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जिले के किसानों को सोयाबीन फसल के लिए जरूरी सलाह
वर्षा होने के पश्चात/पर्याप्त नमी होने पर शीघ्र पकने वाली सोयाबीन की किस्मों को कतारों की दूरी कम करते हुए 30 सेमी, 25 प्रतिशत बीज दर बढाकर करें बोवनी
देवास | 09-जुलाई-2021
    कृषि विभाग ने खरीफ सीजन में सोयाबीन फसल के लिए जिले के कृषकों के लिए जरूरी सलाह दी है। उप संचालक कृषि श्री आर.पी. कनेरिया ने जिले के सभी कृषकों को सलाह देते हुए बताया कि खरीफ मौसम की फसल का बुवाई के पश्चात भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर की अनुशंसा के आधार पर कृषि विभाग ने किसानभाईयों को सलाह दी है कि उत्पादन की दृष्टि से सोयाबीन की बुआई हेतु जुलाई के प्रथम सप्ताह तक का समय अनुकूल होता है।
   जिले में जिन क्षेत्रों में अब तक सोयाबीन की बुआई नहीं हुई है, वर्षा आने के पश्चात/पर्याप्त नमी होने पर शीघ्र पकने वाली सोयाबीन की किस्मों, कतारों की दूरी कम करते हुए 30 सेमी, 25 प्रतिशत बीज दर बढाकर बोवनी करें। कई क्षेत्रों में बोवनी के बाद वर्षा के अभाव में सोयाबीन की बढ़वार रूकी हुई है। ऐसी स्थिति में फसल को सूखे से बचाने के लिए खेत में नमी बनाए रखने के लिए निदाई-गुड़ाई, डोरा, कुल्पा चलाना, फसलों के अवशेष (गेहूं/चना का भूसा) से पलवार लगाऐं। भूमि में दरारे पडने से पहले ही फसल की सिंचाई करें। ऐसी स्थिति में पोटेशियम नाइट्रेट 1 प्रतिशत या मेग्नेशियम कार्बोनेट अथवा ग्लिसरॉल 5 प्रतिशत जैसे एन्टीट्रांसस्पिरेन्ट का छिड़काव किया जा सकता है। प्रारंभिक 45 दिन खरपतवार मुक्त रखना अत्यंत आवश्यक है। कृषकगण 20 से 30 दिन की फसल होने पर डोरा, कूल्पा चलाएं, हाथ से निंदाई एवं रसायनिक खरतपवार नाशक का प्रयोग करें।
      बोवनी के पूर्व पेण्डीमिथालीन+इमेझेथापायर मात्रा 2.5 से 3 लीटर प्रति हेक्टेयर, बोवनी के तुरंत बाद डायक्लोसुलम 84 डब्ल्यूडीजी 26 ग्राम प्रति हेक्टेयर, सल्फेन्ट्राझोन 48 एससी 0.75 ली. प्रति हेक्टेयर, क्लोमोझोन 50, 2 लीटर प्रति हेक्टेयर के मान से छिड़काव करें। इसी प्रकार बोवनी के 10 से 12 दिवस बाद क्लोरीम्युरान इथईल 25 डब्ल्यूपी 36 ग्राम प्रति हेक्टेयर बेन्टाझोन 48 एससल 2 लीटर प्रति हेक्टेयर तथा बोवनी के 15-20 दिवस पश्चात इमेझेथापायर 10 एसएल 1 लीटर प्रति हैक्टेयर या  फेनाक्सीफाप-पी-इथाईल 9 ईसी 1 लीटर प्रति हेक्टेयर छिड़ाकाव कर सकते हैं।
    बोवनी के तुरंत बाद उपयोगी खरपतवारनाशक (जैसे डायक्लोसुलम, सल्फेंट्राजोन/ पेडिमेथालिन आदि) का प्रयोग नहीं किया हो तो ऐसी स्थिति में पर्णभक्षी कीटों से सुरक्षा हेतु फूल आने से 4-5 दिन पहले अपनी फसल पर क्लोरइटानिलिप्रोल 18.5 एससी 150 मिली/हेक्टेयर का छिड़काव करें। खरपतवार नाशक एवं कीटनाशक के अलग-अलग छिड़काव से होने वाले व्यय को कम करने एवं एक साथ उपयोग करने हेतु उनकी संगतता बाबत किए गए अनुसंधान परीक्षणों के आधार पर सोयाबीन में कीटनाशक एवं खरपतवार नाशकों को मिलाकर एक साथ छिड़काव किया जा सकता है। इसके लिए उपयुक्त संयोजन है। क्लोरइंट्रनिलिप्रोल 18.5 एससी (150 मिली/हे. या इण्डोक्साकार्ब 15.8 ईसी 333 मिली/ हेक्टेयर) या क्विनाल्फोस 25 ईसी 1500 मिली/हेक्टेयर के साथ अनुशंसित खरपतवारनाशक जैसे इमजेथापायर 10 एसएल 1 ली/हे. या क्विजलोफोप इथाइल 5 ईसी 1 लीटर प्रति हेक्टेयर का छिडकाव किया जा सकता है।
    जैविक सोयाबीन उत्पादन में कृषकगण पत्ती खाने वाली इल्लियां (सेमिलूपर, तम्बाखू की इल्ली) की छोटी अवस्था की रोकथाम हेतु बेसिलस थूरिन्जिएन्सिस अथवा ब्युवेरिया बेसिआना 1 ली. प्रति हेक्टेयर का प्रयोग कर सकते हैं एवं कीट-विशेष फिरोमोन ट्रेप्स एवं वायरस आधारित एनपीवी 250 एलई प्रति हैक्टेयर, फसल बर्ड पर्च लगाने से कीट भक्षी पक्षियों द्वारा भी इल्लियों की संख्या कम करने में सहायता मिलती है।
 
(18 days ago)
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