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(शिक्षक दिवस पर विशेष) जब से संभाला स्कूल का प्रभार, बदल दी तस्वीर (कहानी सच्ची है)
ढीमरखेड़ा के गौरा मिडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षक महेन्द्र सिंह ने अपनी मेहनत से परिसर का बनाया हरा भरा, बच्चों को संगीत सिखाने की खुद से की व्यवस्था, दीवारों पर सहयोग से कराई चित्रकारी
कटनी | 04-सितम्बर-2021
    ढीमरखेड़ा तहसील के गौरा गांव का मिडिल स्कूल। हरे भरे पौधों से भरा परिसर। बाहर और अंदर की दीवारों पर शानदार चित्रकारी। आर्गन पेड, ढोलक, हारमोनियम के गूंजते सुर। यह सब यहां पर पदस्थ प्रभारी महेन्द्र सिंह ठाकुर की मेहनत का नतीजा है। स्कूल का प्रभार संभालने के साथ ही उन्होंने सरकार से आने वाली राशि के साथ जनसहयोग और कुछ राशि खुद से खर्च कर परिसर की तस्वीर बदलने का काम किया। वर्तमान में गौरा का मिडिल स्कूल एक आदर्श स्कूल है और शिक्षक के कार्य को ग्रामीणों के साथ अधिकारियों की भी सराहना मिल रही है। इतना ही नहीं स्कूल को स्वच्छ व सुंदर बनाने के साथ ही शिक्षक श्री सिंह ने खुद के खर्च से वाद्ययंत्र भी मंगाए हैं और स्कूल टाइम के बाद वे बच्चों को संगीत की भी शिक्षा देते हैं।
2015 में संभाला था स्कूल का कार्यभार
    शिक्षक महेन्द्र सिंह वर्ष 1995 में गौरा स्कूल में पदस्थ हुए थे। कुछ दिन बाद उन्हें जनशिक्षक बना दिया गया। वर्ष 2015 में उनकी वापस पदस्थापना स्कूल में की जा रही थी तो उन्होंने गौरा स्कूल ही जाने का आग्रह किया। जुलाई माह से उनकी पदस्थापना स्कूल में की गई और उसके बाद ही उन्होंने परिसर को संवारने का काम प्रारंभ कर दिया। गांववालों के सहयोग से सबसे पहले स्कूल के मैदान का समतलीकरण कराया गया और उसके बाद शिक्षक ने बच्चों के साथ मिलकर परिसर में क्यारियां तैयार कीं। जिनमें फलदार, फूल के पौधे रोपे गए। नर्सरी मंे शिक्षक व बच्चे मिलकर पौधों की सेवा करते रहे और वर्तमान में पूरे परिसर में लगभग एक सैकड़ा पौधे लहलहा रहे हैं। पौधों को सींचने के लिए पानी की व्यवस्था शिक्षक ने जनसहयोग से कराई है। स्कूल की दीवारों को भी सुंदर बनाने के लिए उन्होंने बच्चों के साथ मिलकर खुद ही दीवारों को पेंट किया। साथ ही कहानियों पर आधारित चित्रकारी भी कराई गई ताकि बच्चों को खेल-खेल में ज्ञान मिल सके।
जनप्रतिनिधियों से सहयोग लेकर कराए निर्माण
    मिडिल स्कूल गौरा में मंच का निर्माण कराया गया है ताकि सांस्कृतिक गतिविधियां हो सकें। इसके लिए शिक्षक ने क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य से सहयोग लिया तो अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग से फर्श को दुरूस्त कराने का कार्य भी कराया गया है। वर्तमान में सहयोग से स्कूल परिसर में मां सरस्वती के मंदिर का निर्माण भी जारी है।
लॉकडाउन में भी रहे चर्चा में
    कोरोना संक्रमण के कारण लंबे समय से स्कूल बंद थे लेकिन शिक्षक महेन्द्र सिंह की पाठशाला जारी रही। शिक्षक ने ठेले में एलईडी और पाठ्य सामग्री लगाकर गांव में घूमघूमकर बच्चों को मोहल्ला क्लासों के जरिए शिक्षित करने का कार्य किया। लॉकडाउन के दौरान उनका चलित स्कूल जिले भर में चर्चा का विषय रहा। उनकी गतिविधियों को लेकर कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ भी उनको सम्मानित कर चुके हैं।
 
(44 days ago)
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