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किसान भाई फसलों को बीमारियों से बचाव हेतु बुवाई पूर्व
बीजोपचार करें एवं पर्याप्त वर्षा होने पर बुवाई करें
रतलाम | 18-जून-2021
    खरीफ वर्ष 2021 में रतलाम जिले में खरीफ फसलो का रकबा 317000 हैक्टैयर क्षैत्र में बुवाई प्रस्तावित की गई है जिसमें मुख्यतः सोयाबीन, मक्का, कपास, उड़द, मूंग एवं अरहर फसल है। विगत  2-3 दिन से थोडी-थोडी मात्रा में वर्षा जिले के अलग अलग क्षैत्र में हो रही है।
   उप संचालक कृषि ज्ञानसिंह मोहनिया द्वारा बताया गया कि बुवाई हेतु वर्षा लगभग 3 से 4 इंच होने एवं जमीन में पर्याप्त नमी होने पर ही फसलों की बुवाई कर सकते है। बुवाई पूर्व बीज से उत्पन्न होने वाली बीमारियों एवं मृदा जनित रोगो से बचाव हेतु किसान भाई बीजो को फफूंदनाशक दवा जैसे थायरम $ कार्बेन्डाजिम (2:1) 3 ग्राम प्रति किलो, इसके बाद पीला मोजेक रोग हेतु कीटनाशक थायोमिथाक्सम 30एफ.एस. 10 मिली. प्रति किलोग्राम बीज या एमिडाक्लोरोपिड 48एफ.एस. 1.2 मिली किलोग्राम बीज तथा अंत में कल्चर जैसे राईजोबियम एवं पी.एस.बी. 5 से 7 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से उपचारित कर बुवाई कर, ताकि भविष्य में फसल पर फफूंद जनित रोग से रोकथाम की जा सकती है।
   जिले में खरीफ सीजन में सोयाबीन फसल की प्रमुखता से बुवाई होती है तथा इसके बाद अधिकतर क्षैत्र में लहसुन, प्याज, सरसों, एवं अन्य मसाला औषधी वाली फसलों की बुवाई की जाती है। इन फसलों की लगातार दोनो सीजन में बुवाई से मिट्टी में उपलब्ध सल्फर एवं जिंक की मात्रा प्रायः कम देखी गयी है। किसान भाईयो से अपील की जाती है कि, सोयाबीन की फसल बुवाई के पूर्व सल्फर युक्त उर्वरक जैसे सिंगल सुपर फास्फेट, जिप्सम, दानेदार सल्फर आदि का उपयोग कर सकते है तथा सोयाबीन की बुवाई हेतु रेजबेड प्लांटर अथवा गराड़ पद्धति से बुवाई करें, इस विधि की वुबाई में मोटी मेड़ एवं नाली का निर्माण होता है जिससे अधिक वर्षा होने की स्थिति में नाली से पानी का निकास हो जाता है एवं कम वर्षा होने की स्थिति में मोटी मेड़ से नमी संरक्षित रहने से फसल पर ताव नहीं लगता है। दोनो स्थिति में फसल पर विपरीत प्रभाव नहीं पडता है एवं सामान्य उत्पादन से 18 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है तथा कीट एवं रोग का प्रकोप भी कम होता है।
   रेजबेड प्लांटर विगत वर्षो में निजी कस्टम हायरिंग योजनान्तर्गत जिले में अधिकतर केन्द्रों पर यंत्र उपलब्ध है। कस्टम हायरिंग सेटर से सपर्क कर किराये पर रेजबेड प्लांटर लेकर बुवाई कर सकते है। अतः किसान भाई आगामी समय में सोयाबीन की बुवाई गराड पद्धति अथवा रेजबेड पद्धति एवं रिजफेरो पद्धति से बुवाई करें।
 
(43 days ago)
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