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किसानों के लिए सम्यक सलाह
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बालाघाट | 20-जुलाई-2021
        जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के द्वारा मंथन कर किसानों को सलाह दी गई है कि कम अवधि एवं कम पानी में उगने वाली फसलों की बोनी करें। वर्षा ना होने की स्थिति में किसानों के लिए सम्यक सलाह जारी की गई है। जिले में मुख्यतः धान की फसल लगाई जाती है इस हेतु जिन कृषकों ने धान का रोपा लगाने की योजना बनाई है,  व नर्सरी भी तैयार है। किंतु पानी के अभाव में खेतों में रोपाई नहीं हो पा रही है जिसके कारण नर्सरी सूख रही है। कुछ किसानों के पास सिंचाई के साधन उपलब्ध होने से उनके द्वारा रोपाई का कार्य किया जा रहा है लेकिन जिनके पास सिंचाई के साधन नहीं हैं वे सूखे की समस्या से जूझ रहे हैं।
   वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों द्वारा संकट की इस घड़ी में आकस्मिक कार्य योजना बनाकर कृषकों को इस प्राकृतिक आपदा एवं वर्षा की स्थिति में निपटने के लिए सक्षम बनाये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं, जिससे कृषकों को कम से कम नुकसान हो।  जिले में आज दिनांक तक 289 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 345 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई थी जिले में खरीफ सीजन में लगभग 3.00 लाख हेक्टेयर रकबे में बोआई की जाती है जिसमें लगभग 2.70 लाख हेक्टेयर रकबे में धान फसल की बोनी होती है जो कि लगभग 40 हजार हेक्टेयर धान का कतार में तथा 2.30 लाख हेक्टेयर में रोपा पद्धति से धान की खेती की जाती है।
   वर्तमान में उत्पन्न सूखे की स्थिति में धान की सीधी बोआई की गई फसल में यांत्रिक विधि से अंत: शस्‍य क्रियाएं जैसे – “कुल्पा” या “हो” या कोनावीडर/ पावर वीडर चलाकर मृदा नमी का संरक्षण तथा निंदा नियंत्रण करें। सिंचाई हेतु पानी का साधन होने पर हल्की सिंचाई करें सिंचाई किए हुए खेत में निंदा नियंत्रण हेतु विस्‍पायरी सोडियम 50 ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा मैटसल्‍फ्युरान मिथाईल+क्‍लोरिम्‍युरान इथाईल 80ग्राम प्रति हेक्‍टेयर निंदनाशी दवा का स्प्रे करें। रोपा  की गई धान फसल में नींदा मारकर  या (डिस्‍क या कल्टीवेयर द्वारा) खेत को मचाए। दो से तीन पौधे एक जगह पर लगाएं। कतार से कतार व पौधे से पौधे की दूरी 20 से 15 सेंटीमीटर रोपित करें। खेत की मेढों को बंद करके रखें ताकि वर्षा होने पर खेत का पानी बाहर ना निकल पाए। आधार पोषक तत्वों की मात्रा सामान्य से बढ़ाकर दें। अब समय आ गया है कि वैकल्पिक तौर पर किसानों को  सलाह दी जाय कि वे कम पानी में होने वाली तथा कम अवधि वाली फसल धान (किस्‍म- जेआर -201 ,जेआरबी-1 एमटीयू-1010, जेआर-206 जेआर-81 दंतेश्वरी, इंद्रा, बरानी, सहभागी, अनंदा, पूर्णिमा, कलिंगा) कोदो (किस्म इंद्रा-1, जेके-137) एवं कूटकी (किस्म- जेके4, जेके-8) की बोनी करें जिसमें करीब का सीजन आवश्यक ना जाकर वहां आगामी रबी सीजन में बोनी होने से ना पिछड़े।
 
(61 days ago)
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