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कृषि विज्ञान केन्द्र देवास द्वारा ग्राम रतनखेड़ी में सोयाबीन दिवस का आयोजन
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देवास | 11-सितम्बर-2021
   कृषि विज्ञान केन्द्र देवास द्वारा  विकासखण्ड टोंकखुर्द में  ग्राम रतनखेड़ी में  सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् इंदौर के निदेशक  प्रोफेसर नीता खंडेकर के  मुख्य आतिथ्य में सोयाबीन दिवस का  आयोजन किया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम में सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस.बी.बिल्लौरे, डॉ. बुद्धेश्वर दुपारे, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. महावीर शर्मा, डॉ. अनीता रानी, डॉ. विनीत कुमार व केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. निशिथ गुप्ता, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. सविता कुमारी द्वारा मुख्य रूप से भागीदारी की गई। कार्यक्रम में ग्राम रतनखेड़ी व आसपास के गांवों से किसान शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं माल्यार्पण से प्रारंभ हुआ।  तत्पश्चात् डॉ. अशोक कुमार दीक्षित, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, देवास द्वारा जिले में सोयाबीन फसल उत्पादन हेतु विविध प्रकार की प्रजातियां जैसे जेएस-2034, आरव्हीएस-18, आरव्हीएस-24, जेएस-2098, आरव्हीएस 2011-35, एनआरसी-138, एनआरसी-130, एनआरसी-142 के बारे में जानकारी दी। साथ ही सफल खेती हेतु कृषि की नवीन तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। तदोपरांत डॉ. बिल्लौरे द्वारा बीजदर व कतार से कतार की दूरी को सही रखने हेतु प्रेरित किया गया।
        डॉ. अनीता रानी द्वारा सोयाबीन की नवीन विकसित उन्नत प्रजाति एनआरसी-138 के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए अधिक उत्पादन प्राप्त करने पर जोर दिया। डॉ. संजय गुप्ता द्वारा नवीन प्रजाति एनआरसी-130 के बारे में जानकारी देते हुए अवगत कराया गया कि सोयाबीन की खेती के लिए यह भविष्य में एक अच्छी प्रजाति साबित हो सकती है। इसके बाद डॉ. विनीत कुमार द्वारा नवीन विकसित प्रजाति एनआरसी-142 को खाद्य रूप में उपयोग और अधिक उत्पादन हेतु शामिल करने हेतु प्रेरित किया गया।
   डॉ. महावीर शर्मा द्वारा जैविक उर्वरकों को शामिल कर समन्वित पोषण प्रबंधन पर जोर दिया गया। डॉ. दुपारे द्वारा प्रसार की विविध गतिविधियों के माध्यम से जानकारी एकत्र कर खेती में शामिल करने के लिए प्रेरित किया, जिससे लागत मूल्य को कम किया जा सके।
   डॉ. मनीष कुमार द्वारा विविध प्रकार के कीटों व बीमारियों के नियंत्रण हेतु सही दवाओं का चुनाव व सही पानी की मात्रा का उपयोग करने के बारे में बताया गया। डॉ. गुप्ता द्वारा समन्वित खेती प्रणाली अन्तर्गत उद्यानिकी फसलों को शामिल कर अधिक लाभ कमाने हेतु प्रेरित किया गया। डॉ. सविता कुमारी द्वारा कुपोषण उन्मूलन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में बच्चों व महिलाओं में कुपोषण के निवारण हेतु पोषण सुरक्षा अंतर्गत जैव संवर्द्धित सोयाबीन की प्रजातियां जैसे एनआरसी-127, एनआरसी-142, एनआरसी-109, मैक्सएनआरसी-1667 केटीआई व दुर्गंध मुक्त प्रजातियों को शामिल कर 09ः01 (गेहूं: सोयाबीन) के समानुपात में अपने भोजन में शामिल कर अपनाने हेतु अवगत कराया।
   कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि निदेशक महोदया, प्रोफेसर नीता खंडेकर द्वारा कार्यक्रम में वैज्ञानिकों के सुझाव अनुसार नवीन प्रजातियां जैसे एनआरसी-138, एनआरसी-130, एनआरसी-142, आरवीएस 2011-35 को शामिल कर अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सविता कुमारी द्वारा किया गया।             
(8 days ago)
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