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योग वर्तमान चुनौतियों का सामना करने का सबसे कारगर तरीका
राष्ट्रीय गौरव व स्वाभिमान का प्रतीक हैं अटल जी और स्वामी विवेकानन्द का व्यक्तित्व, राज्यपाल श्रीमती पटेल ने अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय में प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित किया
टीकमगढ़ | 22-जून-2021
      राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि कोविड संक्रमण से उत्पन्न विषम परिस्थतियों और चुनौतियों का सामना करने का सबसे कारगर तरीका योग अभ्यास है। योग को केवल व्यायाम समझना उचित नहीं है। यह शरीर, मन और बुद्धि के बीच सकारात्मक तालमेल स्थापित कराता है। योग अभ्यास से दुनिया को देखने और समझने के नजरिये में सकारात्मक बदलाव होता है। श्रीमती पटेल सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर श्री अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय भोपाल में भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी और स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमाओं के अनावरण कार्यक्रम को ऑनलाइन राजभवन लखनऊ से आज संबोधित कर रही थी।
      राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि योगाभ्यास से मन और विचारों में एकाग्रता आती है। व्यक्ति मानसिक, शारीरिक और वैचारिक दृष्टि से मजबूत बनता है। उन्होंने कहा कि देश के हर आयु वर्ग के लोग यदि स्वस्थ रहने की ठान ले और योग को नियमित दिनचर्या में शामिल कर ले। तो लाखों स्वस्थ मस्तिष्कों के उर्जावान कार्यों से देश को दुनिया में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकेगा। उन्होंने कहा कि  आज दुनिया भर में इन्सान के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को स्वस्थ रख कर बीमारियों से बचना है। जब जन-स्वास्थ्य के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों मोर्चों पर व्यक्तिगत देखभाल पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। तब उचित और स्वस्थ जीवनशैली आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। व्यापक और समग्र होने के कारण योग स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली के लिए एक सटीक माड्यूल है। जो स्वास्थ्य के योगिक सिद्धांत वेलनेस को मजबूत और विकसित करने में मदद करता हैंप् इस तरह से हमें  तनाव का बेहतर तरीके से सामना कर सकने में सक्षम बनता हैं। इसलिए योग शरीर को निरोग रखने और हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरुरी है। योग का नियमित अभ्यास सामान्य स्वास्थ्य, प्रतिरोधक क्षमता में सुधार और घातक बीमारियों के खिलाफ निवारक उपाय है। इसके लिये साधन और  संसाधनों की नहीं संकल्प शक्ति का होना ही पर्याप्त है।
      राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि श्री अटल जी और स्वामी विवेकानन्द जी का व्यक्तित्व राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक है। स्वामी जी संतरुप में और अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ के रुप में भारतीय संस्कृति के प्रतीक पुरुष है। स्वामी विवेकानंद ने जहाँ अमेरिका की धरती पर धर्म सभा को पहली बार संबोधित करते हुए, भारत की आध्यात्मिकता से दुनिया को चमत्कृत किया था। वही संयुक्त राष्ट्र संघ में पहली बार मातृभाषा हिन्दी में ओजस्वी भाषण देकर श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सारी दुनिया का दिल जीत लिया था। राष्ट्रवासियों को गौरवान्वित किया था। दोनों ही भारतीय संस्कृति की समन्वयकारिता और निष्ठा के प्रतिनिधि है। भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और परंपराओं से गढ़े हुए महान व्यक्ति थे। स्वामी विवेकानन्द जी ने वेदांत दर्शन, सनातन संस्कृति और जीवन मूल्यों से दुनिया के आध्यात्मिक जगत का पथ प्रदर्शन किया। तो श्री अटल जी ने राष्ट्रीय भावना, राष्ट्र के लिए सर्वस्व त्यागने के विचारों से समाज सेवियों और राजनीतिज्ञों की जीवन धारा को नई दिशा दी। यदि स्वामी जी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति की समन्वयकारिता को नई पहचान दी तो अटल जी ने भी सृजन और त्याग पर आधारित मूल्यवादी राजनयिक संस्कृति के आदर्शों की स्थापना की है। दोनों प्रखर राष्ट्रवादी थे। भारतीयता में उनका अगाध विश्वास था। स्वमी जी यदि संत रुप में राष्ट्रवादी थे तो श्री अटल जी राजनैतिज्ञ रुप में राष्ट्रवादी थे। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी की चपेट में विगत एक वर्ष से अधिक समय से है। आर्थिक बल्कि शैक्षणिक एवं सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों को इसने प्रभावित किया है। इस महामारी ने वैश्विक शिक्षा प्रणाली की कमियों को भी उजागर किया है। हमें मंथन करना होगा कि हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति से अर्जित ज्ञान और कौशल विषम दशाओं जैसे प्राकृतिक आपदा के समय कितना उपयोगी है। उन्होंने कहा कि विगत एक वर्ष से समस्त विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन पद्धति के माध्यम से शिक्षण कार्य संचालित हो रहे हैं। इस दौरान प्राप्त अनुभवों का अध्ययन करा कर अकादमिक कार्यक्षेत्र को विस्तारित करने के विश्वविद्यालय द्वारा प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि ग्रामीण अंचल और पहुंच विहीन क्षेत्रों में ग्रामीण प्रतिभाओं को उत्थान और विकास के अवसर प्राप्त हो।
      प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मातृभाषा के बल पर उन्नति के प्रयासों की मंशा से स्थापित हिन्दी विश्वविद्यालय मातृभाषा के माध्यम से ज्ञान विज्ञान के व्यापक स्तर पर प्रसार का प्रमुख माध्यम है। विश्वविद्यालय परिसर में प्रेरणादायी व्यक्त्तिव स्वामी विवेकानन्द और श्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाओं की स्थापना युवाओं को देश दुनिया में विशेष पहचान बनाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने इसके लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन को बधाई दी। विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द और श्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीयता के प्रतिनिधि पुरुष थे जिन्होंने दुनिया में देश को विशेष पहचान दिलाई। वैदिक संस्कृति और हिन्दी की पहचान विश्व में बनाने में स्वामी जी और अटल जी का महान योगदान है। ऐसे प्रेरणा के स्त्रोत की प्रतिमाओं की स्थापना के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन बधाई का पात्र है। कुलपति श्री रामदेव भारद्वाज ने बताया कि हिन्दी में समस्त ज्ञान विज्ञान का अध्ययन केन्द्र है। जहाँ एक  हजार दो  सौ विद्यार्थी विश्वविद्यालय में और तीन  हजार सात सौ विद्यार्थी अध्ययन केन्द्रों में अध्ययन कर रहें हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने प्रतिमा स्थापना के साथ ही सेमिनार संगोष्ठियों की अध्ययन सामग्री को पुस्तक के रुप में संकलित कराया है।
      कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मोहन लाला छीपा भी शामिल हुए। आभार प्रदर्शन  श्री सतेन्द्र नापित ने किया। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाओं का ऑनलाइन अनावरण सम्पन्न हुआ।
 
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