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खरीफ फसलों एवं पशुधन के लिए प्रमुख सामयिकी तकनीकी परामर्श
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शिवपुरी | 07-सितम्बर-2021
      कृषि विज्ञान केन्द्र शिवपुरी द्वारा किसानों के खरीफ फसलों एवं पशुधन के लिए प्रमुख सामयिकी तकनीकी परामर्श जारी किया है।
   जारी परामर्श के तहत मूंगफली में खूटियां बनने के समय एवं फली भरने की अवस्था में पर्याप्त नमीं बनाये रखने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई अवश्य करें तथा अधिक वर्षा होने पर उचित जल निकास की व्यवस्था करें। मूंगफली में सफेद लट (व्हाइट ग्रब) के नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफॉस दानेदार दवा को 15-20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर में भुरकाव करें। धान में नाइट्रोजन की दूसरी व अंतिम मात्रा टॉप ड्रेसिंग के रूप में 50-55 दिनों के बाद दें। बाली बनने की प्रारंभिक अवस्स्था में अधिक उपज देने वाली उन्नत प्रजातियों के लिए 25 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें। ध्यान रहे कि टॉप ड्रेसिंग करते समय खेत में 2-3 से.मी. से अधिक पानी नहीं होना चाहिए।
   धान में जीवाणुजनित रोग जीवाण झुलसा रोग की रोकथाम के लिए पानी निकाल दें। नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग बंद कर दें। एग्रीमाइसीन दवा का 75 ग्राम या स्ट्रेप्टासाइक्लीन 75 ग्राम या 1 कि.ग्रा. कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 500-600 लीटर पानी में घोलकर 10-12 दिनों के अंतराल पर 2- 3 छिड़काव करें। धान में भूरा धब्बा/खैरा रोग की रोकथाम हेतु जिंक सल्फेट 2.5 कि.ग्रा. मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर/हैक्टर में छिड़काव करें। धान में तना छेदक इल्ली के आने पर कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 15 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर दानेदार दवा का मुरकाव करें।
   धान में पत्ती लपेटक कीटों की सूंडी पौधों की कोमल पत्तियों के सिरे की तरफ से लपेटकर सुरंग सी बना लेती है और उसे अंदर-अंदर खाती रहती है। इस कारणवश पौधों की पत्तियों का रंग उड़ जाता है और पत्तियां सिर की तरफ से सूख जाती है। अगस्त से लेकर अक्टूबर तक इसके द्वारा नुकसान होता है।
   इसके नियंत्रण के लिए कीड़ों को लाइट ट्रेिप से इकट्ठा करके मार सकते हैं। 1 लीटर प्रोफिनोफॉस दवा की मात्रा 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव किया जा सकता है। बाजरा की उन्नत संकर प्रजातियों में नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा यानी 40 कि.ग्रा. की टॉप ड्रेसिंग बुआई के 25-30 दिनों बाद करें। बाजरे के अर्गट पत्ती धब्बा आदि रोग आने पर रिडोमील गोल्ड (एम.जेड. 72) 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से बुआई के 20-25 दिनों बाद 10-12 दिनों के अंतराल पर घोल बनाकर छिड़काव करें। मक्का, ज्वार एवं बाजरे की फसल में नर-मंजरी/ बालियां निकलते समय तथा दुधिया अवस्था में सिंचाई द्वारा खेत में नमी प्रबंध करना सुनिश्चित करें। मक्का, ज्वार एवं बाजरे की फसल की कटाई के उपरांत सूखे दाने निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखें। अरहर में फलीबेधक मक्खी प्रमुख कीट है जो अरहर की फसल को काफी हानि पहुंचाता है। इस कीट के द्वारा 20-80 प्रतिशत तक अरहर की फसल को प्रतिवर्ष नुकसान होता है इसका नियंत्रण के लिए प्रोफेनोफॉस 1.5 एम.एल. प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करें।
   अरहर में फलीबग कीट के वयस्क एवं शिशु पत्तियों, कलियों, फूलों तथा फलियों के रस को चूसते हैं, जिससे फलियां सिकुड़ जाती हैं और सही तरीके से नहीं बन पाती हैं। इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.5 एम.एल. या डाइमिथोएट 1.5 एम.एल. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। मूंग, उड़द में पीला मोजेक रोग से पौधों के आकार छोटे रह जाते हैं। ऐसे पौधों में बहुत कम व छोटी फलियां होती हैं। ऐसी फलियों का बीज सिकुड़ा हुआ और छोटा होता है यह रोग सफेद मक्खी द्वारा फैलता है। इसके नियंत्रण के लिए खेत में ज्यों ही रोग पौधे दिखाई दें, इमिडाक्लोप्रिड 0.5 एम. एल. या डाइमिथोएट 1.5 एम.एल. का छिड़काव कर दें। छिड़काव को 15-20 दिनों के अंतराल पर दोहराएं और कुल 3-4 छिड़काव करें। प्रति हैक्टर 800 लीटर पानी में बना घोल पर्याप्त होता है। यदि खेत मक्का, बाजारा, तिल, लोबिया मूंग, उड़द आदि फसलों के कटने से खाली हो तो तोरिया की फसल सितंबर के पहले या दूसरे पखवाड़े में बुबाई करें। तोरिया फसल गेहूं एवं प्याज बुबाई से पहले दिसंबर में पक जाती है। इससे बरसात की नमीं का पूरा उपयोग होगा तथा तोरिया की 8-10 क्विंटल पैदावार भी मिलेगी।
   तोरिया की फसल में खाद एव उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करें मृदा परीक्षण न होने पर सिंचित दशा में बुआई के समय 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 40कि.ग्रा. फॉस्फोरस और 20 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें। तोरिया की फसल में 20 कि ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से सल्फर का प्रयोग लाभदायक है। असिंचित दशा में 30 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 20 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 10 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें।
   लौकी, तोरई, खीरा एवं अन्य कद्दूवर्गीय सब्जियों में कीट नियंत्रण हेतु नीम के पत्तों का रस या ऐजाडेरेक्ट्रिन दवा 5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करते रहें। लौकी, तोरई, खीरा एवं अन्य कद्दूवर्गीय सब्जियों में पत्ती धब्बा, झुलसा रोग नियंत्रण दिखाई देने पर रिडोमिल दवा 2 ग्राम/लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इस समय ज्यादातर भैंसे बच्चा दे रही हैं अतः बच्चा देने के बाद नवजात बच्चों को पैदा होने के 1 घंटे के भीतर वजन को 1/10 भाग खीस अथवा पेवसी अवश्य पिलायें। बच्चा देने के बाद मैंस के गर्भ की सफाई भली-भांति हो जाये इसका विशेष ध्यान रखें। अगले तीन दिन तक अजवाइन डालकर गर्म पानी ही पीने को दें। गायों को उनके शरीर भाग अनुसार पेट के कीडों की दवा अवश्य पिलायें तथा गर्भवती गाय को अतिरिक्त रूप से 2.5-3.0 कि.ग्रा. राशन खाने को दें। 20 बकरियों में लिवरफ्यूक से बचाव के लिए निरजान या हाइटेक तरल दवा की खुराक अवश्य पिलायें साथ ही बकरियों को साफ एवं सूखे स्थान पर बांधें।
 
(47 days ago)
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