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कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर के यादव की कृषकों को कृषि संबंधित सलाह
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अलिराजपुर | 28-जुलाई-2021
 
    कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके यादव ने बताया वर्तमान समय में जिले में मौसम खुलने के उपरांत फसलों जैसे सोयाबीन, उडद, मक्का, कपास आदि में कीट एवं बीमारियों का प्रकोप बढ सकता है। साथ ही उडद एवं सोयाबीन में पीला मौजेक बीमारी के नियंत्रण हेतु विशेष सावधानियां आवश्यक है। कृषकों के लिए कीट एवं बीमारियों के नियंत्रण हेतु आवश्यक सलाह है कि वे मक्का में तना छेदक इल्ली के नियंत्रण हेतु मामेक्टिन बेजोएंट 5 प्रतिशत एसजी की 0.4 ग्राम या स्पाइनोसेड की 0.3 मी.ली. या थाइमेथोक्जम 12.6 प्रतिशत एवं लेम्डा साइहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत की 0.5 मी.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। जिले में उडद एवं सोयाबीन फसल में पीला मोजेक बीमारी के प्रकोप से फसल को बचाने के लिए प्राथमिक अवस्था में ही अपने खेत में जगह-जगह पर पीला चिपचिपा टेप लगाए, जिससे इसका संक्रमण फैलाने वाली सफेद मक्खी का नियंत्रण होने से सहायता मिलेगी। फसल पर पीला मोजाइक रोग के लक्षण दिखते ही ग्रसित पौधों को अपने खेत से निकाले दें। खेत में सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु अनुशंसित पूर्व मिश्रित संपर्क रसायन जैसे बीटासायफलुथ्रिन प्लस इमिडाक्लोप्रीड (350 मि.ली./है.) या पूर्व मिश्रित थायोमिथाक्सम प्लस लैम्बडा सायहेलोथ्रिन (125 मि.ली./है.) का छिडकाव करें जिससे सफेद मक्खी के साथ-साथ पत्ती खाने वाले कीटों का भी एक साथ नियंत्रण हो सके। डॉ. यादव ने बताया पत्तियों, फूल फली खाने वाली इल्लियों के नियंत्रण हेतु कीटनाशक जैसे इन्डोक्साकार्ब 333 मि.ली./है. या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.9 सी.एस. 300 मि.ली./है. प्रोफेनोफोस प्लस साइपरमेथ्रिन 1.5 लीटर/है. का छिडकाव करें। कपास में रस चूसक कीटों के नियंत्रण हेतु इमिडक्लोप्रीड या थायोमिथाक्सम या एसीटामीप्रीड की 0.3 से 0.5 मी.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें।
 
(63 days ago)
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