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छात्रों में गुणात्मक सुधार के लिए चरित्र, निर्माण, सोच एवं सृजन विचार से दायित्व निभाएं
विद्यालय आइना है रोज देखे और कमियां दूर करते चले, संसाधनों के लिए नहीं ज्ञान जागृत कराने के लिए दृढ़ निश्चयी बनें
छतरपुर | 09-सितम्बर-2021
    कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह की विशेष उपस्थिति में गुरुवार को ऑडिटोरियम छतरपुर में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के तहत विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी, हायर सेकेण्डरी के प्राचार्य, बीईओ, बीआरसी, बीएसी, सीएसी तथा क्लस्टर नोडल अधिकारियों का जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के उद्देश्य को हासिल करने के लिए लापरवाही नहीं गंभीरता एवं ईमानदारी से दायित्व निर्वहन करते हुए सार्थक परिणाम दे। उन्होंने कहा कि छतरपुर जिले के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ छात्रों को बेहतर नागरिक बनाने की जिम्मेदारी मंे शिक्षक चरित्र सोच और विचार सृजन से दायित्व निभाएं तभी सामाजिक विकास संभव है। उन्होंने कहा कि विद्यालय ज्ञान का आइना है इसे रोज देखे और इसकी कमियां दूर करते चले। शिक्षक संसाधनों के लिए नहीं ज्ञान जागृत कराने के लिए दृढ़ निश्चयी बनें।
शाला में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई ठीक ढंग से नहीं होने पर 50 से 60 प्रतिशत बच्चे बेरोजगारी के संकट में आ खड़े होते है। इससे बच्चों की सामाजिक तरक्की के साथ-साथ देश तरक्की भी बाधित होती है। उन्होंने शिक्षकों का आव्हन करते हुए कहा कि जिले के स्टूडेंट को दक्ष बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए कार्य करें, जिससे जिले के छात्र प्रवासी मजदूर बनने से बच सकें। यह जिम्मेदारी है शिक्षकों की है वह छात्रों को मजदूर नहीं अपितु मजबूत बनाएं जिससे उनका आने वाला कल बेहतर हो सकें। जिले के सामाजिक तरक्की के लिए राष्ट्रीय सर्वेक्षण को जिम्मेदारी को निभाएंगे और छतरपुर जिले को प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगें। कार्यक्रम जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. शर्मा ने विचार व्यक्त किए।    
उन्होंने कहा कि निजी शैक्षणिक संस्थाओं की अपेक्षा शासकीय शिक्षकों अधिक संसाधन और बेहतर सुविधा मुहैया कराई जा रही है। सरकारी संस्थाओं के शिक्षक उच्च दक्षता प्राप्त है। यह शिक्षक पर निर्भर है कि वह उपलब्ध सुविधाओं से छात्रों में गुणात्मक शिक्षा का विकास कैसे करें।
प्रारंभ में नोडल प्रशिक्षक द्वारा शिक्षकों को एनईएस के उद्देश्य की जानकारी देते हुए राज्य की शिक्षा की गुणवत्ता की परक करने के संबंध में बिंदुवार समझाइस दी गई। उन्होंने कहा कि शिक्षक स्टूडेंट की नीड्स को समझकर इम्प्रूमेंट करें और सतत् अभ्यास प्रश्न हल कराते हुए बच्चों की त्रुटि कमजोरी और दिक्कतों को दूर करें और उन्हें ज्ञानार्जन के लिए सीखने और सिखाने की महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें। मॉक टेस्ट के आधार पर प्रश्नवार विश्लेषण करें। ऐसे कौन से प्रश्न है जिन्हें छात्र हल नहीं कर पा रहें, उनकी जांच करें, उनके संबंध में छात्रों से चर्चा करें और इस आधार पर सुधार की रणनीति तैयार करें। मास्टर ट्रेंनर ने कहा कि शिक्षक मानीटरिंग कर्ता है। उन्हें क्लासवार मानीटरिंग करनी होगी। जिससे जिले के रिपोर्ट कार्ड को समझा जा सकेंगा। एनईएस के प्रश्न दक्षता आधारित होते है इन्हें रटाएं नहीं। शिक्षक लर्निंग आउटकम्स की मेपिंग अनिवार्य रूप से करें। जो बच्चे शाला नहीं आ रहे उन्हे डिजीटल रूप से शिक्षित करें।
 
(36 days ago)
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