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स्व-सहायता समूह की महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर "खुशियों की दास्तां"
स्व-सहायता समूह को कोरोना काल में मिला है एक करोड़ 20 लाख रूपये का काम, छात्र-छात्राओं के गणवेश तैयार कर रही महिलाएं
सीहोर | 20-अप्रैल-2021
 
           आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने की पहल में स्व-सहायता समूह की महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मध्यप्रदेश ग्रामीण डे-आजीविका परियोजना के तहत गठित स्व-सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जा रहा है। स्व-सहायता समह की महिलाओं को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। जिला प्रशासन स्थानीय स्तर पर स्व-सहायता समूहों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है।

      सीहोर जनपद के संकुल स्तरीय स्व-सहायता समूह रानी दुर्गावती संघ को 150 महिलाओं को सीहोर के सरकारी स्कूलों के 53400 छात्र-छात्राओं के गणवेश बनाने का 1 करोड़ 20 लाख रूपये का काम दिया गया है। समूह की प्रत्येक महिला सदस्य को 8000-10000 हजार रुपये महीना मिलेगा। गणवेश की सिलाई गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरी की जा सके, इसके लिए इन महिलाओं को पूर्व में सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया है।  

      समूह की अध्यक्ष धापू बाई मालवीय, सदस्य राधा बाई, गोकुल बाई, रितु तथा सुनीता कहती हैं कि इस कोरोना काल में कोराना कर्फ़यू के दौरान आर्थिक गतिविधियां सीमित रूप में चल रही हैं ऐसे में समूह को एक करोड़ 20 लाख रूपये का काम मिलना बहुत महत्वपूर्ण है। इस काम से समूह की महिलाओं को न केवल घर परिवार चलाने में मदद मिलेगी, बल्कि आर्थिक रूप से आत्म निर्भर भी होंगे। इन महिलाओं ने बताया कि गुणवत्ता पर हमारा विशेष ध्यान है। गणवेश के लिए अच्छी गुणवत्ता के कपड़े तथा सामग्री का उपयोग कर रहे हैं।
देवेन्द्र ओगारे
सहायक संचालक, जनसम्पर्क
(26 days ago)
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