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कृषकों को धान फसल हेतु सलाह
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सिवनी | 20-जुलाई-2021
    कृषि विभाग द्वारा धान उत्पादक किसानों को सलाह देते हुए बताया गया है धान की नर्सरी यदि 20-25 दिन की हो गयी है तो तैयार खेतों में धान की रोपाई शुरू करें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 से.मी. तथा पौध से पौध की दूरी 20 से.मी. रखें। धान की पौधशाला में यदि पौधों का रंग पीला पड रहा है तो इसमें लोह तत्व की कमी हो सकती है। पौधों में यदि उपरी पत्तियां पीली और नीचे की हरी हो तो यह लोह तत्व की कमी को दर्षाता है। नियंत्रण के लिए फैरस सल्फेट का 0.5 प्रतिशत + चूना 0.25 प्रतिशत घोल का छिडकाव आसमान साफ होने पर करें। धान की फसल में बुआई के 20 दिन के अंदर या खरपतबार की 2 से 3 पत्ति की अवस्था पर बिसपायरीबेक सोडियम 10 प्रतिशत एस.सी. का 100 मि.ली. + क्लोरीमिरान +  मेटसल्फ्यूरान का 8 ग्राम को 125 लीटर पानी में घोल बनाकर नमी की अवस्था में छिडकाव करें। खरीफ की सभी फसलों मे देशी खाद सडी गली गोबर की खाद या कम्पोस्ट का अधिक से अधिक प्रयोग करें। ताकि भूमि की जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की मात्रा बढ सके। धान फसल में रोपाई के पूर्व गालमिज के नियंत्रण के लिए धान की रोपा को क्लोरोपायरीफास का 3 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर रोपा को 8 से 10 घंटे तक डुबाकर फिर लगाये। खडे खेत में नियंत्रण हेतु फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत का 10 किलोग्राम या कार्टप हाइड्रोक्लोराइड का 10 किलोग्राम प्रति एकड की दर से रोपाई के 3 सप्ताह बाद खेत में डालें। धान की खडी फसल में रोगों के नियंत्रण एवं फसल की बढवार हेतु स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 1 लीटर को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें।  
दलहन फसलों हेतु सलाह - अरहर, मूंग एवं उडद की फसल में बुआई के 15-20 दिन के अंदर इमेजाथापायर का 1 लीटर दवा प्रति हेक्टेयर की दर से 350-400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें।
यूरिया का विकल्प -
वर्तमान में लगी मक्का एवं धान की फसल में बुआई के 25-30 दिन बाद यूरिया के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया का 500 मि.ली. या एन. पी. के. 19:19:19 का 1.5 कि.ग्रा. प्रति एकड की दर से 120 से 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें।  

 
(70 days ago)
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