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गर्भवती महिलाओं के कोविड टीकाकरण संबंधी वर्चुअल मीडिया कार्यशाला का आयोजित
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बैतूल | 22-जुलाई-2021
 
    गर्भवती महिलाओं के कोविड टीकाकरण संबंधी वर्चुअल मीडिया कार्यशाला गुरूवार 22 जुलाई को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभाकक्ष में प्रदेश स्तर से यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित की गई। इस मीडिया कार्यशाला में जिले के प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारगण उपस्थित रहे।
   कार्यशाला में जानकारी दी गई कि भारत सरकार द्वारा अब कोविड-19 से बचाव का टीका गर्भवती महिलाओं को लगाये जाने के निर्देश प्राप्त हुये हैं। कोविड-19 संक्रमण से बचाव हेतु गर्भवती महिलाओं में टीकाकरण करवाकर संक्रमण मुक्त समाज की स्थापना में सहयोग किया जायेगा। गर्भवती महिलाओं के लिये कोविड वैक्सीन इसलिये आवश्यक है ताकि उनके स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके एवं भ्रूण पर पडऩे वाले प्रभाव को रोका जा सके। गर्भवती महिलाओं के लिये अत्यंत आवश्यक है कि वे स्वयं को कोविड-19 से बचाने के लिये सभी सावधानियां बरतें जिसमें कोविड-19 के खिलाफ  टीकाकरण भी शामिल है। यद्यपि अधिकांश संक्रमित गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती, परन्तु कुछ महिलाओं के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। 35 वर्ष से अधिक आयु की या उच्च रक्तचाप से ग्रसित गर्भवती महिलाओं को गंभीर कोविड-19 होने का अधिक खतरा होता है। कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान कोविड-19 संक्रमण से संक्रमित माताओं में समय से पहले डिलेवरी होने, ढाई किलो से कम का नवजात शिशु होने या जन्म से पहले नवजात शिशु की मृत्यु होने की संभावना बढ़ सकती है।
   कोविड-19 संक्रमण की जटिलताएं विकसित होने का अधिक खतरा उन गर्भवती महिलाओं में होगा जो 35 वर्ष से अधिक आयु की, मोटापे से ग्रसित, मधुमेह या उच्च रक्तचाप से ग्रसित एवं जिनमें पहले से क्लॉटिंग की समस्या से पीडि़त हों। यदि गर्भावस्था के दौरान कोई महिला कोविड-19 से संक्रमित हो चुकी हो तो उसे प्रसव के तुरंत बाद वैक्सीन लगाया जाना चाहिये। उपलब्ध कोविड-19 वैक्सीन गर्भवती महिलाओं के लिये सुरक्षित है। अन्य टीकों की तरह कोविड-19 वैक्सीन लगवाने के बाद हल्के दुष्प्रभाव जैसे- हल्का बुखार, इंजेक्शन लगने की जगह पर दर्द या एक से तीन दिन तक अस्वस्थ होना हो सकते हैं। भ्रूण और नवजात शिशु के लिये वैक्सीन के दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव और सुरक्षा अभी तक स्थापित नहीं हुई है। किसी भी कोविड-19 वैक्सीन को लगवाने के बीस दिनों के भीतर होने वाले लक्षणों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है जिसमें सांस की तकलीफ, छाती में दर्द, उल्टी होना, लगातार पेट दर्द, हाथ पैर में दर्द या दबाने पर दर्द होने या बांह पैर में सूजन आना, इंजेक्शन लगने की जगह से दूर त्वचा पर रक्त के छोटे या बड़े निशान होना, शरीर के किसी भी अंग में कमजोरी आना, दौरा पडऩा, तेज या लगातार सिरदर्द, बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार उल्टी होना, धुंधला दिखाई देना, या आंखों में दर्द होना तथा कोई अन्य लक्षण या स्वास्थ्य स्थिति जो हितग्राही के लिये चिंता का विषय हो सम्मिलित हैं। गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के बाद भी कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन जारी रखना जरूरी है- डबल मास्क पहनना, हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह और नियमित रूप से धोना, दो गज दूरी एवं भीड़ भाड़ वाली जगहों पर न जाना। गर्भवती महिलाऐं कोविड-19 टीकाकरण के लिये अपना पंजीयन कोविन पोर्टल पर सकती हैं या स्वयं टीकाकरण केन्द्र जाकर अपना पंजीयन करा सकती हैं।
   शासन स्तर से को-वैक्सीन का टीका गर्भवती महिलाओं को दिये जाने के निर्देश प्राप्त हुये हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ए.के. तिवारी ने समस्त पत्रकारगणों, आमजन, गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिवार, समाज के प्रबुद्धजन, स्वयं सेवी संस्थाओं से अपील की है कि जिले की सभी गर्भवती महिलाओं का कोविड टीकाकरण कराने में सहयोग करें और यह संदेश जन-जन तक प्रसारित करें ताकि गर्भवती महिलाओं एवं उनके गर्भ में पल रहे शिशुओं को कोविड टीकाकरण का सुरक्षा कवच मिल सके।
   मीडिया कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.ए.के. तिवारी, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अरविन्द कुमार भट्ट, एसएमओ डब्ल्यूएचओ डॉ. अविनाश कनेरे, जिला मीडिया अधिकारी श्रीमती श्रुति गौर तोमर सहित अन्य उपस्थित रहे।
 
(12 days ago)
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