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वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कमरदर्द में योग की उपयोगिता
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जबलपुर | 30-अप्रैल-2021
  शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय ग्वारीघाट के प्रधानाचार्य डॉ. एल.एल. अहिरवाल के मार्गदर्शन एवं स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग के शिक्षक डॉ. रामकुमार अग्रवाल एवं डॉ. रवि नारायण प्रजापति के द्वारा कोरोना महामारी के दौरान कमरदर्द से बचाव हेतु सुझाव दिया गया है कि आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में कमरदर्द एक आम समस्या बनकर सामने आ रही है। इसमें कई कारणों का समावेश होता है जैसे शरीर में कैल्शियम की कमी (ऑस्टियो पोराइसिस) लम्बर रीजन की रीढ़ की हड्डी में घिसाव या अन्य कारण, रीढ़ की हड्डी के बीच में रहने वाली गद्दीनुमा आकृति का खिसक जाना (बलजिग आफ डिस्क), गठियावात, बैठने की स्थिति सही नहीं होना, वृक्क विकार, रीढ़ की हड्डी में संक्रमण का होना, लंबे समय का बुखार, नींद न आना, मांसपेशियों में दर्द, गृधसी (सियाटिका), मोटापा, स्त्रियों में गर्भावस्था तथा श्वेत प्रदर आदि कारणों से कमर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
निदान परिवर्जन- अधिक वजन की वस्तु न उठायें, सीधे बैठे, जूते चप्पल एक सपाट तथा मुलायम हो, नमक का सेवन कम करें तथा प्रतिदिन योग करें।
योग चिकित्सा उपचार-
खड़े होकर करने वाले- अर्धकटि चक्रासन। बैठकर करने वाले- मार्जरी आसन, वज्रासन, पर्वतासन, उष्ट्रासन। पेट की तरफ से लेटकर- भुजंगासन, मकरासन, शलभासन, धनुरासन। पीठ के तरफ लेटकर- नौकासन, सेतुबंधासन, मर्कटासन, शवासन। प्राणायाम- उज्जायी प्राणायाम। ध्यान- ऊंकार उच्चारण।
कमर दर्द में ध्यान रखने योग्य बाते यह है कि आप लोग ऐसे आसन न करें जिसमें आगे की ओर झुकना पड़ता है। विस्तार न ज्यादा मुलायम और न ज्यादा कठोर हो, तकिये का प्रयोग न करें।
 
(9 days ago)
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