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गणेश मूर्ति विसर्जन के संबंध में दिशा-निर्देश
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शहडोल | 28-जुलाई-2021
   क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहडोल श्री संजीव मेहरा ने जानकारी दी है कि, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशानुसार शहडोल जिले में गणेश मूर्ति विसर्जन के अवसर पर प्रत्येक प्रतिमा विसर्जन स्थल (जल स्त्रोत) की विसर्जन से पहले, विसर्जन के दौरान व विसर्जन के 1 सप्ताह बाद जल गुणवत्ता की जांच करें, इस जांच में भौतिक रासायनिक पैरामीटर जैसे- पीएच, डिजाल्वड ऑक्सीजन, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमाण्ड, केमीकल्स ऑक्सीजन डिमाण्ड, कण्डक्टीविटी, टर्विडिटी, टोटर डिजाल्वड सालिड्स, टोटल सालिड्स एवं मेटल्स (केडमियम, क्रोमियम, आयरन, निकल, लेड, जिंक एवं कॉपर) की जांच करने तथा जल स्त्रोतों की क्षेत्रानुसार सैम्पलिंग बिन्दु निष्चित करने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने बताया है कि, जल स्त्रातों में प्रतिमाओं के विसर्जन के फल स्वरुप जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है क्योंकि मूर्ति निर्माण में उपयोग किए जाने वाले प्राकृति रंगों के विषैले रसायन होते हैं साथ ही प्रतिमाओं के साथ फूल, वस्त्र एवं सजावटी सामान (रंगीन कागत एवं प्लास्टिक) आदि विसर्जित होते हैं, जल की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव न पडे इसलिए  जल प्रदाय करने वाले स्रोतों पर मूर्तियों का विसर्जन नहीं किया जाएगा, प्रतिमाओं के विसर्जन हेतु आवश्यकता अनुसार जल स्त्रोत (नदियां एवं तालाब) निर्धारित किए गए स्थलों पर ही विसर्जन करें जिससे अन्य नदियों एवं तालाबों को प्रदूषण से बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि, प्रतिमाओं के साथ लाए गए उनके वस्त्र, पूजन सामग्री, प्लास्टिक का सामान एवं पॉलीथिन बैग तथा अन्य आवश्यक सामग्रियों को तालाब एवं नदियों में नहीं डाला जाए विसर्जन के पूर्व इस प्रकार की सामग्रियों को प्रतिमाओं से हटा लिया जाएं, प्रतिमा विसर्जन हेतु निर्मित अस्थाई तालाब में ही मूर्ति विसर्जन कराया जाए ऐसे स्थलों से विसर्जन के उपरांत बचे हुए अवशेषों को किनारे पर लाकर व मिट्टी इत्यादि को लैंडफिल में डाला जाए तथा लकडी व बांस का पुनः उपयोग किया जाएं, मूर्ति विसर्जन के बाद 24 घंटे के अंदर जल स्रोतों में विसर्जित फूल, वस्त्र एवं सजावटी सामान को निकाल लिया जावे, जिससे जल जीवन पर मूर्ति विसर्जन का न्यूनतम विपरीत प्रभाव पडें व मूर्ति विसर्जन स्थलों के पास ठोस अपशिष्टों को नहीं जलाया जाए।
(51 days ago)
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