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शहर को कचरा मुक्त एवं सुंदर बनाने, समाज एवं संस्थाएं आगे आए
कचरा सड़कों पर नहीं संकलन वाहन में ही डाले, सड़क पर कचरा फैककर खुद ही बिमारी को आमंत्रित करते है
छतरपुर | 10-सितम्बर-2021
      कलेक्टर छतरपुर शीलेन्द्र सिंह ने कहा कि सर्वसमाज तथा स्वंयसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने तथा लोगों को संक्रमित बीमारियों से बचाने के लिए जागरूक बने और डोर टू डोर आने वाले वाहन में ही कचरा डालने की प्रतिज्ञा लें। ऐसा करके सच्चे देशभक्त होने के साथ जागरूक नागरिक होने का परिचय भी दें। समाज का कोई भी व्यक्ति सड़क पर यह सोचकर कचरा नहीं फैके की खाली जगह है। इस धारणा को बदले। खुली सड़क पर कचरा फैककर हम खुद ही बिमारी को आमंत्रित करते है। हमारे इस आचरण से हम ही नहीं बल्कि समाज के दूसरे व्यक्ति भी रोग की जद में आकर असमय अस्वस्थ होते है। उन्होंने कहा कि सामाजिक व्यक्ति द्वारा सड़कों पर फैलाई गई गंदगी से विभिन्न बीमारियों से लोग असमय बीमारियों से ग्रसित होते है जिसके कारण उन्हें और उनके परिवार को स्वास्थ्य पर व्यय करते हुए आर्थिक बोझ सहना पड़ता है।
   कलेक्टर श्री सिंह ने शुक्रवार को नगरीय निकायों की समीक्षा बैठक में आगे कहा कि अस्वस्थ वातावरण का व्यक्ति के दैनिक दिनचर्या के व्यवहार एवं स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है और वह स्वयं को असहज महसूस करता है। जिससे उसकी शारीरिक कार्यक्षमता प्रभावित होती है तथा मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। वह किसी कार्य को करने में सफल नहीं होता है। अस्वस्थ व्यक्ति का मन और मस्तिष्क पढ़ने एवं खेलने में भी नहीं लगता है।
एक व्यक्ति के दो बार बीमार होने पर आर्थिक बोझ की स्थिति
   सामाजिक मानवीय जीवन में यदि एक व्यक्ति वर्ष में दो बार भी अस्वस्थ्य होता है तो उसके एक बार के उपचार में औसत रूप में 12 सौ रुपये तक खर्च होता है। मान ले कि छतरपुर शहर में रहने वाले 2 लाख लोगों में से 25 प्रतिशत अर्थात 50 हजार व्यक्ति दो बार बीमार होते है तो उनके स्वस्थ पर वर्ष में औसत रुप से 60 लाख रुपये खर्च होते है। इसी बात को 2011 की जनसंख्या के मान से छतरपुर जिले के संदर्भ में देखे तो जिले के आबादी 17 लाख 62 हजार 375 है। वर्तमान की जनसंख्या 20 लाख मान ले तो एक वर्ष में 5 लाख लोग अस्वस्थ होते है। जिनके उपचार पर 12 सौ रुपये के मान से 60 करोड़ रुपये खर्च होता है। यह व्यय केवल और केवल अस्वस्थ वातावरण एवं गंदगी के कारण खर्च करना पड़ता है। समाज में रहने वाले सभी व्यक्ति आज सबसे अधिक राशि स्वस्थ पर व्यय करते है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि हम एक दूसरे को स्वस्थ बनाये रखने के लिए अपना आचरण और व्यवहार ऐसा करें जिससे वातावरण स्वस्थ और सुंदर रहे। इस सामाजिक भावना के लिए किसी को और कुछ नहीं केवल स्वच्छता का पालन करने के लिए मर्यादित होकर सामाजिक जीवन को स्वच्छ बनाये रखने का संकल्प लेना होगा।
(35 days ago)
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