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नेशनल लोक अदालत में हुआ 1454 प्रकरणों का निराकरण
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सीधी | 11-सितम्बर-2021
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार 11 सितंबर को जिला न्यायालय सीधी एवं सिविल न्यायालय चुरहट, रामपुर नैकिन तथा मझौली में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अमिताभ मिश्र द्वारा जिला न्यायालय परिसर में दीप प्रज्वलन कर किया गया। शुभारंभ अवसर पर प्रधान जिला न्यायाधीश ने कहा कि जिला सीधी में उनकी यह पहली नेशनल लोक अदालत है। श्री मिश्र ने कहा कि नेशनल लोक अदालत नई संकल्पना नहीं है। पुराने जमाने में पंचायत स्तर पर बैठकर आपसी सहमति से प्रकरणों को सुलझा लिया जाता था इसी क्रम में नेशनल लोक अदालत में भी पक्षकारों की आपसी सहमति से प्रकरणों का निराकरण होता है तथा प्रकरण पूरी तरह समाप्त हो जाता है। श्री मिश्र ने कहा कि नेशनल लोक अदालत में ऐसे आपराधिक प्रकरणों का भी निराकरण होता है जो कि राजीनामा योग्य है, आपसी सहमति से निराकरण होने पर पक्षकारों के मध्य वैमनस्यता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। श्री मिश्र ने उद्घाटन सभा में कहा कि जिले में विवाद विहीन ग्रामों की स्थापना की जावेगी विवाद विहीन ग्रामों की स्थापना के लिए प्रधान जिला न्यायाधीश ने न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं पुलिस प्रशासन से सहयोग की अपील की है। श्री मिश्र ने कहा कि इस देश के निर्माण में अधिवक्ताओं की सबसे बड़ी भूमिका रही है इसी प्रकार लोक अदालत में भी प्रकरणों का निराकरण करने के लिए अधिवक्ताओं का सहयोग अति आवश्यक है। श्री मिश्र ने विवाद विहीन समाज की स्थापना के लिए न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, प्रशासनिक अधिकारियों एवं उपस्थित सभी पक्षकारों से कार्य करने के लिए आह्वान किया।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह ने कहा कि अधिवक्ताओं ने नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण में सहयोग किया है तथा आगे आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालतों में भी अधिवक्ता संघ का पूरा सहयोग न्यायालय को मिलता रहेगा। श्री सिंह ने कहा कि जिन प्रकरणों का निराकरण हो जाता है उनका संदेश ऐसे प्रकरण के अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों को समाज में देना चाहिए जिससे अन्य व्यक्ति भी नेशनल लोक अदालत से होने वाले लाभों को जान सके और अपने प्रकरणों का निराकरण करा सकें।
    अपर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा राजस्व लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है जिसमें प्रकरणों का निराकरण आपसी सहमति से करने का प्रयत्न किया जाता है। श्री पंचोली ने कहा कि राजस्व शिविरों के माध्यम से ऐसे प्रकरणों का निराकरण किया गया जो भविष्य में सिविल विवाद के कारण बन सकते थे। श्री पंचोली द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित समस्त जनहितैषी कार्यक्रमों एवं शिविरों को पूरा सहयोग देने की बात कही गई।
     कार्यक्रम में उपस्थित पुलिस अधीक्षक पंकज कुमावत ने कहा कि न्याय प्राप्ति में विलंब न हो इसलिए वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया बनाई गई है। श्री कुमावत ने न्यायालयों द्वारा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए उठाये गये कदमों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में नेशनल लोक अदालत के प्रभारी तथा कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश डी.के. नागले, विशेष न्यायाधीश अजीत सिंह एवं अपर जिला न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवीलाल सोनिया ने विचार व्यक्त किये।
शुभारंभ कार्यक्रम में प्रथम अपर जिला न्यायाधीश वीरेन्द्र कुमार, द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश आर.पी. कतरौलिया, तृतीय अपर जिला न्यायाधीश विवेक कुमार सिंह, चतुर्थ अपर जिला न्यायाधीश राजेश सिंह, पंचम अपर जिला न्यायाधीश उमेश कुमार शर्मा, प्रथम अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, ललित कुमार झा, मुख्य न्यायिक मजिस्टेट पुष्पक पाठक, न्यायाधीशगण प्रशांत पाण्डेय, लवकेश सिंह राहुल सिंह यादव, प्रीति पाण्डेय, प्रदीप कुमार परिहार, शुभ्रांशु ताम्रकार, विशद गुप्ता एवं अधिवक्तागण राजेन्द्र सिंह परिहार, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, भरतलाल गुप्ता, राजेन्द्र द्विवेदी, देवेन्द्र सिंह परिहार, विनोद श्रीवास्तव सहित समस्त पदाधिकारीगण एवं सुलहकर्ता अधिवक्तागण तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आई.जी. गुप्ता, जेल अधीक्षक संजीव गेंदले सहित विद्युत विभाग, बैंक एवं नगरीय निकाय के प्रशासनिक अधिकारीगण, पैरालीगल वालेंटियर्स एवं जिला न्यायालय तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।                                  
          जिला विधिक सहायता अधिकारी अमित शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल लोक अदालत में प्रकरणो के निराकरण हेतु जिला मुख्यालय सीधी में 13 खंडपीठे, व्यवहार न्यायालय चुरहट में 02, मझौली में 03 व रामपुर नैकिन में 02 खंडपीठे गठित की जाकर कुल 20 खंडपीठें गठित की गई थी। नेशनल लोक अदालत में समझौता योग्य आपराधिक, सिविल, विद्युत अधिनियम, श्रम, मोटर दुर्घटना दावा, निगोशियेबल इस्ट्रूमेन्ट एक्ट के अन्तर्गत चेक बाउंस प्रकरण, कुटुम्ब न्यायालय तथा, नगर पालिका के जलकर से संबंधित प्रकरणो के सहित विद्युत वितरण कम्पनी, समस्त बैंकों के ऋण वसूली मुकदमा पूर्व प्री-लिटिगेशन के प्रकरण इस लोक अदालत में निपटारे हेतु रखे गये।
          नेशनल लोक अदालत में न्यायालयों मंे लम्बित कुल 3251 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गये जिनमें 289 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इसी प्रकार कुल 39 हजार 580 प्री-लिटिगेशन प्रकरण निराकरण हेतु रखे गये जिनमें 1175 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। मोटर दुर्घटना दावा के अन्तर्गत 39 क्लेम प्रकरण निराकृत किये गये जिसमें पक्षकारांे को 80 लाख 61 हजार 500 रूपये की क्षतिपूर्ति राशि प्राप्त हुई। विद्युत अधिनियम से संबंधित एवं न्यायालय में लंबित 81 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसमें 4 लाख 16 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ तथा विद्युत के 788 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया जिसमें 20 लाख 88 हजार रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। नेशनल लोक अदालत में 54 लाख 93 हजार 329 रूपये के चेक बाउंस के 32 प्रकरणों का निराकरण किया गया। नेशनल लोक अदालत में 41 आपराधिक राजीनामा योग्य प्रकरणों, 27 वैवाहिक प्रकरणों, 48 सिविल प्रकरणांे का निराकरण किया गया। नेशनल लोक अदालत में बैंक वसूली के 196 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसमें विभिन्न बैंकों को 1 करोड़ 30 लाख 24 हजार 918 रूपये की राशि प्राप्त हुई। नगरीय निकाय के अन्तर्गत, जलकर के 66 प्रकरणों एवं संपत्तिकर के 125 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसमें नगरीय निकायो को 6 लाख 65 हजार 872 रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ। नेशनल लोक अदालत में राजीनामा करने वाले पक्षकारों को वन विभाग की ओर से   निःशुल्क फलदार पौधे प्रदान किये गये।
सालों से अलग रह रहे परिवारों में हुआ समझौता। बहरी तहसील के राजमणी रावत तथा बूटा रावत के बीच वर्ष 2020 से वैवाहिक मतभेद था तथा पति-पत्नी अलग रह रहे थे। प्रधान जिला न्यायाधीश अमिताभ मिश्र, कुटुम्ब न्यायालय के न्यायाधीश डी.के. नागले, तृतीय अपर जिला न्यायाधीश विवेक सिंह एवं अधिवक्ता योगेन्द्र सिंह द्वारा प्रयास किये जाने पर दोनों ने अपने मतभेद समाप्त कर नेशनल लोक अदालत में राजीनामा कर लिया। नौगवां निवासी शिवमोहन विश्वकर्मा एवं उनकी पत्नी विमला के मध्य वर्ष 2019 की शुरूआत से ही विवाद चल रहा था। न्यायाधीशगण एवं अधिवक्ता विनोद कुमार श्रीवास्तव के प्रयासों से यह विवाद समाप्त हुआ और दोनों खुशी से अपने घर चले गये। कुटुम्ब न्यायालय के माध्यम से कई पारिवारिक प्रकरणों में राजीनामा हुआ तथा उनके परिवार बिखरने से बच गये।
(37 days ago)
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