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गेहूं उत्पादन के साथ साथ उसका सुरक्षित भंडारण करना भी एक महत्वपूर्ण पहलू-डॉ केएस यादव
भंडारण के समय अपनाने हेतु विधियां एवं सावधानियां
सागर | 21-अप्रैल-2021
   कृषि विज्ञान केंद्र सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ केएस यादव ने बताया है कि गेंहू उत्पादन के साथ साथ उसका सुरक्षित भंडारण करना भी एक महत्वपूर्ण पहलू हैं। गेंहू में तापमान एवं नमी की अधिकता, वैगयानिक एवं तकनीकी युक्त जानकारी का आभाव , चूहों तथा भंडारण के दौरान लगने वाले विभिन्न कीट जैसे खपरा बीटल, सूंडी, चावल का घुन से सुरक्षा न कर पाना , अनाज की साफ सफाई, ग्रेडिंग का अभाव, आदि कई ऐसे कारक है जिसके कारण हर वर्ष लाखो टन गेंहू खराब हो जाता है। यहाँ पर हमारे किसान भाईओ के लिए भंडारण के दौरान अपनाई जाने वाली कुछ विधियों एवं सावधानियों को बताया जा रहा है। जिसे किसान भाई अपनाकर गेहूं का साफ एवं स्वच्छ भंडारण कर सकते है।

खाली पुरानी बोरियो को एवं भंडारण पात्रो आदि को 1 प्रतिशत मेलाथियान से उपचारित कर धूप में सुखाकर उनमें भंडारण करना चाहिये।
दालों में 10 प्रतिशत तथा अनाज में 11 से 12 प्रतिशत से जियादा नमी न होना चाहिए।
 अनाज तथा खासकर बीजो को सामान्य तापमान पर ही 15 से 20 दिन तक अच्छी तरह सुखाकर भण्डारण करना चाहिये तथा भंडार पात्र में कमरे के तापमान पर 1 से 2  दिन तक  रखने के बाद ही सुबह सुबह भंडारण करना उचित रहता है। अर्थात गरम गरम अनाज को बोरियो या भंडार पात्र में नही रखना चाहिए।
 नए अनाजो को पुराने अनाज से हमेशा अलग रखे।अर्थात इन्हें एक साथ मिलाकर या इनकी बोरियो आदि को आपस मे मिलाकर नही रखना चहियड।
 भंडारण पश्चात विशेषकर बीज के लिए प्रयोग में लाने पर उस गोदाम या कमरे में  डीडीवीपी  या मेलाथियान दवा का 40 मिली कि मात्रा से प्रधुमित कर लेना चाहिये।।
 यदि कुठले या बिन में भंडारण करना हो तो नीम की सूखी पत्तियों द्वारा प्रधुमित करना भी एक असरदार युक्ति है।किंतु भंडारण के पश्चात् पात्र का मुंह बंद करके उसे वायु अवरोधी बनाना अत्यंत आवश्यक है।
भंडारण के लिए प्रयोग किए जाने वाले गोदाम, पात्र या वायु रोधी कवर में किसी भी प्रकार की दरार या छेद को भंडारण से पूर्व ही बंद कर लें ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
भंडारण के बाद दरवाजे तथा खिड़कियों के जोड़ों को भली प्रकार गीली मिंट्टी या सीमेंट से बंद कर दें, लेकिन एक वेंटीलेटर जरूर बनायें।
प्रधुमन के समय उच्च गुणवत्ता वाला वायु रोधी कवर, बहुसतही कवर, मल्टी क्रॉस लैमिनेटेड कवर ही इस्तेमाल करें।
भंडारण से पहले अनाज को साफ करें, उसमें से भूसी, कटा फटा अनाज, संक्रमित अनाज, कंकर इत्यादि निकाल दें, अनाज को करीब 15 से 20 दिन सुखाना आवश्यक है।
11.सुरक्षित भण्डारण के लिए अनाज से भरे बोरे फर्श पर सीधे न रखे, पहले कोई लकड़ी के फट्टे इस प्रकार रखें कि थोड़ी लकड़ी बाहर की तरफ निकली रहें। बोरों को दीवार से एक से डेढ़ फिट दूर रखें, बोरो को एक ही दिशा में न रखें एक के ऊपर एक रखने के लिए एक बोरा लम्बवत रखे तथा दूसरा बोरा ऊर्ध्ववत रखें यानि की प्लस का निशान बनाते हुए एक के ऊपर दूसरा रखें, इससे बोरो के बीच में हवा आराम से जाएगी।ज्यादा ऊँची थपपीयाँ न लगाए। छत से दो फीट नीचे थपपीयाँ समाप्त कर दें।
यदि कुठले या बिन में भंडारण करना हो तो नीम की सूखी पत्तियों द्वारा प्रधुमित करना भी एक असरदार युक्ति है।किंतु भंडारण के पश्चात् पात्र का मुंह बंद करके उसे वायु अवरोधी बनाना अत्यंत आवश्यक है।
घरेलू प्रयोग हेतु लोहे की टंकी आदि में गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए यह तरीका भी अपनाया जा सकता है, पर यह वैगयानिक विधि नही है, छोटे एवम अपने स्तर   पर किसान भाई प्रयोग करके देख सकते है।  जैसे-
टंकी में एक क्विंटल गेहूं भंडारित करते समय एक माचिस (तीलियों से भरी) तली में, दूसरी मध्य में तथा तीसरी माचिस सबसे ऊपर रखनी चाहिए।एक किलो नीम की पत्तियों को छाया में सुखाकर भंडार करने से पहली टंकी की तली में बिछाना चाहिए।इसी तरह अच्छी तरह सुखी पियाज भी 1 किलो प्रति कुंतल गेहू की दर से गेहू में मिलाकर टंकियों को अच्छी तरह वायु रोधी बनाकर रख सकते है। बाजार में मिलने वाली पारद टिक्की को कपड़े में बांधकर अनाज के बीच बीच मे रख सकते है।परंतु ध्यान रहे कि इस गेहू को चक्की में पिसाई कराते समय जरूर अलग कर देवी। आजकल मेडिकेटिड बोरिया भी आने लगी है जैसे पी सी आई कंपनी की। इनका भी भंडारण के लिए प्रयोग कर सकते है। इसके अलावा प्लास्टिक की पन्नियों में अनाज को रखकर एयरटाइट कर बोरियों या टिन के बिन , या छोटे छोटे कुठलो में रख सकते है। इससे गेहूं खराब नहीं होगा। परंतु ये सब तरीका कम मात्रा में गेहूं को भंडारित करने के लिए उचित है।
गोदामों या भंडार कच्छ में  चूहों से अनाज को बचाने के लिए 2.5 प्रतिशत जिंक फास्फाइड का चुगा बनाकर दिवालो के चारो ओर समय समय पर रखना चाहिये। दवा रखने के पूर्व शुरु में ज्वार, बाजरा या गेहूं के खुले दानों को बिना दवा के रखना चाहिए। फिर बाद में दवा मिलाकर रखने से चूहों का नियंत्रण अच्छा होता है। इस दौरान कमरा या गोदाम में बीच मे एक या दो जगहों एक बोरी हल्का गिला करके रखने से इसी बोरी पर चूहे मारे मिलेंगे। पर आस पास चूहों को पीने के लिए पानी नही रहना चाहिये। अन्यथा उनके पुनः  जीवित होने की संभावना बढ़ जाती है।
गोदामो भंडार कच्छ में समय समय पर खोलकर हवा का क्रास वेंटिलेशन करना चाहिए। परंतु वर्षा या मौसम खराब रहने पर बन्द रखना चाहिए अन्यथा नमी के अवशोषण से कीट तथा रोगों के प्रकोप होने से अनाज खराब रहने की संभावना हो सकती है।
समय समय पर कच्छ का अवलोकन करते रहना चाहिए। तथा आवश्यक तानुसार संस्तुत कीटनाशी का छिड़काव एवम फ्यूमिगेशन करते रहना चाहिए।
बीज के अलावा खाने वाले अनाजों में प्रतिबंधित एवम  अधिक जहरीली कीटनाशकों के उपयोग से बचना चाहिए, जैसे एलुमिनियम फास्फाइड, ई डी बी एमपुल आदि। इसके स्थान पर बोरो या स्टैकिंग के खाली जगहों, गलियारों तथा दिवालो पर नीम तेल का 10 मिली प्रतिलीटर की दर से पानी मे घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं।
(18 days ago)
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