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अमरूद के साथ रोपित हुए फलराज "कहानी सच्ची है"
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सागर | 16-सितम्बर-2021
    ग्राम खैजराबुद्धू और पटकुई में बाहर से बुलाये गये थाई अमरूदों को हाईडेंनसिटी प्लानटेशन विधि के द्वारा रोपित किया गया था। आरती स्व. सहायता समूह से जुड़ी श्रीमती पिंकी कुशवाहा, श्रीमती देवी कुशवाहा, धन लक्ष्मी समूह से जुड़ी श्रीमती सरला देवी, जलधारा समूह की बेवी रजक ने अपने खेतों में 130 थाई अमरूदों के पौधों का रोपण किया है। बाजार की मांग और मौसम से उत्पन्न होने वाली रिस्क को देखते हुए इन महिलाओं ने अमरूदों के साथ साथ 150 आम की विभिन्न प्रजातियों का भी रोपण किया है। ये दोनें फलदार पौधों को उन्होंने हाईडेनसिटी प्लानटेशन विधि से लगाया है। एसआरएम संस्था जो सीएफटी पार्टनर के रूप में काम कर रही है। संस्था की ओर से श्री प्रदीप जैन ने ये पौधे उपलब्ध कराये हैं जिसमें ग्राफ्टेड, लंगड़ा, चौंसा, नीलम प्रजाति के आम के पौधे हैं।
   आजीविका मिशन की श्रीमती रितु ने इन महिलाओं को पौधरोपण तकनीकी पर प्रशिक्षित किया।  आमतौर पर ग्राफ्टेड प्रजातियां तीसरे साल से फल देना शुरू कर देती हैं। इन प्रजातियों में पौधे का आकार बहुत बड़ा नहीं होता ये थोड़े स्थान पर फेलते हैं। किसान चाहे तो इनके साथ साथ शेड क्रॉप जैसे हल्दी, अदरक और मौसमी भाजी की फसलें भी ले सकता है। फलदार पौधों की धूप छांव में हल्दी और अदरक की बम्पर पैदावार होती है। इन दोनों फसलों में ज्यादा रोग बीमारी नहीं लगती। बल्कि हल्दी के पत्तो को सुखाकर भण्डारित किये गये अनाज के साथ मिला देने पर अनाज में भी कीड़े नहीं लगते।
   क्या है हाइडेंसिटी- जिला प्रबंधक कृषि श्री अनूप तिवारी के अनुसार इस विधि में आम, अमरूद और अनार जैसी फसलों का 1 वाय 1 मीटर की दूरी पर रोपण किया जाता है। ग्राफ्टेड प्रजाति के फलदार पौधे इस विधि के लिए उपयुक्त होते हैं। कमजोत के किसानों के लिए फलदार पौधों की खेती करने के लिए ये विधि सर्वोत्तम होती है। इस विधि में फल लेने के बाद पौधे की पू्रनिंग कर दी जाती है। पौधे की लकड़ियां और पत्ते उसी खेत में बायोमास तैयार करते हैं जो पौधे का भोजन बनता है और जमीन फैण्डली बैक्टीरियल ग्रोथ के कारण उपजाऊ हो जाती हैं। प्रति पौधा 25 से 30 किलो तक उत्तम फल मिलता है।
   दीपक आर्य, जिला कलेक्टर ने बताया कि फसलों के साथ साथ फलदार पौधों की खेती से किसानों की आमदनी में बढ़ोत्तरी होगी। फलदार पौधों के रोपण से खेत में बायोमास और पक्षियों का आवागमन बढ़ेगा जिससे भूमि की उर्वरता में सुधार होगा। जिले की समूह से जुड़ी इन महिलाओं के ये प्रदर्शन प्लॉट अन्य महिलाओं को इन विधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
   डॉ. इच्छित गढ़पाले, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, सागर ने बताया कि मनरेगा के माध्यम से जिले के किसान अपने खेतों में फसलों के साथ साथ फलदार पौधां का रोपण कर सकते हैं। इससे फसल में नुकसान होने की दशा में भी वे फलदार पौधों की बिक्री से आमदनी कमा सकते हैं। साथ ही साथ कुपोषण, एनीमिया जैसे रोगों को संतुलित आहार के माध्यम से दूर किया जा सकेगा।

 
(35 days ago)
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