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देवास जिले के किसानों को मक्का फसल में कीटव्याधि की रोकथाम के लिए सलाह
सोयाबीन की फसल में कृषकों को डोरा या कुल्पा चलाकर या हाथ से निंदाई करें
देवास | 09-जुलाई-2021
   जिले में वर्तमान में मक्का की फसल में कीटव्याधि का प्रकोप होने की स्थिति बन रही है। जिलास्तर पर गठित डायग्नोस्टिक टीम, संभागीय संयुक्त संचालक कृषि श्री आलोक कुमार मीणा, उपसंचालक कृषि श्री आर. पी. कनेरिया द्वारा संयुक्त रूप से 07 जुलाई 2021 को बागली विकासखण्ड के ग्राम धूपघट्टा, मगरादेह, उदयनगर, किसनगढ, भिकुपुरा पुंजापुरा बौरखाल्या एवं कन्नौद विकासखण्ड के ग्राम सिंगोडी, गोदना, कांटाफोड हिरापुर खेडा एवं शासकीय कृषि प्रक्षेत्र चन्द्रकेशर बॉध आदि ग्राम के किसानों के खेत में मक्का एवं सेायाबीन फसल का निरीक्षण किया। जिसमें वर्षा की लंबी खेंच के कारण मक्का, ज्वार आदि फसलों में पानी की कमी पाई गई एवं कही-कही पर मक्का फसल में किटव्याधि का प्रकोप देखा गया। डायग्नोस्टिक टीम में डॉ. मोहम्मद अब्बास सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी, श्री आर. के. विश्वकर्मा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकासखण्ड बागली एवं श्री जीवन बरडे कृषि विकास अधिकारी उपस्थित थे।
     टीम के सदस्य संयुक्त संचालक कृषि श्री आलोक कुमार मीणा द्वारा मक्का फसल में नए कीट ‘‘फाल आर्मी वर्म’’ (स्पोडोप्टेरा फ्यूजपरडा) के बारे में विस्तार से बताया कि यह बहुभक्षी कीट है, जो 80 से अधिक प्रकार की फसलों पर क्षति करता है। परन्तु मक्का सबसे पसंदीदा फसल है। इस कीट के पतंगे हवा के बहाव के साथ एक रात में करीब 100 किमी तक प्रवास कर सकते हैं। इसकी प्रजनन क्षमता भी बहुत अधिक है। मादा अपने जीवन काल में करीब 1-2 हजार अंडे दे सकती है। यह कीट झूंड में आक्रमण कर पूरी फसल को कुछ ही समय में नष्ट करने की क्षमता रखता है।
     उपसंचालक कृषि श्री आर. पी. कनेरिया द्वारा मक्का फसल में फॉल आर्मी वर्म, तना छेदक तथा तना मक्खी कीटो से होने वाले प्रकोप के निदान हेतु कृषकों को कार्बोफ्यूरान डस्ट की 20-25 किग्रा प्रति हेक्टेयर के मान से बुरकाव करने की सलाह दी। साथ ही अधिक प्रकोप होने पर इमामेक्टीन बेंजोऐट 5 प्रतिशत एसजी 100 ग्राम प्रति+एकड  इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 70 मिली/एकड मात्रा को 150-200 लीटर पानी में  घोल बनाकर छिडकांव करें या थायोमिथाक्जाम 12.6 प्रतिशत+लेमडा सायहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत का मिश्रण कर 125 एमएल प्रति हेक्टेयर या क्लोरेन्टनीलीप्रोल 18.5 एससी का 150 मिली.प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करने की सलाह दी।
      उपसंचालक कृषि श्री आर. पी. कनेरिया ने वर्तमान में सोयाबीन की फसल में कृषकों को डोरा या कुल्पा चलाकर या हाथ से निंदाई करने की सलाह दी, जिसमें खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ नमी संरक्षण भी हो सकेगी। साथ ही अधिक खरपतवार होने पर सोयाबीन की फसल में इमेजाथायपर 10 प्रतिशत एसएल 1 लीटर या क्विजालोफाप इथाईल 5 प्रतिशत ईसी 1 लीटर+क्लोरम्यूरान ईथाइल 36 ग्राम प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी के साथ मिलाकर 20 दिन की फसल अवस्था में पर्याप्त नमी होने पर खेत में छिड़काव करने की सलाह दी। साथ ही कीट प्रबंधन हेतु क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी 1.5 लीटर या प्रोफेनोफॉस 50 प्रतिशत ईसी 1.25 लीटर मात्रा प्रति हेक्टर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकांव करें।

 
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