काम करते हुए विकासखण्ड बिछुआ के गांव-गांव जाकर ग्रामीणों व बाहर से आए हुए लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण का कार्य कर रही है। साथ ही आरबीएसके टीम द्वारा लगातार सैंपल कलेक्शन कर चिन्हित लोंगो को छात्रावास/होम क्वारेनटाईन करवाने एवं प्राथमिक उपचार प्रदान करने का कार्य भी किया जा रहा है। कोरोना काल में सौंपे गये नवीन दायित्वों के निर्वहन के साथ ही आरबीएसके टीम द्वारा अपने मूल कार्य को भी पूरी निष्ठा से किया जा रहा है। आयुष मेडिकल ऑफीसर (आर.बी.एस.के.) डॉ. दुर्गेश मराठा ने बताया कि इसी दौरान बिछुआ विकासखण्ड के ग्राम आमाझिरी कला के सेमरटोला में ननिहाल आया बालक प्रवीन पिता संतोष आटकोम जिसकी उम्र 5 साल थी, खेलते हुए मिला। वह कटा-फटा होंठ और कटा-फटा तालू की जन्मजात विकृति से पीडित था। जैसे ही मेडिकल ऑफीसर डॉ.मराठा की नजर बालक पर पड़ी, उन्होंने बालक की मां और नाना को बुलवाकर ऑपरेशन की समझाईश दी। आदिवासी अंचल से होने व परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पहले परिवार द्वारा ऑपरेशन से मना कर दिया गया। डॉ. मराठा द्वारा बहुत समझाने व नि:शुल्क परिवहन व ऑपरेशन के बारे में जानकारी देने पर परिजन ऑपरेशन कराने के लिये तैयार हुए। इसके बाद लेक सिटी अस्पताल भोपाल से संपर्क किया गया और वहां के पी.आर.ओ. को छिन्दवाडा बुलवाया गया। सेमरटोला से नि:शुल्क जननी एक्सप्रेस वाहन द्वारा बच्चे को छिन्दवाडा पहुंचाया गया और वहां से पी.आर.ओ. के माध्यम से लेक सिटी अस्पताल भेजकर 23 दिसंबर 2020 को भर्ती कराया गया। जहां 24 दिसंबर  2020 को प्रवीण के दो ऑपरेशन क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलट का सफल ऑपरेशन  हुआ। परिणामस्वरूप नन्हें प्रवीण को जन्मजात विकृति से निजात मिली है और उसकी मुस्कान लौट आई है।

     उल्लेखनीय है कि छिन्दवाड़ा जिले के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के सभी चिकित्सक इस कोरोना महामारी में कोरोना वारियर्स का काम करते हुए भी अपना मूल काम राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत ऑपरेशन करवा रहे हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएसके बाल स्वास्थ्य जांच और शिक्षा प्रदान करने संबंधी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम का लक्ष्य बच्चों में मौजूद 30 चयनित स्वास्थ्य स्थितियों, चार दोषों अर्थात जन्म के समय दोषों, कमियों, रोगों और विकलांगता समेत विकासात्मक विलंब का जल्दी पता लगाना और उनका उपचार करना है। जन्म के समय से 18 वर्ष की उम्र तक के सभी बच्चों को आरबीएसके के तहत शामिल किया गया है। जन्मजात विकृतियां होने के कई कारण है और इनकी वजह से शिशु में शारीरिक विकृति हो जाती है, इनमें से कुछ जन्म के समय नजर आने लगती हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ऐसे बच्चों को सहायता प्रदान किए जाने की सुविधा उपलब्ध है। इन्हीं में से एक जन्मजात विकृति फटे होंठ और तालू हैं। फटे होंठ का मतलब शारीरिक विभाजन या ऊपरी होंठ का दो भागों में विभाजन और फटे तालू का मतलब मुंह के ऊपरी भाग में दरार होना है। इसमें बच्चे को नाक के जरिए खाद एवं तरल पदार्थ का बाहर निकलने, चूसने में कठिनाई और आवाज निकलने में समस्या होती है। फटे होंठ और तालू को समय पर सर्जरी करके ठीक किया जा सकता है। विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ.नीलेश सिडाम द्वारा विकासखंण्ड बिछुआ के सभी ग्रामीणों से अपील की गई कि इस प्रकार के जन्म से 18 वर्ष तक के किसी भी बच्चे को कोई भी परेशानी होने पर आयुष मेडिकल ऑफीसर (आरबीएसके) डॉ. मराठा, डॉ. बालगोविन्द पन्द्रे, डॉ.प्रिंयका ठाकुर से संपर्क अवश्य करें। जिले के सभी नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि ऐसा कोई लक्षण देखें तो तत्काल विकासखण्ड आरबीएसके टीम से संपर्क जरूर करें।
 
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