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57 वां अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस
कोविड काल में दिया है नर्सेस ने अपने हौसले का परिचय, उन्हें सेल्यूट
बड़वानी | 12-मई-2021
    डॉक्टर्स चिकित्सा व्यवस्था के मस्तिष्क हैं तो नर्सेस इसकी बेक बोन है। चिकित्सक जो निर्देष देते हैं, उनका क्रियान्वयन नर्सेस करती हैं। उनका मृदुल व्यवहार रोगियों को आष्वस्त करता है कि वे जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे। उनकी संज्ञा तो ‘सिस्टर’ की है, लेकिन उनमें अनुभूति ‘मदर’ की है। कोविड-19 के इस काल में नर्सेस ने अद्भुत हौसले का परिचय दिया है। उन्हें सेल्यूट। ये भावनाएं शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा 57 वें अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया, जितेंद्र चौहान, रवीना मालवीया, कोमल सोनगड़े ने ऑनलाइन प्लेटफार्मस से व्यक्त कीं। उल्लेखनीय है कि इन दिनों कॅरियर सेल प्राचार्य डॉ. एनएल गुप्ता के मार्गदर्षन में वर्क फ्राम होम के अंतर्गत इंटरनेट के जरिये ऑनलाइन कार्यरत है। जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी में डिप्लोमा कर रही कार्यकर्ता किरण वर्मा ने बताया कि महान नर्स फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष सन् 1965 से 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। इसका उद्धेष्य नर्सेस की सेवाओें को रेखांकित करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना है। कॅरियर काउंसलर डॉ. मधुसूदनल चौबे ने बताया कि  नाइटिंगेल टस्कनी के फ्लोरेंस नगर की रहने वाली थी। 12 मई, 1820 को उनका जन्म हुआ। मात्र 25 वर्ष की अवस्था में उन्होंने सेवा का व्रत लिया। उस दौर में युद्ध बहुत होते थे, युद्ध में घायल सैनिकों की सेवा करने का कार्य नाइटिंगेल ने अपने हाथों में लिया। रात्रि में वह अपने साथ लेम्प लेकर घायलों की सेवा करने का कार्य करती थीं। इसलिये उन्हें लेडी विथ द लेम्प भी कहा जाता है। उन्होंने क्रीमिया के युद्ध के दौरान 1854 से 1856 तक सेवा का कार्य सघन रूप से किया। उनके इस अभियान से ही नर्सिंग की अवधारणा का दृढ़ता से स्थापित किया। आज भी नाइटिंगेल पूरी दुनिया की नर्सेस की प्रेरणास्रोत हैं। कॅरियर सेल ने इस अवसर पर नर्सिंग के क्षेत्र में अध्ययन और कॅरियर की जानकारी भी दी। सहयोग अंकित काग, राहुल मालवीया, वर्षा मालवीया ने किया।

 
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