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विश्व आत्महत्या निषेध दिवस 10 सितंबर 2021 "विशेष आलेख"
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छिन्दवाड़ा | 08-सितम्बर-2021
    अंतर्राष्ट्रीय दिवसों के आयोजन की श्रृंखला में प्रतिवर्ष 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या निषेध दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के आह्वान पर इस दिवस को मनाने का उद्देश्य आत्महत्या से जुड़ी मानसिक बीमारियों और आत्महत्या की रोकथाम के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रदेश में राज्य आनंद संस्थान द्वारा आगामी 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या निषेध दिवस मनाये जाने का निर्णय लिया गया है।
      पूरी दुनिया में हर 40 सेकेण्ड में कोई न कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है। इस प्रकार 8 लाख लोग प्रति वर्ष आत्महत्या कर अपना जीवन समाप्त कर लेते है व 75 प्रतिशत से ज्यादा ये आत्महत्यायें गरीब अथवा मध्यम आय के देशों में की जाती है। बहरहाल, इन आत्महत्याओं को उम्मीद के लिए काम करके" रोका जा सकता है। लोगों के कौशल को विकसित कर तथा उनमें आत्म विश्वास को बढ़ाने से आत्महत्या को काफी कम किया जा सकता है। इस सोच के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2021 में इस दिवस को आत्महत्याओं को रोकने के लिए एक नवीनीकृत विश्वव्यापी प्रतिबध्दता "कार्रवाई के माध्यम से आशा पैदा करना" पर आधारित किया है। इस अवसर पर राज्य आनंद संस्थान भी अपने आनंदकों, मास्टर ट्रेनर्स, आनंदम सहयोगी, डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम लीडर एवं आनंद क्लब के माध्यम से प्रदेश में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिये प्रतिबध्द है। अपेक्षा है कि समस्त आनंदक कोविड-19 से संबंधित सावधानियों का पालन करते हुए विभिन्न माध्यमों से आत्महत्या निषेध दिवस के उद्देश्यों के प्रति जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
   कोरोना के बाद भारत में बढ़ रही है आत्महत्यायें-इन परिस्थितियों में राज्य आनंद संस्थान की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। यह भी उल्लेखनीय है कि संस्थान द्वारा संचालित अल्पविराम कार्यक्रम में व्यक्ति के मन मस्तिष्क में व्याप्त अवसाद, दु:ख, चिंता, हताशा, पीड़ा, हीन भावना, निराशा, अनियंत्रित क्रोध, नशे की प्रवृत्ति, संवादहीनता की स्थिति से व्यक्ति को बाहर निकालने के लिये पूर्व से ही अनेक गतिविधियां आयोजित की जाती है, किन्तु विश्व आत्महत्या निषेध दिवस पर इन गतिविधियों के माध्यम से जनजागरूकता फैलाने का कार्य और अधिक बड़े स्तर पर किया जा सकता है। इसके लिये ऑनलाइन संगोष्ठी, बैठक, चर्चाएं, पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन प्रतियोगिता, मनोवैज्ञानिक अथवा विशेषज्ञों के व्याख्यान इत्यादि का आयोजन किया जा सकता है।
      यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि आत्महत्या का विचार एक तात्कालिक संकट है और ऐसा प्रायः देखा गया है कि सही समय पर मदद मिलने से इसे टाला जा सकता है। प्रायः घरेलू परेशानियों से त्रस्त गृहिणियां, लंबी बीमारी से तंग आए हुए रोगी, बेरोजगार, विद्यार्थी, बंदीगृह में बंदी, दिवालिया हो जाने वाले लोग, प्रेम में असफल होने पर युवा, नशे की लत वाले युवा, निर्धन, बेरोजगार, किसान, कोरोना पीड़ित इत्यादि आत्महत्या करने पर विवश पाए जा रहे हैं। इनको हताशा व अवसाद की मनःस्थिति से निकालने के लिए और इन परिस्थितियों से लड़ने में मदद करने के लिए विशिष्ट रूप से पीड़ित व प्रभावित समूह अथवा व्यक्ति को केंद्र में रखकर वर्चुअल वर्कशॉप का आयोजन किया जा सकता है। इसमें कुछ प्रमुख बिंदुओं का समावेश किया जा सकता है। इसकी शुरुआत आपको अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात करने से करनी होगी। निडर और बेहिचक होकर अपनी भावनाएँ लोगों से बाँटें। साथ ही हमें करुणा और प्रेम से लोगों की बातें सुनना सीखना होगा। बेसिक्स का खयाल रखिए यानी सात-आठ घंटे की नींद, समय पर भोजन, थोड़ी कसरत और प्रकृति के साथ का होना। परिजन-मित्रों से सामाजिक और आत्मिक तौर पर जुड़े रहें। साथ ही नकारात्मक डिजिटल कंटेंट से थोड़ी दूरी बनाएँ। कभी-कभी ठीक न रहने के ख़्याल के साथ भी सामंजस्य बैठाएँ और यह विश्वास रखें कि अनिश्चितता का समय भी गुजर जाएगा। मुसीबत में फंसे वंचित लोगों की मदद करें। अगर फिर भी अवसाद महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें। इस वक़्त भारत में अनेक सरकारी अस्पताल और क्लीनिक मानसिक तकलीफ़ों से जूझ रहे मरीज़ों की मुफ़्त में मदद करने के लिए मौजूद हैं। आपको सिर्फ हेल्पलाइन नंबर पर फोन करना है। आप अन्य लोगों को भी हेल्पलाइन नंबर अवश्य उपलब्ध कराएं। विश्व आत्महत्या निषेध दिवस के उद्देश्यों के प्रति जनप्रतिनिधियों, लोगों, संस्थाओं, शासन, प्रशासन, विद्यार्थियों आदि को जागरूक करने के लिये एस.एम.एस., ई-मेल या ट्वीट कर सकते हैं। प्रदेश के सभी आनंदक अपनी स्थानीय परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए स्वविवेक से विश्व आत्महत्या दिवस के उद्देश्यों पर आधारित यथासम्भव गतिविधियों
   बैठक एवं संगोष्ठी, कॉलेज स्कूल में विद्यार्थियों के साथ विषय पर चर्चा, जागरूकता रैली, पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन प्रतियोगिता, जन जागरूकता के लिए रोड शो, विषय पर आधारित नुक्कड़ नाटक/सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि का आयोजन कर सकते हैं।

 
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